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Indian Railways: रेलवे ने बुजुर्गों के टिकट पर छूट को खत्म कर की 1500 करोड़ रुपये की कमाई, आरटीआई से हुआ खुलासा

Mon, 16 May 2022 10:19 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 16 May 2022 10:19 PM IST
सार

रेलवे ने कहा कि 20 मार्च 2020 से 31 मार्च 2022 के बीच भारतीय रेलवे ने ट्रेनों में सफर करने वाले 7.31 करोड़ बुजुर्ग यात्रियों को टिकट पर कोई छूट मुहैया नहीं कराई।

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Railways earns additional Rs 1500 cr from senior citizens by suspending ticket concession reveals RTI
कोरोना के बहाने बुजुर्गों को मिलने वाली छूट खत्म। - फोटो : अमर उजाला/सोनू कुमार

विस्तार

भारतीय रेलवे ने कोरोना महामारी के बाद से टिकट पर बुजुर्गों को मिलने वाली छूट को खत्म कर के जबरदस्त फायदा उठाया है। एक आरटीआई के जरिए खुलासा हुआ है कि रेलवे ने मार्च 2020 के बाद से दो साल में करीब 1500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व हासिल किया। 
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यह आरटीआई मध्य प्रदेश के चंद्रशेखर गौड़ की तरफ से लगाई गई थी। इसके जवाब में रेलवे ने कहा कि 20 मार्च 2020 से 31 मार्च 2022 के बीच भारतीय रेलवे ने ट्रेनों में सफर करने वाले 7.31 करोड़ बुजुर्ग यात्रियों को टिकट पर कोई छूट मुहैया नहीं कराई। इनमें साठ साल से ऊपर के 4 करोड़ 46 लाख पुरुष और 58 साल से ऊपर की 2 करोड़ 84 लाख महिलाएं शामिल रहीं। इसके अलावा 8310 बुजुर्ग ट्रांसजेंडर्स को भी यह सुविधा नहीं दी गई। 
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आरटीआई के जवाब में रेलवे ने बताया कि इस दौरान बुजुर्ग यात्रियों के टिकट से 3 हजार 464 करोड़ रुपये की कमाई की गई, इनमें छूट न देने से हुई 1500 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई भी शामिल है। जहां बुजुर्ग पुरुष यात्रियों के टिकट से 2 हजार 82 करोड़ रुपये की कमाई हुई, वहीं बुजुर्ग महिला यात्रियों के टिकट के जरिए 1381 करोड़ रुपये की कमाई हुई। बुजुर्ग ट्रांसजेंडरों के टिकट से 45 लाख 58 हजार रुपये की कमाई की गई।  
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गौरतलब है कि भारतीय रेलवे के नियमों के मुताबिक, बुजुर्ग महिला यात्री अपने टिकट पर 50 फीसदी तक छूट पा सकती हैं, जबकि बुजुर्ग पुरुष और ट्रांसजेंडर यात्रियों के लिए यह छूट 40 फीसदी है। बुजुर्ग के लिए यह सुविधा सभी क्लास के डिब्बों में है। जहां महिलाओं के लिए बुजुर्ग यात्री छूट का फायदा उठाने की न्यूनतम उम्र 58 वर्ष है, वहीं पुरुषों के लिए यह 60 वर्ष रखी गई है। 

रेलवे की तरफ से फिर से छूट दिया जाना मुश्किल
देश के कोरोनावायरस महामारी की चपेट में आने के बाद मार्च 2020 से जिन रियायतों को रोक दिया गया था, वे आज भी निलंबित हैं। वरिष्ठ अधिकारियों ने संकेत दिया है कि इन छूटों को बरकरार नहीं रखा जा सकता है। वर्ष 2020 में और 2021 में कुछ समय तक ट्रेन सेवाएं निलंबित रहीं, लेकिन अब सेवाओं के सामान्य होते ही रियायतों की मांग उठने लगी है।

पहले ही वैकल्पिक बना दी गई थीं बुजुर्गों के लिए रियायतें
पिछले दो दशकों में रेलवे की रियायतें बहुत चर्चा का विषय रही हैं, जिसमें कई समितियों ने उन्हें वापस लेने की सिफारिश की है। इसका नतीजा यह हुआ कि जुलाई 2016 में रेलवे ने बुजुर्गों के लिए रियायत को वैकल्पिक बना दिया। विभिन्न प्रकार के यात्रियों को दी जाने वाली लगभग 53 प्रकार की रियायतों के कारण रेलवे पर हर साल लगभग 2,000 करोड़ रुपये का भारी बोझ पड़ता है।

वरिष्ठ नागरिक रियायत रेलवे द्वारा दी गई कुल छूट का लगभग 80 प्रतिशत है। इससे पहले रेलवे ने लोगों को अपने वरिष्ठ नागरिक रियायतों को छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करने की कोशिश की थी, लेकिन यह सफल नहीं हुआ।


दरअसल, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की 2019 की एक रिपोर्ट के अनुसार, वरिष्ठ नागरिक यात्रियों की ‘गिव इट अप’ योजना की प्रतिक्रिया बहुत उत्साहजनक नहीं थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल 4.41 करोड़ वरिष्ठ नागरिक यात्रियों में से 7.53 लाख (1.7 फीसदी) ने 50 फीसदी रियायत छोड़ने का विकल्प चुना और 10.9 लाख (2.47 फीसदी) ने 100 फीसदी रियायत छोड़ दी।
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