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Rajasthan: सप्त शक्ति कमांड ने संवर्धित कल्याण सेमिनार का किया आयोजन, 5 हजार कर्मियों ने सीखे ये मंत्र
Sat, 25 Jan 2025 08:00 PM IST
शुभम कुमार
डिजिटल ब्यूरो
डिजिटल ब्यूरो
Published by: शुभम कुमार
Updated Sat, 25 Jan 2025 08:00 PM IST
सार
जयपुर में हुए इन दो दिवसीय संवर्धित कल्याण सहायता सेमिनार में मनोवैज्ञानिक कल्याण के लिए एक समग्र दृष्टिकोण पर जोर दिया गया। इसमें मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता, आध्यात्मिक उपचार और प्रोफेशनल मार्गदर्शन को शामिल किया गया।
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संवर्धित कल्याण सेमिनार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित मिलिट्री स्टेशन में हाल ही में दो दिवसीय संवर्धित कल्याण सहायता सेमिनार आयोजित किया गया। इसमें शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक कल्याण को बढ़ाने समेत विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। ये सभी विषय सैनिकों और उनके परिवारों के लिए डिज़ाइन किए गए थे, ताकि उनके ज्ञान और समग्र कल्याण को बढ़ाने के लिए मूल्यवान जानकारी प्राप्त की जा सके। इस सेमिनार में लगभग 5000 सेवारत कर्मियों और परिवारों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन शामिल हुए। इस दौरान दक्षिण पश्चिमी कमान के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह और चेतक कोर के कोर कमांडर, लेफ्टिनेंट जनरल नगेंद्र सिंह सेमिनार में विशेष तौर पर उपस्थित थे।
मनोवैज्ञानिक कल्याण के लिए समग्र दृष्टिकोण पर जोर
जयपुर में हुए इन दो दिवसीय संवर्धित कल्याण सहायता सेमिनार में मनोवैज्ञानिक कल्याण के लिए एक समग्र दृष्टिकोण पर जोर दिया गया। इसमें मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता, आध्यात्मिक उपचार और प्रोफेशनल मार्गदर्शन को शामिल किया गया। इसमें आध्यात्मिक संरेखण मुख्य विषय रहा, जिसमें व्यक्तिगत विकास में सहायता करने तथा प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने में दृढ़ता को बढ़ावा देने के लिए सचेतनता, ध्यान और आंतरिक शक्ति निर्माण पर सत्र आयोजित किए गए।
इन प्रख्यात वक्ताओं ने लिया हिस्सा
सेमिनार में वरिष्ठ और सेवानिवृत्त अधिकारियों और डोमेन विशेषज्ञों सहित प्रख्यात वक्ताओं ने भाग हिस्सा लिया। सैन्य वक्ताओं में लेफ्टिनेंट जनरल जेएस नैन (सेवानिवृत्त), मेजर जनरल वीडी डोगरा (सेवानिवृत्त), मेजर जनरल इंद्रजीत सिंह (सेवानिवृत्त), मेजर जनरल वी हरिहरन, एडीजी (डी एंड वी) और लेफ्टिनेंट कर्नल अंकुर सभरवाल शामिल थे। उनके योगदान ने संगठनात्मक माहौल और व्यक्तिगत कल्याण में समग्र सुधार के लिए अनुकूल वातावरण, उच्च मनोबल, प्रेरणा और नवीन दृष्टिकोण बनाए रखने के बारे में बहुमूल्य अंतर्दृष्टि के साथ चर्चा को समृद्ध किया। प्रख्यात वक्ताओं की सूची में आध्यात्मिक गुरु गौरांग दास, प्रेरक वक्ता योगेश छाबड़िया, डीआईपीआर और आईआईटी जैसे संस्थानों के प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. कमलेश सिंह, डॉ. निधि माहेश्वरी, डॉ. राजेंद्र सोखी और डॉ. कल्पना शामिल थे।
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डोमेन विशेषज्ञों ने आध्यात्मिकता के माध्यम से खुशी प्राप्त करने, व्यक्तिगत चुनौतियों के बावजूद सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने और वैवाहिक सद्भाव में सुधार सहित विभिन्न विषयों पर बात की। विशेष शिक्षिका श्रीमती धारिणी सिंह ने विशेष जरूरतों वाले बच्चों के पालन-पोषण पर बहुमूल्य अंतर्दृष्टि साझा की। दक्षिण पश्चिमी कमान के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह ने समापन वक्तव्य दिया।
उन्होंने वक्ताओं के बहुमूल्य योगदान की सराहना की और "सैनिकों और परिवारों के समग्र कल्याण" पर श्रोताओं को जागरूक करने में उनकी भूमिका के लिए आभार व्यक्त किया, जो उनके महत्वपूर्ण कमांड स्तंभों में से एक है। उन्होंने अपने पर्सनल और प्रोफ़ेशनल अनुभव के आधार पर अपने विचार साझा किए, जिसे उन्होंने 'प्रिझम ऑफ़ मिलिट्री लाइफ ' कहा, जो मुख्य रूप से इस बात पर आधारित है कि, कैसे पहले हम एक अच्छा इंसान बनें , फिर एक अच्छा सैनिक बनें और फिर अपने रैंक और अपॉइंटमेंट के हिसाब से अपने कर्त्तव्य का पालन करें।
दरअसल, यह सेमिनार सप्त शक्ति कमान द्वारा अपने सैनिकों और उनके परिवारों के बीच कल्याण की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों का हिस्सा है। सेना की जीवनशैली और नैतिकता में स्वास्थ्य और भावनात्मक स्थिरता को एकीकृत करते हुए, यह पहल एक एकीकृत और परिचालन रूप से प्रभावी बल बनाने का प्रयास करती है। इससे सेना में मनोबल और प्रेरणा तथा राष्ट्रीय सुरक्षा की दिशा में बढ़ोतरी होगी। इससे न केवल सैनिकों का मनोबल और प्रेरणा बढ़ेगी, बल्कि कारगर सैनिक संरक्षण भी संभव होगा।
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मनोवैज्ञानिक कल्याण के लिए समग्र दृष्टिकोण पर जोर
जयपुर में हुए इन दो दिवसीय संवर्धित कल्याण सहायता सेमिनार में मनोवैज्ञानिक कल्याण के लिए एक समग्र दृष्टिकोण पर जोर दिया गया। इसमें मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता, आध्यात्मिक उपचार और प्रोफेशनल मार्गदर्शन को शामिल किया गया। इसमें आध्यात्मिक संरेखण मुख्य विषय रहा, जिसमें व्यक्तिगत विकास में सहायता करने तथा प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने में दृढ़ता को बढ़ावा देने के लिए सचेतनता, ध्यान और आंतरिक शक्ति निर्माण पर सत्र आयोजित किए गए।
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इन प्रख्यात वक्ताओं ने लिया हिस्सा
सेमिनार में वरिष्ठ और सेवानिवृत्त अधिकारियों और डोमेन विशेषज्ञों सहित प्रख्यात वक्ताओं ने भाग हिस्सा लिया। सैन्य वक्ताओं में लेफ्टिनेंट जनरल जेएस नैन (सेवानिवृत्त), मेजर जनरल वीडी डोगरा (सेवानिवृत्त), मेजर जनरल इंद्रजीत सिंह (सेवानिवृत्त), मेजर जनरल वी हरिहरन, एडीजी (डी एंड वी) और लेफ्टिनेंट कर्नल अंकुर सभरवाल शामिल थे। उनके योगदान ने संगठनात्मक माहौल और व्यक्तिगत कल्याण में समग्र सुधार के लिए अनुकूल वातावरण, उच्च मनोबल, प्रेरणा और नवीन दृष्टिकोण बनाए रखने के बारे में बहुमूल्य अंतर्दृष्टि के साथ चर्चा को समृद्ध किया। प्रख्यात वक्ताओं की सूची में आध्यात्मिक गुरु गौरांग दास, प्रेरक वक्ता योगेश छाबड़िया, डीआईपीआर और आईआईटी जैसे संस्थानों के प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. कमलेश सिंह, डॉ. निधि माहेश्वरी, डॉ. राजेंद्र सोखी और डॉ. कल्पना शामिल थे।
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डोमेन विशेषज्ञों ने आध्यात्मिकता के माध्यम से खुशी प्राप्त करने, व्यक्तिगत चुनौतियों के बावजूद सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने और वैवाहिक सद्भाव में सुधार सहित विभिन्न विषयों पर बात की। विशेष शिक्षिका श्रीमती धारिणी सिंह ने विशेष जरूरतों वाले बच्चों के पालन-पोषण पर बहुमूल्य अंतर्दृष्टि साझा की। दक्षिण पश्चिमी कमान के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह ने समापन वक्तव्य दिया।
उन्होंने वक्ताओं के बहुमूल्य योगदान की सराहना की और "सैनिकों और परिवारों के समग्र कल्याण" पर श्रोताओं को जागरूक करने में उनकी भूमिका के लिए आभार व्यक्त किया, जो उनके महत्वपूर्ण कमांड स्तंभों में से एक है। उन्होंने अपने पर्सनल और प्रोफ़ेशनल अनुभव के आधार पर अपने विचार साझा किए, जिसे उन्होंने 'प्रिझम ऑफ़ मिलिट्री लाइफ ' कहा, जो मुख्य रूप से इस बात पर आधारित है कि, कैसे पहले हम एक अच्छा इंसान बनें , फिर एक अच्छा सैनिक बनें और फिर अपने रैंक और अपॉइंटमेंट के हिसाब से अपने कर्त्तव्य का पालन करें।
दरअसल, यह सेमिनार सप्त शक्ति कमान द्वारा अपने सैनिकों और उनके परिवारों के बीच कल्याण की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों का हिस्सा है। सेना की जीवनशैली और नैतिकता में स्वास्थ्य और भावनात्मक स्थिरता को एकीकृत करते हुए, यह पहल एक एकीकृत और परिचालन रूप से प्रभावी बल बनाने का प्रयास करती है। इससे सेना में मनोबल और प्रेरणा तथा राष्ट्रीय सुरक्षा की दिशा में बढ़ोतरी होगी। इससे न केवल सैनिकों का मनोबल और प्रेरणा बढ़ेगी, बल्कि कारगर सैनिक संरक्षण भी संभव होगा।