राज्यसभाः जानिए, कहां कितनी सीटों पर मचा है घमासान
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राज्यसभा की 57 रिक्त सीटों के लिए 11 जून को मतदान होना है, लेकिन उससे पहले ही संसद के इस ऊपरी सदन के लिए शह मात और प्यादों की घेराबंदी का खेल शुरू हो गया है। राज्यसभा के साथ ही कई राज्यों में विधानपरिषद के चुनावों को देखते हुए विधायकों की घेराबंदी चल रही है तो चाय पालीटिक्स भी जोरों पर है, कर्नाटक में विधायकों के स्टिंग की चर्चा है तो निर्दलीय विधायकों को तोड़ने की तिगड़म भी लगाई जा रही है। एक पार्टी तो अपने विधायकों को प्रलोभन के लिए आने वाले फोन कॉल को रिकार्डिंग करने की ट्रेनिंग भी दे रही है। तो आइए, राज्यवार जानते हैं राज्यसभा के इस शह मात के खेल में किस तरह बिछी है बिसात।
उत्तर प्रदेश: 11 सीट
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 11 सीटों के लिए चुनाव होना है। यहां राज्यसभा की एक सीट के लिए 34 विधायकों की आवश्यकता है। ऐसे में भाजपा जहां अपने विधायकों के बल पर 7 नामों की घोषणा कर चुकी है वहीं बसपा दो और भाजपा एक सीट के लिए अपने उम्मीदवार तय कर चुकी है। दोनों पार्टियों के संख्याबल के अनुसार उनके उम्मीदवारों का चुना जाना तय है लेकिन यहां पेंच फंस रहा है कांग्रेस के लिए, जिसके पास 29 विधायक हैं। पार्टी ने यहां से पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल को उम्मीदवार बनाया है।
पार्टी को अभी भी 5 विधायकों की जरूरत है। इस पर चर्चा के लिए 8 जून को लखनऊ में पार्टी विधायकों की बैठक बुलाई गई है। कांग्रेस की निगाहें सपा और बसपा के अतिरिक्त विधायकों पर गड़ी हैं। हालांकि इससे पहले ही सिब्बल का खेल बिगाडने के लिए निर्दलीय उम्मीदवार और गुजरात के अरबपति उद्योगपति की पत्नी प्रीती महापात्रा ने मैदान में ताल ठोंक दी है। प्रीति के नामांकन के दौरान भाजपा और कई निर्दलीय विधायकों की मौजूदगी ने सभी उम्मीदवारों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है।
प्रीति के आत्मविश्वास को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि निर्दलीयों के साथ ही कुछ पार्टियों के विधायकों का समर्थन भी उन्हें अंदरखाने हासिल है। दूसरी ओर भीतरघात की आशंका को देखते हुए सभी पार्टियों ने अपने विधायकों की गोलबंदी शुरू कर दी है। सपा ने मंगलवार रात अपने 229 विधायकों की बैठक बुलाई है तो बसपा सुप्रीमो ने निर्देश जारी कर साफ कर दिया है कि सभी विधायक किसे वोट देना है का निर्देश मिलने के बाद वोटिंग से एक दिन पहले ही लखनऊ आएंगे। हालांकि कांग्रेस सूत्रों का दावा है कि बसपा ने उन्हें समर्थन का आश्वासन दिया है।
मध्यप्रदेश की तीन सीटों पर घमासान
मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए मतदान होना है। इसी कड़ी में कांग्रेस ने सोमवार को अपने 57 विधायकों का एक ट्रेनिंग सेशल बुलाया जिसमें उन्हें बताया गया कि अगर उन्हें दूसरी पार्टियों द्वारा रिश्वत का प्रलोभन दिया जाता है तो कैसे उनका फोन टेप करना है। हालांकि इस ट्रेनिंग सेशन में उसके पांच विधायक शामिल नहीं हो पाए, इनमें से चार ने तो अपनी अपनी मजबूरी भी बयां कर दी। लेकिन पार्टी जतारा के विधायक दिनेश अहिरवार को लेकर संदेह में है।
जिनके बारे में आशंका व्यक्त की जा रही है कि उनकी निष्ठा भाजपा के प्रति जाती दिख रही है। हालांकि कांग्रेस को उस समय कुछ राहत मिली जब बसपा ने अपने चार विधायकों को कांग्रेस उम्मीदवार विवेक तन्खा को समर्थन करने के निर्देश दिए। इसके अलावा कांग्रेस ने मुंबई में इलाज करा रहे विधायक सत्यदेव कटारे के लिए पोस्टल बैलेट की सुविधा देने के साथ ही जेल में बंद एक एमएलए को जमानत देने की मांग की है। असल में एकमात्र सीट जीतने की उम्मीद में लगी कांग्रेस की मुश्किलें भाजपा के एक अन्य उम्मीदवार विनोद गोटिया ने बढ़ा दी हैं।
झारखंड: दो सीट
झारखंड की दो सीटों के लिए भी घमासान मचा हुआ है। यहां से भाजपा उम्मीदवार मुख्तार अब्बास नकवी का चुना जाना तो तय है लेकिन पार्टी ने दूसरे उम्मीदवार महेश पोद्दार को मैदान में उतारकर दूसरी पार्टियों का खेल बिगाड़ दिया है। कांग्रेस और झारखंड विकास मोर्चा ने यहां झारखंड विकास मोर्चा के अध्यक्ष शिबु सोरेन के भाई बेसंत सोरेन को समर्थन दिया है। भाजपा यहां दो तिहाई के साथ बहुमत में है लेकिन अपने दूसरे उम्मीदवार को जीत दिलाने के लिए उसे सात और विधायकों की जरूरत है। वहीं कांग्रेस, झारखंड विकास मोर्चा और झारखंड मुक्ति मोर्चा के कुल 28 विधायक का ही समर्थन है।
राजस्थान: 4 सीट
राजस्थान में 160 से ज्यादा विधायकों के साथ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है। इसके अतिरिक्त चार निर्दलीय विधायकों के समर्थन के साथ उसे उम्मीद है कि उसके चारों उम्मीदवार राज्यसभा पहुंच सकते हैं। हालांकि कांग्रेस के समर्थन से मैदान में उतरे उद्योगपति कमल मोरारका ने भाजपा के खेल को बिगाड़ दिया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री मोरारका के मैदान में आने के बाद भाजपा ने अपने विधायकों के लिए व्हिप जारी कर दिया है, इसके अलावा उन्हें ट्रेनिंग देने के लिए अज्ञात स्थान पर एक सत्र आयोजित किया जा रहा है। राष्ट्रीय जमींदारा पार्टी के दो विधायकों के साथ ही मोरारका ने शेष विपक्ष के समर्थन का दावा किया है। जिनमें बसपा, नेशनल पीपल पार्टी, कांग्रेस और कुछ निर्दलियों का भी समर्थन है। हालांकि इसके बावजूद भी उन्हें 41 विधायकों के कुल समर्थन में पांच विधायकों की कमीं पड़ रही है। विपक्ष को उम्मीद है भाजपा के कुछ असंतुष्ट विधायक उनकी मदद कर सकते हैं।
हरियाणा की दो सीटों पर भिड़े तीन दल
हरियाणा में दो सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए भाजपा ने केंद्रीय मंत्री बीरेन्द्र सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है तो जी ग्रुप के मालिक सुभाष चंद्रा को बाहर से समर्थन दिया है। सुभाष चंद्रा स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं। उनका दावा है कि दूसरी पार्टियों के विधायकों ने भी उन्हें समर्थन का वादा किया है। वहीं इनैलो ने सुप्रीम कोर्ट के वकील आरके आनंद को अपना उम्मीदवार बनाया है। 90 सदस्यीय हरियाणा विधानसभा में भाजपा के 47 विधायक हैं। इनैलो के 19 और कांग्रेस के 17 विधायक। हालांकि शुरूआत में संभावना इस बात की जताई जा रही थी कि इनैलो भी सुभाष चंद्रा को समर्थन करेगा, लेकिन उसने अपना उम्मीदवार उतारकर तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया।
कर्नाटक: 4 सीट
राज्यसभा चुनाव को लेकर सबसे ज्यादा घमासान मचा है कांग्रेस शासित कर्नाटक में। राज्य की चार सीटों के लिए होने वाले चुनाव में सत्तारूढ़ कांग्रेस और भाजपा के बीच जबरदस्त मारामारी है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कांग्रेस ने 7 निर्दलीय विधायकों को अपने पाले में बनाए रखने के लिए मुंबई भेज दिया। इसके अलावा अभी कई और विधायकों को भी राज्य से बाहर भेजे जाने की संभावना है। बीते दिनों कर्नाटक में एक स्टिंग आपरेशन भी सामने आया था जिसमें राज्य के कुछ विधायक पैसे के बदले समर्थन देने का वादा करते दिख रहे थे। 224 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 123 विधायक हैं। यहां एक उम्मीदवार को जीत के लिए 45 विधायकों की जरूरत है। हालांकि यहां से पार्टी के दो उम्मीदवारों पार्टी आस्कर फर्नांडीज और जयराम रमेश का जीतना तो लगभग तय है। लड़ाई तीसरे उम्मीदवार पूर्व आईपीएस ऑफिसर और शिक्षाविद् केसी राममूर्ति के चुनाव को लेकर है। 45 सदस्यों वाली भजपा ने केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण को मैदान में उतारा है, जिनका जीतना लगभग तय है।
वहीं राज्य की तीसरी ताकत जेडीएस ने अरबपति उद्योगपति बीएम फारुख को अपना उम्मीदवार बनाया है। पार्टी के 40 विधायक हैं, उसे पांच विधायकों की जरूरत है, जिसके लिए उसकी उम्मीद निर्दलीय विधायकों पर टिकी है। यहां लड़ाई इस कदर पेचिदा हो चुकी है कि मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और ऊर्जा मंत्री डीके शिवाकुमार पर आरोप लगा है कि उन्होंने समर्थन के बदले निर्दलीय विधायकों की निधि बढ़ाने का आश्वासन दिया है।
उत्तराखंड: एक सीट
सबसे ज्यादा घमासान उत्तराखंड की एक सीट पर होने वाले चुनाव को लेकर मचा है। कांग्रेस ने यहां से पूर्व विधायक प्रदीप टम्टा को अपना उम्मीदवार बनाया है तो उनके सामने दो भाजपा नेता स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं। भाजपा ने अभी तक इस पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं, पार्टी का कहना है कि चुनाव के दिन ही इस बात का निर्णय किया जाएगा कि किसे वोट दिया जाए।
इसके अलावा महाराष्ट्र की छह, तमिलनाडु की छह, बिहार की पांच, आंध्र प्रदेश की चार, ओडिशा की तीन, तेलंगाना की दो, छत्तीसगढ़ की दो, पंजाब की दो और झारखंड की दो सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन हो चुका है।