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Rajasthan: सचिन के लिए नई पार्टी की राह आसान नहीं, चुनाव आयोग की इन शर्तों से कैसे पार उतरेंगे पायलट

Thu, 08 Jun 2023 04:50 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Thu, 08 Jun 2023 04:50 PM IST
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सार
Rajasthan: प्रदेश की सियासत के जानकारों का कहना है कि राजस्थान में आमतौर पर मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही होता है। अभी तक अन्य कोई तीसरा दल सफल नहीं हुआ है। 2018 में हनुमान बेनीवाल ने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी बनाई थी। वे नागौर से सांसद हैं। जबकि उनकी पार्टी के तीन विधायक हैं...
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Rajasthan: way to form a new party is not easy for Sachin pilot
Rajasthan: Sachin Pilot - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार

राजस्थान कांग्रेस में एक बार फिर से हलचल बढ़ गई है। पार्टी आलाकमान ने हाल ही में राज्य के दोनों दिग्गज नेताओं, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच मतभेद सुलझाने का दावा करते हुए उनके आगामी चुनाव में एकजुट होकर लड़ने का एलान किया था। इसी बीच प्रदेश के सियासी गलियारों में सचिन की नई पार्टी बनाने की अटकलें तेज हो चली हैं। इन्हीं ने अटकलों ने कांग्रेस की टेंशन भी बढ़ा भी दी है। जबकि सचिन के समर्थकों का कहना है कि पायलट की राजनीति की नई राह आसान नजर नहीं आ रही है। क्योंकि चुनाव में महज पांच माह का समय बचा है। ऐसे में नई पार्टी बनाना और संगठन को खड़ा करना मुश्किल नजर आ रहा है। ऐसे में पायलट यह सब कुछ कैसे करेंगे यह भी देखने लायक होगा।

यह वीडियो देखें: चुनाव से पहले सीएम गहलोत का बड़ा दावा- 'पायलट से अब विवाद नहीं होगा'

पायलट समर्थक बोले: फिलहाल तो संभावना कम लग रही है

प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 11 जून को सचिन पायलट अपने पिता राजेश पायलट की पुण्यतिथि के अवसर पर दौसा में नई राजनीतिक पार्टी का एलान कर सकते हैं। दौसा में ही एक सड़क दुर्घटना में राजेश पायलट का देहांत हुआ था। वहीं उनकी एक आदमकद प्रतिमा भी लगी हुई है। सचिन पायलट हर वर्ष 11 जून को दौसा श्रद्धांजलि अर्पित करने जाते हैं। अमर उजाला से चर्चा में पायलट समर्थकों का कहना है कि फिलहाल ऐसी कोई संभावना नजर नहीं आ रही है। एन वक्त पर कुछ घोषणा हो, यह कहा नहीं जा सकता। कांग्रेस नेता राहुल गांधी का 19 जून को राहुल गांधी का जन्मदिन है और वे 20 जून तक लंदन में हैं। सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी भी अमेरिका में हैं। ऐसे में संभावना कम ही है कि तीनों के विदेश में होने के दौरान पायलट का इतना बड़ा व महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम उठाएंगे।

नई पार्टी की राह कठिन होगी

प्रदेश की सियासत के जानकारों का कहना है कि राजस्थान में आमतौर पर मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही होता है। अभी तक अन्य कोई तीसरा दल सफल नहीं हुआ है। 2018 में हनुमान बेनीवाल ने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी बनाई थी। वे नागौर से सांसद हैं। जबकि उनकी पार्टी के तीन विधायक हैं। अगर सचिन पायलट नई पार्टी बनाने का एलान करते हैं, तो उन्हें कांग्रेस छोड़नी होगी। हालांकि इसकी संभावना अभी कम ही नजर आ रही है। क्योंकि अगर वे नई पार्टी का गठन करते हैं, तो उनके दल पर एक जाति और क्षेत्र विशेष की पार्टी हो जाने का खतरा चस्पा हो जाएगा। अगर फिर भी वे ऐसा करते हैं, तो फिर चुनावों तक (नवंबर-दिसंबर) उनके पास एक नई पार्टी के लिए आवेदन और रजिस्ट्रेशन करवाने का दबाव होगा। चुनाव आयोग भी दल को मान्यता देने में कम से कम तीन माह का समय तो लेगा ही। ऐसे में पायलट के पास पार्टी के संगठन को खड़ा करना, कार्यकारिणी बनाना, प्रचार-प्रसार करने के लिए बहुत समय बचेगा। नए दल के लिए बड़े पैमाने पर आर्थिक संसाधन जुटाना, समय-ऊर्जा खर्च करना भी पायलट के लिए चुनौती होगी। यहीं नहीं कांग्रेस के बैनर तले मिलने वाले वोटों को खोना भी बना रहेगा। ऐसे में पायलट के लिए नई पार्टी की राह कठिन होगी।

नई पार्टी के लिए सचिन को करनी होंगी ये शर्तें पूरी

किसी भी नई राजनीतिक पार्टी के लिए चुनाव आयोग के पास आवेदन करने के लिए किसी भी संगठन के पास 100 सदस्यों का होना जरूरी है। इसके अलावा आवेदनकर्ता को नियमानुसार एक शपथ पत्र भी देना पड़ता है। लेकिन आवेदनकर्ता जब तक नई पार्टी का आवेदन नहीं कर सकता, जब तक वह पुरानी पार्टी से इस्तीफा नहीं दे देता। या उक्त व्यक्ति को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से बर्खास्त नहीं किया जाता। नई पार्टी के आवेदन देने के बाद राजनीतिक दल के तौर पर राज्य निर्वाचन आयोग में पंजीयन में होने कम से तीन माह और अधिकतम आठ माह का समय लग जाता है। लेकिन प्रदेश में अब विधानसभा चुनाव में चुनाव में ही पांच माह का ही वक्त बचा है। किसी प्रदेश में चुनाव आचार संहिता लग जाने के बाद नई पार्टी का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जाता है। राजस्थान में चुनाव नवंबर-दिसंबर में प्रस्तावित हैं। पिछले वर्ष 6 अक्तूबर-2018 को आचार संहिता लगी थी।

यह वीडियो देखें: Rajasthan Congress Crisis: पायलट समर्थक कांग्रेस विधायक ने सीएम गहलोत पर बोला बड़ा हमला

मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग से रिटायर्ड अधिकारी एके सिंह कहते हैं कि किसी भी प्रदेश में अगर किसी व्यक्ति को राजनीतिक पार्टी बनाना है तो उसे केंद्रीय चुनाव आयोग में आवेदन करना पड़ता है। यहीं से उन्हें विधिवत मंजूरी मिलती है। आयोग में तय शर्तें पूरी करने के बाद अगर आयोग संगठन को सही मानता है, तो वह व्यक्ति को दल के गठन की मंजूरी प्रदान करता है। हालांकि इस प्रक्रिया में तीन से चार माह का वक्त लगता है। कभी इससे ज्यादा वक्त भी लग सकता है। नए दल के आवेदन करने के लिए आवेदनकर्ता के पास न्यूनतम 100 लोग होने आवश्यक हैं। इन सभी के भी संबंधित दस्तावेज जमा किए जाते हैं।  

सिंह बताते हैं कि आयोग अपनी तरफ से नई पार्टी को मान्यता प्राप्त समाचार पत्रों में विज्ञापन भी जारी करता है। इसमें बताया जाता है कि किसी को संबंधित संगठन के राजनीतिक पार्टी बनने, नामकरण या किसी अन्य बिन्दु पर कोई आपत्ति हो तो वो तय समय सीमा में दर्ज करवा दे। सभी तरह की आपत्तियों का निस्तारण होने के बाद किसी संगठन को आयोग की ओर से राजनीतिक पार्टी की मान्यता दी जाती है। चुनाव आयोग तो संगठन को पार्टी की मान्यता दे देता है है लेकिन पार्टी को राष्ट्रीय स्तर दर्जा मिलेगा या प्रदेश स्तर का यह उस दल के चुनाव में प्रदर्शन पर तय किया जाता है।

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