सचिन पायलट को अपने सम्मान के फार्मूले का इंतजार, प्रियंका-राहुल से की मुलाकात
- सचिन पायलट की सोनिया गांधी से मिलने की तैयारी
- मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की निगाह दिल्ली पर टिकी
- प्रियंका गांधी वाड्रा की सचिन से भेंट ने बनाया रोड मैप
- टीम पायलट को अभी 14 अगस्त तक का इंतजार
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कांग्रेस पार्टी के रणनीतिकारों ने राजस्थान विधानसभा सत्र आरंभ होने से चार दिन पहले बड़ी कामयाबी पाई है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने पिछले दिनों पार्टी के बागी नेता सचिन पायलट से भेंट की। इस मुलाकात के साथ ही सचिन पायलट ने कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से मिलने का समय मांगा। राहुल से एक भेंट के बाद बातचीत का सिलसिला चल निकला है।
सूचना यह भी है कि राहुल गांधी सचिन पायलट का साथ दे रहे पार्टी के विधायकों से भी मिलना चाहते हैं। कांग्रेस के रणनीतिकारों की मानें तो सचिन पायलट के लिए सम्मानजनक रोडमैप बनने के बाद राजस्थान में सबकुछ ठीक हो जाएगा। हालांकि सचिन पायलट खेमे के सूत्रों का कहना है कि अभी इतनी जल्दबाजी ठीक नहीं है।
सभी विधायकों से मिलना चाहते हैं राहुल गांधी
राहुल गांधी से सचिन पायलट ने मिलने के लिए समय मांगा और इसके बाद उनकी सोमवार को 12.30 बजे भेंट हो गई। राहुल गांधी से मिलने के बाद सचिन पायलट कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी मिलेंगे। समझा जा रहा है कि पायलट की यह भेंट सोनिया गांधी की कांग्रेस के नेताओं से चर्चा के बाद कभी भी हो सकती है।
राहुल गांधी चाहते हैं कि सचिन पायलट के साथ राजस्थान सरकार का साथ छोड़ने वाले सभी कांग्रेस के विधायक भी आएं। प्रियंका से पायलट की भेंट के बाद सचिन पायलट की कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं से बातचीत हो चुकी है। नेताओं ने सचिन को कांग्रेस में लौटकर पार्टी को मजबूत बनाने के लिए कहा है।
ऐसा माना जा रहा है कि सोनिया गांधी से भेंट के बाद राजस्थान सरकार के ऊपर मंडरा रहे संकट के बादल छट जाएंगे। इससे पहले कांग्रेस पार्टी को सचिन पायलट को मुख्य धारा में लाने के लिए सम्मान जनक रोड-मैप देना होगा। इन सभी प्रयासों में कांग्रेस के कई नेताओं की भूमिका अहम है।
पायलट खेमा : इतनी जल्दबाजी ठीक नहीं
अजमेर के कांग्रेसी नेता का कहना है कि सचिन पायलट को लेकर सारा भ्रम मीडिया ने फैलाया है। मीडिया फिर भ्रम फैला रहा है। उसे सचिन पायलट को लेकर कोई जल्दबाजी भरा मीडिया ट्रायल नहीं करना चाहिए। सूत्र का कहना है कि न केवल सचिन पायलट, साथ में आए सभी विधायक भी कांग्रेस पार्टी में ही हैं। किसी ने कांग्रेस नहीं छोड़ी है।
वे सभी राजस्थान में अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाने का संकल्प लेकर दिल्ली, एनसीआर क्षेत्र में आए हैं। सूत्र का कहना है कि हमारा मकसद अभी पूरा नहीं हुआ है। वैसे भी हमारे नेता सचिन पायलट के साथ धोखा हुआ है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पायलट के साथ हुए बर्ताव को गंभीरता से लेना चाहिए।
अशोक गहलोत की निगाह दिल्ली के घटनाक्रम पर
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सामने तीन बड़ी चुनौतियां हैं। पहली चुनौती राजस्थान में 14 अगस्त से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में विश्वास मत को बनाए रखने की है। दूसरी चुनौती उनके खुद के आत्म सम्मान को बचाने की खड़ी हो रही है।
अशोक गहलोत के सामने एक तीसरी चुनौती भी है। वह राजस्थान का मुख्यमंत्री बने रहना चाहते हैं। टीम गहलोत के 42 साल पुराने दोस्त का कहना है कि पूरे राजनीतिक जीवन में वह इस समय सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं।
सूत्र का कहना है कि मुख्यमंत्री गहलोत की निगाह दिल्ली, एनसीआर क्षेत्र के घटनाक्रम पर टिकी है। हालांकि अशोक गहलोत को भरोसा है कि उनकी सरकार को फिलहाल कोई खतरा नहीं है।
भाजपा ने अपनी ताकत टटोली!
कांग्रेस पार्टी में एक 'नारद' किस्म के राजनीतिज्ञ हैं। इनका मानना है कि सचिन पायलट को भाजपा ने केवल अंगुली पकड़ाई, हाथ मिलाने का अवसर नहीं दिया। बताते हैं सचिन पायलट को अंगुली का सहारा देने के बाद भाजपा ने राजस्थान में अपनी ताकत टटोली है।
राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे करीब पौने दो साल का कार्यकाल पूरा कर चुकी सरकार को अपदस्थ करने में बहुत भलाई नहीं समझ रही हैं। वसुंधरा राजे ने पिछले दिनों भाजपा के केंद्रीय नेताओं से भेंट की।
बताते हैं भाजपा का एक धड़ा राजस्थान सरकार को गिराने का ठीकरा पार्टी के मत्थे फूटने के पक्ष में नहीं है। इस धड़े को लग रहा है कि स्विंग स्टेट होने के कारण वैसे 2023 में सत्ता भाजपा के पास आनी है। इसलिए जल्दबाजी दिखाने से क्या फायदा? बताते हैं इसके लिए पार्टी के नेता मध्य प्रदेश, कर्नाटक में पैदा हुई व्यावहारिक समस्याओं को गिना रहे हैं।