राज्य सभा चुनाव: गुजरात में चार सीटों के लिए छह उम्मीदवार, कांग्रेस-भाजपा में कड़ी टक्कर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव के लिए सोमवार को नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि पर कई जगहों पर अतिरिक्त उम्मीदवारों द्वारा पर्चा दाखिल करने से वहां मुकाबला रोचक हो गया है। सबसे नाटकीय घटनाक्रम गुजरात का रहा, जहां कांग्रेस के उम्मीदवार नारायण भाई राठवा नामांकन दाखिल करते समय जरूरी कागजात नहीं जमा कर पाए। आनन फानन में कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला को गुजरात पहुंच कर नामांकन दाखिल करने को कहा।
सोमवार को संसद में मौजूद शुक्ला ने चार्टर्ड हवाई जहाज का इंतजाम भी कर लिया था लेकिन मालूम चला अहमदाबाद हवाई अड्डे का रनवे रिपेयर होने की वजह से सुबह दस बजे से शाम सात बजे तक न कोई फ्लाइट लैंड कर सकेगी और न ही टेक ऑफ।
अहमदाबाद एयरपोर्ट के निदेशक के अनुसार, रनवे मेंटेनेंस का काम 28 फरवरी को शुरू हुआ था और 2 अप्रैल तक चलेगा। यानी राजीव शुक्ला के नामांकन फाइल करने की समय सीमा तीन बजे तक अहमदाबाद पहुंच पाने की कोई संभावना नहीं थी। ऐसे में कांग्रेस आलाकमान ने एक पूर्व नौकरशाह पीके भालेरा से नामांकन दाखिल करा दिया।
इसी बीच राठवा के कागजातों में गड़बड़ी की सूचना भाजपा नेताओं को भी लग गई। उन्होंने भी तुरंत एक स्थानीय भाजपा नेता किरीट सिंह राणा से भी नामांकन दाखिल करा दिया। हालांकि कांग्रेस सूत्र दावा कर रहे हैं कि राठौड़ ने चुनाव आयोग द्वारा मांगे गए सभी कागजात तीन बजे की समय सीमा से पहले ही जमा कर दिए। कांग्रेस की ओर से एक और अन्य उम्मीदवार जानी-मानी वकील और पार्टी प्रवक्ता याग्निक है।
गुजरात के चार लोकसभा सीटों के लिए कुल उम्मीदवारों की संख्या छह हो गई है। हालांकि विधायकों की संख्या के हिसाब से भाजपा और कांग्रेस दोनों को दो-दो सीटें ही मिल सकती हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उनकी पहली पसंद याग्निक और राठवा हैं। लेकिन किसी वजह से उनमें से किसी का नामांकन यदि रद्द होता है तो ऐसी स्थिति में भालेरा बैकअप उम्मीदवार रहेंगे।
कर्नाटक में जद(से) विद्रोहियों के सहारे कांग्रेस का तीसरा उम्मीदवार
कांग्रेस ने कर्नाटक में तीसरा उम्मीदवार उतार दिया है जबकि विधायक दल की संख्या के अनुसार केवल दो ही सीट जीत सकती है। हर उम्मीदवार को जीतने के लिए 44 वोट चाहिए। वहां भाजपा के 43, जद (से) के 37, कांग्रेस के 123 व अन्य 15 विधायक हैं। ऐसे में कांग्रेस जद (से) के सात विद्रोही विधायकों और कुछ निर्दलियों के सहारे तीसरी सीट जीतने की आशा कर रही है।
महाराष्ट्र में केतकर मुश्किल में
लेकिन महाराष्ट्र में कांग्रेस के उम्मीदवार और पत्रकार कुमार केतकर की जीत की संभावनाओं पर भी प्रश्नचिन्ह लग रहा है। केतकर को जिताने के लिए जरूरी विधायकों की संख्या से कांग्रेस के पास चार कम हैं तो वहीं उसके नेता नारायण राणे के बीजेपी में शामिल होने से उनके विधायक बेटे सहित अन्य समर्थकों के वह भी कांग्रेस को नहीं मिलेंगे।
बंगाल में वाम का एकला चलो रे
उधर, पश्चिम बंगाल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने दक्षिण कोलकाता से कई बार विधायक रहे रबीन देब को उम्मीदवार बनाया है। यह फैसला सीपीएम की कांग्रेस और भाजपा से बराबर दूरी बनाने की नीति के तहत लिया गया है। लेकिन देब की उम्मीदवारी से ना तो तृणमूल कांग्रेस के किसी उम्मीदवार को कोई खतरा है और ना ही कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी को। सिंघवी को जरूरी वोट कांग्रेस के विधायकों के अलावा तृणमूल कांग्रेस के अतिरिक्त विधायकों से मिल जाएंगे।
बिहार में कांग्रेस के अखिलेश
राजद से कांग्रेस में शामिल हुए पूर्व मंत्री अखिलेश सिंह के मैदान में उतरने से मुकाबला कड़ा हो गया है। यहां, कांग्रेस के पास 27 विधायक हैं। उसे राजद के आठ अतिरिक्त उम्मीदवारों का साथ मिलने से जीत के लिए जरूरी 35 की संख्या तक पहुंचने की उम्मीद है। वहां, दो राजद, दो जद(यू) और एक बीजेपी उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित है।
यूपी में बीजेपी को नौ सीटों की आशा
वहीं उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने एक उम्मीदवार अनिल अग्रवाल को बतौर निर्दलीय उतार दिया है। यानी अब राज्य से 10 राज्य सभा सीटों के लिए 11 उम्मीदवार हो गए हैं। ऐसे में बसपा उम्मीदवार भीमराव अंबेडकर के लिए मुश्किल खड़ी हो गई है क्योंकि उन्हें जीतने के लिए सपा के अतिरिक्त वोटों के अलावा कांग्रेस के वोटों की भी दरकार थी।
हर उम्मीदवार को जीत के लिए 37 वोट चाहिए। इस तरह बीजेपी के पास अपने आठ उम्मीदवार जिताने के बाद भी 28 वोट बचे रहेंगे। जबकि सपा के राज्य सभा सांसद नरेश अग्रवाल के सपा छोड़कर भाजपा में शामिल होने से उनके विधायक बेटे नितिन अग्रवाल का वोट भाजपा को मिलेगा। साथ ही कुछ निर्दलियों के वोट भी अनिल अग्रवाल को मिलने की संभावना है।