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Rajnath Singh: 'पाकिस्तान चार दिन में ही युद्धविराम मांगने पर हुआ था मजबूर', ऑपरेशन सिंदूर पर बोले राजनाथ सिंह

Fri, 29 May 2026 09:56 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Fri, 29 May 2026 09:56 PM IST
सार

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान को केवल चार दिनों में युद्धविराम मांगने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने इस अभियान को भारत की सैन्य शक्ति, आधुनिक तकनीक और तीनों सेनाओं के बेहतरीन तालमेल का उदाहरण बताया। नई दिल्ली में ऑपरेशन सिंदूर पर आधारित स्मारक प्रकाशन जारी किया गया। आइए, विस्तार से जानते हैं राजनाथ सिंह ने और क्या-क्या कहा...

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Rajnath Singh say Pakistan Forced to Seek a Ceasefire Just Four Days Speaks on Operation Sindoor
ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को क्या संदेश दिया? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को भारत के सैन्य इतिहास का बेहद सफल और निर्णायक अभियान बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना की ताकत, रणनीति और तीनों सेनाओं के तालमेल ने पाकिस्तान को सिर्फ चार दिनों के भीतर युद्धविराम की अपील करने पर मजबूर कर दिया। नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर पर आधारित स्मारक प्रकाशन का विमोचन किया। इस दौरान सेना के बड़े अधिकारी भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में देशभक्ति और सैन्य गौरव का माहौल देखने को मिला।
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आखिर ऑपरेशन सिंदूर को इतना खास क्यों बताया गया?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं था, बल्कि यह भारत की मजबूत इच्छाशक्ति और आधुनिक युद्ध क्षमता का उदाहरण था। उन्होंने कहा कि भारत ने पहले भी कई युद्ध और सैन्य अभियान देखे हैं, लेकिन यह अभियान कई मायनों में अलग और बेहद प्रभावशाली रहा। इस अभियान में भारतीय सेना ने तेज रणनीति, सटीक हमला और मजबूत समन्वय का प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन ने दुनिया को दिखा दिया कि भारत अब हर चुनौती का जवाब तेजी और मजबूती से देने में सक्षम है।
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स्मारक प्रकाशन में क्या खास बातें शामिल की गई हैं?
राजनाथ सिंह ने कहा कि जारी किया गया स्मारक प्रकाशन केवल सैन्य घटनाओं का रिकॉर्ड नहीं है। इसमें उन सैनिकों के संघर्ष, भावनाएं और अनुभव भी शामिल हैं, जिन्होंने कठिन हालात में देश की रक्षा की। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध सिर्फ हथियारों से नहीं जीते जाते, बल्कि नेतृत्व क्षमता, मानसिक मजबूती और सही समय पर सही फैसला लेने की ताकत सबसे ज्यादा अहम होती है। रक्षा मंत्री के मुताबिक यह पुस्तक सैनिकों के साहस और समर्पण को बेहद मानवीय तरीके से सामने लाती है और युवाओं को प्रेरणा देने का काम करेगी।
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सैनिकों के बलिदान पर क्या बोले रक्षा मंत्री?
रक्षा मंत्री ने कहा कि जब देश के जवान सीमा पर अपने प्राणों की बाजी लगाते हैं, तब देश के नागरिकों की भी जिम्मेदारी बढ़ जाती है। उन्होंने लोगों से देशहित को सबसे ऊपर रखने की अपील की। राजनाथ सिंह ने कहा कि हर नागरिक को देश की सुरक्षा और संप्रभुता के महत्व को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियान केवल सेना की ताकत नहीं दिखाते, बल्कि पूरे देश की एकता और विश्वास को भी मजबूत करते हैं। रक्षा मंत्री ने लोगों से इस स्मारक प्रकाशन से प्रेरणा लेने की बात कही।

समारोह में कौन-कौन से बड़े अधिकारी मौजूद रहे?
नई दिल्ली में हुए इस कार्यक्रम में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी समेत सशस्त्र बलों के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान ऑपरेशन सिंदूर की रणनीति, सैन्य समन्वय और तकनीकी क्षमता को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने इसे भारतीय सेनाओं के संयुक्त अभियान का मजबूत उदाहरण बताया। समारोह में मौजूद सैन्य अधिकारियों ने सैनिकों की बहादुरी और समर्पण की सराहना की।

ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को क्या संदेश दिया?
विशेषज्ञों का मानना है कि ऑपरेशन सिंदूर ने साफ कर दिया कि भारतीय सशस्त्र बल अब पारंपरिक युद्ध सीमाओं से आगे बढ़ चुके हैं। भारतीय सेना अब तेज, सटीक और बहुआयामी सैन्य अभियान चलाने में पूरी तरह सक्षम है। इस अभियान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह संदेश दिया कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की सैन्य ताकत और रणनीतिक क्षमता को नई पहचान दी है। यह अभियान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का प्रतीक माना जा रहा है।


ऑपरेशन सिंदूर से देश को क्या सीख मिली?
ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित किया कि मजबूत नेतृत्व, आधुनिक तकनीक और सैनिकों का साहस किसी भी चुनौती को कमजोर कर सकता है। इस अभियान ने भारतीय सेना की तैयारी और तेजी से फैसले लेने की क्षमता को दुनिया के सामने रखा। रक्षा मंत्री ने कहा कि देश को अपने सैनिकों पर गर्व है और सेना हर परिस्थिति में देश की रक्षा के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि यह अभियान भारत के सैन्य इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में हमेशा याद रखा जाएगा।
 
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