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Rajya Sabha Election: कांग्रेसी छत्रपों के आगे झुका पार्टी हाईकमान! 'स्याही कांड' का खौफ ले गया हरियाणा से राजस्थान

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 31 May 2022 06:57 PM IST
सार

Rajya Sabha Election: वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक रशीद किदवई कहते हैं, कांग्रेस पार्टी खुद को बदलने की राह पर चली थी, मगर राज्यसभा चुनाव ने पार्टी की पोल खोल कर रख दी है। कई छत्रपों ने हाईकमान को आईना दिखा दिया। सब कुछ ठीक चल रहा है और हाईकमान कल्चर मौजूद है, तो रणदीप सुरजेवाला को हरियाणा छोड़कर राजस्थान क्यों जाना पड़ा

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Rajya Sabha Election: Congress party sure about out of 57 Rajya Sabha seats in 15 states, 10 of its candidates will win
कांग्रेस पार्टी नव संकल्प शिविर - फोटो : PTI (File Photo)

विस्तार

Rajya Sabha Election: कांग्रेस पार्टी आश्वस्त है कि 15 राज्यों की 57 राज्यसभा सीटों में से उसके 10 उम्मीदवार जीत दर्ज कराएंगे। राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी को लग रहा है कि अब 'जी-23' तो खत्म सा हो गया है। भले ही कपिल सिब्बल जैसे कद्दावर नेता, कांग्रेस को अलविदा कह गए। पवन खेड़ा का नाम जब राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची में नहीं दिखा, तो उन्होंने भी ट्विटर पर लिख दिया, शायद मेरी तपस्या में कुछ कमी रह गई। कांग्रेस नेता नगमा ने भी पवन खेड़ा के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए लिखा, हमारी भी 18 साल की तपस्या 'इमरान' प्रतापगढ़ी के आगे कम पड़ गई। ऐसे में अब सवाल उठता है कि राजस्थान के चिंतन शिविर में पार्टी ने जिन बदलावों का जिक्र किया था, क्या वे पूरे हो रहे हैं।

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कांग्रेस पार्टी की राजनीति को बारीकि से समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक रशीद किदवई कहते हैं, राज्यसभा चुनाव में 'कांग्रेसी छत्रपों' के आगे पार्टी हाईकमान झुक गया है। 'स्याही' कांड का डर था, तभी तो हरियाणवी सुरजेवाला, राजस्थान में ताल ठोकने चले गए। दरअसल लोग क्या कहेंगे, कांग्रेस पार्टी अब ऐसे राजनीतिक समाज की परवाह नहीं करती।
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राज्यसभा चुनावों ने खोली पोल

बतौर रशीद किदवई, कांग्रेस पार्टी खुद को बदलने की राह पर चली थी, मगर राज्यसभा चुनाव ने पार्टी की पोल खोल कर रख दी है। कई छत्रपों ने हाईकमान को आईना दिखा दिया। सब कुछ ठीक चल रहा है और हाईकमान कल्चर मौजूद है, तो रणदीप सुरजेवाला को हरियाणा छोड़कर राजस्थान क्यों जाना पड़ा। नेता भले ही कुछ समझें या न समझें, मगर लोग तो जान ही रहे हैं। साल 2016 में हरियाणा में राज्यसभा चुनाव की वोटिंग के दौरान हुआ स्याही कांड सबको याद है। मात्र पैन की स्याही का रंग बदलने से चुनावी नतीजा ही बदल गया था। वही सुभाष चंद्रा, जिन्होंने उस वक्त राज्यसभा चुनाव में बतौर निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर पर्चा भरा था, अब राजस्थान से निर्दलीय उम्मीदवार बनकर राज्यसभा में पहुंचने की जुगत भिड़ा रहे हैं। उस वक्त क्यों और क्या हुआ था, नेता लोग अच्छे से जानते हैं।


कांग्रेस और इनेलो ने तो सुप्रीम कोर्ट के वकील आरके आनंद को अपना उम्मीदवार घोषित किया था। ये अलग बात है कि विधायकों का संख्या बल, सुभाष चंद्रा के पक्ष में नहीं था, लेकिन वे जीत गए। कांग्रेस पार्टी के 14 विधायकों के वोट गलत पेन इस्तेमाल करने के कारण रद्द हो गए थे। किसी ने बड़ी चालाकी से बैंगनी स्याही वाले पेन की जगह नीली स्याही वाला पेन रख दिया। कांग्रेस विधायकों ने उसी पेन से वोट कर दिया। बाद में पता चला कि उनके वोट तो रद्द हो गए हैं। हालांकि उस कांड के बारे में कई तरह की बातें कही गई थीं। आरके आनंद को कांग्रेस के अलावा इनेलो का समर्थन भी हासिल था। सुभाष चंद्रा के भूपेंद्र हुड्डा के साथ अच्छे संबंध थे।

भूपेंद्र हुड्डा के आगे टेके घुटने?

जानकारों के मुताबिक, कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ रणदीप सुरजेवाला का छत्तीस का आंकड़ा रहा है। प्रदेश में कांग्रेस के अधिकांश विधायक भूपेंद्र हुड्डा के साथ बताए गए हैं। अगर पार्टी हाईकमान ने रणदीप सुरजेवाला को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है, तो वह बात पार्टी नेताओं को हजम होनी चाहिए था। रशीद किदवई कहते हैं, इसका तो सीधा मतलब है कि पार्टी में भरोसे की कमी है। क्या रणदीप सुरजेवाला और पार्टी हाईकमान को यह डर था कि हरियाणा में सुरजेवाला की जीत फंस सकती है। ये पार्टी की अंदरूनी राजनीति नहीं, बल्कि हास्यपद राजनीति है। भूपेंद्र हुड्डा जैसे छत्रपों ने कांग्रेस हाईकमान को बाध्य कर दिया कि हरियाणा से राज्यसभा के लिए 'नो' सुरजेवाला, 'नो' शैलजा। पार्टी में कोई बदलाव नहीं दिख रहा। क्या युवा नेताओं को पचास फीसदी टिकट मिल गए। राज्यसभा चुनाव में इमरान प्रतापगढ़ी को छोड़कर बाकी उम्मीदवार तो अंडर 50 नहीं हैं। क्या वंशवाद खत्म हो रहा है। नेताओं के लिए उनके गृह राज्य ही महफूज नहीं रहे। कुछ कथित क्षत्रपों ने तो गृह राज्यों को भी सीमित कर दिया। कांग्रेस कैसी दिखती है, अब तो पार्टी इस पटल पर भी पिछड़ गई। लोग क्या कहेंगे, कांग्रेस पार्टी को अब ऐसे राजनीतिक समाज की परवाह तक नहीं है।

खंडित हो गया जी-23!

कांग्रेस ने राज्यसभा के लिए छत्तीसगढ़ से राजीव शुक्ला, रंजीत रंजन, कर्नाटक से जयराम रमेश, मध्यप्रदेश से विवेक तन्खा, हरियाणा से अजय माकन, महाराष्ट्र से इमरान प्रतापगढ़ी, तमिलनाडु से पी चिदंबरम व राजस्थान से मुकुल वासनिक, रणदीप सुरजेवाला और प्रमोद तिवारी को अपना उम्मीदवार बनाया है। राज्यसभा के लिए उम्मीदवारों का चयन बताता है कि पार्टी में भले ही 'जी-23' खंडित हो गया है, लेकिन क्षत्रप एक नए आकार और शक्ल में सामने आ रहे हैं। चिंतन शिविर में पार्टी ने जिन बातों पर चलने के लिए सहमति जताई थी, उसकी एक बानगी तो राज्यसभा चुनाव में नजर आ गई।

पार्टी किसी भी नेता को पांच साल से ज्यादा कोई एक पद नहीं देगी, इस पर रशीद किदवई कहते हैं, राज्यसभा की सूची ने इस नियम को तार-तार कर दिया है। पार्टी में सारे फैसले कौन ले रहा है, क्या हाईकमान कल्चर जारी है। राज्यसभा के लिए उम्मीदवारों का चयन, क्या इसमें तीन ही लोगों की चली है। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी, पूर्व मुख्यमंत्री, कितने पूछे गए हैं। पांच छह उम्मीदवारों के बारे में कहा जा रहा है कि उन्होंने राहुल और प्रियंका के आशीर्वाद से राज्यसभा का टिकट हासिल किया है। अगर कांग्रेस पार्टी, चिंतन शिविर को यूं ही हवा में उड़ाएगी तो 2024 की राह भी उतनी ही मुश्किल होती जाएगी।

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