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सिर्फ फिल्मों की शूटिंग नहीं कई युवा दिलों को जोड़ा है आरके स्टूडियो ने, जानिए इससे जुड़ी ये बातें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 28 Aug 2018 12:11 PM IST
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बॉलीवुड के शोमैन राज कपूर का सपना यानी आरके स्टूडियो बेचा जा रहा है। इसे बेचने की जानकारी खुद ऋषि कपूर ने दी है, जिसका समर्थन उनके बड़े भाई रणधीर कपूर ने भी किया। जैसे ही आरके स्टूडियो बेचे जाने की बात सामने आई राजकपूर के पारिवारिक मित्र और फिल्म समीक्षक जयप्रकाश चौकसे ने कहा कि यह निर्णय लेना परिवार के लिए आसान नहीं रहा होगा। उन्होंने कहा कि राज कपूर के परिवार का एक-एक बच्चा स्टूडियो से गहराई से जुड़ा हुआ है। वैसे तो यह एक व्यावहारिक निर्णय है।
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70 साल का स्टूडियो हो रहा है रिटायर
चौकसे बताते हैं कि चेंबूर स्थित आर के स्टूडियो तीन तरफ से भले ही मुख्य मार्गों से जुड़ा है लेकिन समय की मांग थी कि या तो उसे उच्च तकनीक से लैस किया जाए या फिर उसके बारे में कुछ और सोचा जाए और मुझे लगता है कि कपूर परिवार के बच्चों ने जो यह निर्णय लिया है वह काफी व्यावहारिक है। उन्होंने बताया कि अब आर के स्टूडियो 70 साल का हो चुका है। इसे 1949 में खरीदा था और फिर पीछे मुड़ कर नहीं देखा। 1954 में जब श्रीकांत स्टुडियो बिक रहा था तब उसे खरीद लिया था।
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आवारा थी पहली फिल्म
बरसात फिल्म के हिट होने के बाद राजकपूर साहब ने 1949 में इसे खरीदा था और उनकी पहली फिल्म आवारा की ड्रीम शूटिंग इसी स्टूडियो में हुई थी। वे बताते हैं कि पूरी फिल्म की शूटिंग रात में होती थी। तब तक स्टूडियो में दीवारें बनी थीं लेकिन छत नहीं बनी थी। फिल्म रिलीज 1951 में हुई थी।
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मनोज कुमार ने भी की है अपनी फिल्म की शूटिंग
राजकपूर ही नहीं दूसरे प्रोड्यूसर और डायरेक्टर भी इस स्टूडियो में शूटिंग करते रहे हैं। मैंने अपनी तीन फिल्मों की शूटिंग इसी स्टूडियो में की। चौकसे बताते हैं कि सिर्फ राजकपूर के परिवार की यादें ही नहीं इस स्टूडियो से फिल्म उद्योग के कइयों की यादें जुड़ी हैं। क्या बोनी कपूर और क्या मनोज कुमार, सभी ने यहां शूटिंग की है।
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बेचना एक मुश्किल काम लेकिन व्यावहारिक
चौकसे कपूर परिवार से पिछले 50 सालों से अधिक से जुड़े हुए हैं। वह बताते हैं कि आर के स्टूडियो के बारे में अफवाह उड़ती रही है, मीडिया ने कहा कि राजकपूर के मरते ही बच्चों ने स्टूडियो की बोली लगा दी लेकिन ऐसा नहीं है। पिछली बार भी जब स्टूडियो बेचा गया था उसे राजकपूर अपनी जिंदगी में ही बेच गए थे। स्टूडियो के बीच में दीवार उठाने का काम उनके निधन के बाद शुरू हुआ था।
कई फिल्मों का गवाह है स्टूडियो
किसी भी एक सामान को बेचना बहुत ही मुश्किल काम होता है। उन्होंने कहा कि पूरे परिवार के लिए यह फैसला लेना बहुत ही कठिन कार्य रहा होगा। पूरा परिवार वहां से ही आगे बढ़ा है। चाहे राजकपूर हों या ऋषि कपूर या फिर रणधीर और राजीव कपूर सभी की वहां से कई-कई यादें जुड़ी हुईं हैं। ऋषि की मेरा नाम जोकर, रणधीर की कल आज और कल, राजकपूर की राम तेरी गंगा मैली की पूरी शूटिंग यहीं हुई है। शाहरुख की फिल्म ओम शांति ओम, हिना, रूप की रानी चोरों का राजा, प्रेम ग्रंथ सहित कई फिल्मों की यादों में रह जाएगा स्टूडियो।
जब बसाया गया बनारस
वह राम तेरी गंगा मैली की शूटिंग को याद करते हुए बताते हैं कि कैसे गंगा का पूरा सेट स्टूडियो में बनाया गया था। स्टूडियो का एक हिस्सा बनारस में तब्दील हो गया था। बनारस से सिर्फ मंदिर और घाट के शॉट लिए गए थे और बाद में स्टूडियो में सेट बनाकर मिक्स किया गया था। स्टूडियो के एक कोने पर अदालत और बंगले का सेट बना ही हुआ था, जहां लोग कभी भी आकर शूटिंग कर सकते थे।
चौकसे बातचीत के दौरान बताते हैं कि उस समय का आधुनिकतम स्टूडियो था आर के, जहां रिवॉल्विंग सेट लगाया गया कर्ज फिल्म की शूटिंग के लिए। लेकिन वह यह भी कहते हैं कि शहर के बीचों बीच बसा महबूब और रिलाएंस का स्टूडियो अध्याधुनिक तकनीक से लैस है। साथ ही पहले लोग स्टूडियो में अपने हिसाब से सेट लगाते थे और उसका खर्च ज्यादा आता था लेकिन अब तो बड़े आराम से घर, बंगला और दुकान मिल जाता है और महज 30,000 से 40000 रुपये में यह किराए पर मिल जाता है जिसके बाद स्टूडियो का चलन थोड़ा कम हुआ।
चौकसे कपूर परिवार से पिछले 50 सालों से अधिक से जुड़े हुए हैं। वह बताते हैं कि आर के स्टूडियो के बारे में अफवाह उड़ती रही है, मीडिया ने कहा कि राजकपूर के मरते ही बच्चों ने स्टूडियो की बोली लगा दी लेकिन ऐसा नहीं है। पिछली बार भी जब स्टूडियो बेचा गया था उसे राजकपूर अपनी जिंदगी में ही बेच गए थे। स्टूडियो के बीच में दीवार उठाने का काम उनके निधन के बाद शुरू हुआ था।
कई फिल्मों का गवाह है स्टूडियो
किसी भी एक सामान को बेचना बहुत ही मुश्किल काम होता है। उन्होंने कहा कि पूरे परिवार के लिए यह फैसला लेना बहुत ही कठिन कार्य रहा होगा। पूरा परिवार वहां से ही आगे बढ़ा है। चाहे राजकपूर हों या ऋषि कपूर या फिर रणधीर और राजीव कपूर सभी की वहां से कई-कई यादें जुड़ी हुईं हैं। ऋषि की मेरा नाम जोकर, रणधीर की कल आज और कल, राजकपूर की राम तेरी गंगा मैली की पूरी शूटिंग यहीं हुई है। शाहरुख की फिल्म ओम शांति ओम, हिना, रूप की रानी चोरों का राजा, प्रेम ग्रंथ सहित कई फिल्मों की यादों में रह जाएगा स्टूडियो।
जब बसाया गया बनारस
वह राम तेरी गंगा मैली की शूटिंग को याद करते हुए बताते हैं कि कैसे गंगा का पूरा सेट स्टूडियो में बनाया गया था। स्टूडियो का एक हिस्सा बनारस में तब्दील हो गया था। बनारस से सिर्फ मंदिर और घाट के शॉट लिए गए थे और बाद में स्टूडियो में सेट बनाकर मिक्स किया गया था। स्टूडियो के एक कोने पर अदालत और बंगले का सेट बना ही हुआ था, जहां लोग कभी भी आकर शूटिंग कर सकते थे।
चौकसे बातचीत के दौरान बताते हैं कि उस समय का आधुनिकतम स्टूडियो था आर के, जहां रिवॉल्विंग सेट लगाया गया कर्ज फिल्म की शूटिंग के लिए। लेकिन वह यह भी कहते हैं कि शहर के बीचों बीच बसा महबूब और रिलाएंस का स्टूडियो अध्याधुनिक तकनीक से लैस है। साथ ही पहले लोग स्टूडियो में अपने हिसाब से सेट लगाते थे और उसका खर्च ज्यादा आता था लेकिन अब तो बड़े आराम से घर, बंगला और दुकान मिल जाता है और महज 30,000 से 40000 रुपये में यह किराए पर मिल जाता है जिसके बाद स्टूडियो का चलन थोड़ा कम हुआ।
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दिवाली, होली और गणपति के लिए पॉपुलर है आर के
चौकसे याद करते हुए कहते हैं स्टूडियो की दिवाली, होली और गणपति पूरे बॉलीवुड में पॉपुलर थी। राजकपूर के निधन के बाद बच्चों ने दिवाली, होली तो बंद कर दी लेकिन गणपति आज भी धूमधाम से मनाया जाता है। अगर पूरा आर के स्टूडियो बेचा जा रहा है तो अब वहां गणपति भी नहीं बैठाए जाएंगे।
ढाई एकड़ में फैले स्टूडियो के बारे में चौकसे बताते हैं कि स्टूडियो भले ही शहर से दूर है लेकिन वह तीन तरफ से मुख्य मार्गों से जुड़ा है। दो तलों में बने स्टूडियो में अंदर आने के बाद पहले रिसेप्शन आता है फिर बाद में ऋषि, रणधीर और राजीव के ऑफिस आते हैं फिर बारांडा आता है। उसके बाद स्टूडियो शुरू होता है। अब देखना यह होगा कि तीनों भाई पूरा स्टूडियो बेच रहे हैं या फिर इसका कुछ हिस्सा।
ऋषि और रणधीर की शादी की पार्टी
बहुत कम लोगों को पता होगा कि राजकपूर ने अपने दोनों बेटों ऋषि और रणधीर कपूर की शादी की पार्टी भी इसी स्टूडियो में दी थी। स्टूडियो को दुल्हन की तरह सजाया गया था।
चौकसे याद करते हुए कहते हैं स्टूडियो की दिवाली, होली और गणपति पूरे बॉलीवुड में पॉपुलर थी। राजकपूर के निधन के बाद बच्चों ने दिवाली, होली तो बंद कर दी लेकिन गणपति आज भी धूमधाम से मनाया जाता है। अगर पूरा आर के स्टूडियो बेचा जा रहा है तो अब वहां गणपति भी नहीं बैठाए जाएंगे।
ढाई एकड़ में फैले स्टूडियो के बारे में चौकसे बताते हैं कि स्टूडियो भले ही शहर से दूर है लेकिन वह तीन तरफ से मुख्य मार्गों से जुड़ा है। दो तलों में बने स्टूडियो में अंदर आने के बाद पहले रिसेप्शन आता है फिर बाद में ऋषि, रणधीर और राजीव के ऑफिस आते हैं फिर बारांडा आता है। उसके बाद स्टूडियो शुरू होता है। अब देखना यह होगा कि तीनों भाई पूरा स्टूडियो बेच रहे हैं या फिर इसका कुछ हिस्सा।
ऋषि और रणधीर की शादी की पार्टी
बहुत कम लोगों को पता होगा कि राजकपूर ने अपने दोनों बेटों ऋषि और रणधीर कपूर की शादी की पार्टी भी इसी स्टूडियो में दी थी। स्टूडियो को दुल्हन की तरह सजाया गया था।