रेलवे ट्रैक पर पैदल चलकर जान पाए कि कैसे हमारे लोग संभालते हैं मोर्चा : रेलवे बोर्ड चेयरमैन
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रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्विनी लोहानी अपने बिंदास अंदाज के लिए जाने जाते हैं। अच्छे प्रबंधक और कुशल प्रशासक लोहानी की सोच ने भारतीय रेल को भी एक नई दिशा दी है। रेलवे बोर्ड का चेयरमैन बनने के बाद से वे लगातार सक्रिय हैं। पिछले साल भी सर्दी शुरू होने के समय वे रेलवे ट्रैक पर दो-ढाई किमी पैदल चले थे और इस बार भी 4-5 किमी तक पैदल चलकर ग्राऊंड जीरो से रेल की पटरी को जानने की कोशिश की है।
अमर उजाला से खास बातचीत में लोहानी ने कहा कि सर्दी के मौसम में हमारा ट्रैकमैन (लाइन मैन) कड़ी चुनौती से गुजरता है। वह पटरी पर चलकर न केवल उसकी सुरक्षा को देखता है, बल्कि हजारों-लाखों रेल यात्रियों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है।
लोहानी ने बताया कि इसे उन्होंने महसूस किया है, इसलिए वे रेल की पटरी और उसकी सुरक्षा में लगे लोगों के काम और डयूटी के दौरान उनके सामने आने वाली चुनौतियों को निकट से जानने-समझने के लिए खुद पटरी पर चलने का निर्णय लिया।
बादली स्टेशन से चले, देखे हालात
दिल्ली में बादली स्टेशन के पास से रेलवे बोर्ड के चेयरमैन 4-5 किमी गए। लाइनमैन के कठिन हालात को देखा। उनके जूते, उनकी वर्दी, उन्हें मिले उपकरण, उसके उपयोग और नये उपकरणों या आवश्यकताओं की जरूरत को जाना, समझा।
अश्विनी लोहानी का कहना है कि जब आप अपने विभाग के जमीन पर काम करने वाले लोगों के साथ होते हैं तो न केवल उनका हौसला बढ़ता है, बल्कि वास्तविकता का सही अंदाजा भी लगता है। उनकी वास्तविक जरूरतों, उनकी चुनौतियों का भी एहसास होता है।