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अलवर में इस 'ट्रेन' में सवार होकर बच्चे कर रहे हैं भविष्य की तैयारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर
Updated Wed, 11 Apr 2018 05:12 PM IST
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School Alwar
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अपने नाम के अर्थ को सही साबित करते हुए अलवर के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल ने अपनी कक्षाओं का रेलवे स्टेशन की तरह रंग रोगन किया है। इस ट्रेन का नाम है एजुकेशन एक्सप्रेस और क्लासरूम को पैसेंजर डिब्बों की तरह सजाया गया है।
स्कूल प्रिंसिपल पुरुषोत्तम गुप्ता का कहना है कि उन्होंने स्कूल को ट्रेन का रूप दिया है ताकि स्कूल में बच्चों की संख्या को बढ़ाया जा सके। क्योंकि सरकारी स्कूल में सुविधाओं की कमी के चलते विद्यार्थी निजी स्कूलों का रूख करते हैं।
प्रिंसिपल का कमरा इंजन की तरह दिखता है और बरामदे को प्लेटफॉर्म का रूप दिया गया है जहां बच्चें खेल सकते हैं।
प्रिंसिपल गुप्ता ने बताया कि, विद्यार्थियों को ट्रेन में सफर करने का विचार बहुत रोमांचित करता है। सरकारी स्कूल की बिल्डिंग को आमतौर पर बोरिंग माना जाता है, जिसकी वजह से बच्चों में उत्साह कम हो जाता है। इसी वजह से हमने सोचा कि अपनी स्कूल को बाहर से ट्रेन की तरह रंगबिरंगा बनाए।
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यह आइडिया जिले के एक जूनियर इंजीनियर राजेश लवानिया का है। लवानिया ने बताया, हम बच्चों को उनके स्कूल के बारे कुछ खास देना चाहते थे जो किसी के पास नहीं हो, जिसके बारे में वो दूसरों को शान से बता सकें। अप्रैल के आखिर तक हम दो क्लासरूम को जयपुर-दिल्ली डबल डेकर ट्रेन और अन्य दो क्लास को अजमेर-दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस की तरह रंग देंगे।
उन्होंने कहा कि, यह स्कूल गांववालों को बीच आकर्षण का केंद्र बन गया है, जो यहां अक्सर फोटो खिंचाने आते हैं।
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स्कूल प्रिंसिपल पुरुषोत्तम गुप्ता का कहना है कि उन्होंने स्कूल को ट्रेन का रूप दिया है ताकि स्कूल में बच्चों की संख्या को बढ़ाया जा सके। क्योंकि सरकारी स्कूल में सुविधाओं की कमी के चलते विद्यार्थी निजी स्कूलों का रूख करते हैं।
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प्रिंसिपल का कमरा इंजन की तरह दिखता है और बरामदे को प्लेटफॉर्म का रूप दिया गया है जहां बच्चें खेल सकते हैं।
प्रिंसिपल गुप्ता ने बताया कि, विद्यार्थियों को ट्रेन में सफर करने का विचार बहुत रोमांचित करता है। सरकारी स्कूल की बिल्डिंग को आमतौर पर बोरिंग माना जाता है, जिसकी वजह से बच्चों में उत्साह कम हो जाता है। इसी वजह से हमने सोचा कि अपनी स्कूल को बाहर से ट्रेन की तरह रंगबिरंगा बनाए।
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यह आइडिया जिले के एक जूनियर इंजीनियर राजेश लवानिया का है। लवानिया ने बताया, हम बच्चों को उनके स्कूल के बारे कुछ खास देना चाहते थे जो किसी के पास नहीं हो, जिसके बारे में वो दूसरों को शान से बता सकें। अप्रैल के आखिर तक हम दो क्लासरूम को जयपुर-दिल्ली डबल डेकर ट्रेन और अन्य दो क्लास को अजमेर-दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस की तरह रंग देंगे।
उन्होंने कहा कि, यह स्कूल गांववालों को बीच आकर्षण का केंद्र बन गया है, जो यहां अक्सर फोटो खिंचाने आते हैं।