फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Rahul gandhi meets Former soldiers

पूर्व सैनिकों से मिलकर राहुल गांधी बोले- OROP पर झूठ बोल रहे हैं मोदी

Fri, 04 Nov 2016 05:49 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 04 Nov 2016 05:49 PM IST
विज्ञापन
Rahul gandhi meets Former soldiers
- फोटो : अमर उजाला

OROP पर छिड़ा राजनीतिक घमासान जारी है। शुक्रवार को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे पूर्व सैनिकों से मिले। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने रामकिशन के परिवार को पुलिस से पिटवाने के लिए पीएम मोदी को उनसे माफी मांगने के लिए भी कहा है।

विज्ञापन


राहुल ने कहा कि रामकिशन के परिवार को उनके सामने पीटा गया। राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर झूठ बोलने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार OROP का झूंठा ढिंढोरा पीट रही है। उन्होंने कहा, "जिन सैनिकों ने देश के लिए जान दी सरकार को उनकी इज्जत करनी चाहिए। पूर्व सैनिकों को पैसा नहीं दिया जा रहा है।"
विज्ञापन

क्या है ओआरओपी 

Rahul gandhi meets Former soldiers

ओआरओपी यानि वन रैंक वन पेंशन जवानों की बहुत पुरानी मांग है। 1971 में युद्ध के बाद यह मांग उठनी शुरू हुई। असल में फौजियों का कहना है कि देश की एक जैसी सेवा करने वाले जवानों को पेंशन अलग अलग क्यों दी जाए। जबकि पेंशन उनकी रिटायरमेंट की अवधि की गणना के हिसाब से मिलती है। 

मिसाल के तौर पर अगर वर्ष 1975 में रिटायर हुए सूबेदार को 2,000 रुपए और किसी कैप्टन रैंक के अफसर को 3,000 रुपए पेंशन मिलती है तो संभवत: वर्ष 1985 में इन्ही रैंकों के दो सेवानिवृत लोगों को 5,000 और 6,000 रुपए की पेंशन मिल रही होगी। 

ऐसे में जवानों की मांग है पुराने वाले लोगों को भी इनके समान पेंशन मिले। मांग ये है कि एक निश्चित तारीख तय करके उस रैंक के सभी लोगों को समान या उस हिसाब से पेंशन मिले। सरकार ने ओआरओपी को कुछ प्रावधानों के साथ हरी झंडी दे दी है। 

जिस पर आंदोलन कर रहे पूर्व सैनिक तैयार नहीं हैं। इनमें मुख्य मुद्दा तो ये ही है कि सरकार पेंशन की समीक्षा हर पांच साल पर करना चाहती है जबकि जवान हर साल समीक्षा कराना चाहते हैं। इसके अलावा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति पर ओआरओपी का लाभ न दिए जाने का भी पूर्व सैनिक विरोध कर रहे हैं। 

हालांकि सरकार ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति पर भी ओआरओपी देने की घोषणा की है लेकिन इसको लेकर अभी भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। 

बता दें कि लोकसभा चुनावों से पूर्व भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी चुने जाने के बाद नरेन्द्र मोदी ने पहली चुनावी सभा हरियाणा के रिवाडी में ही की थी। यहां उन्होंने पूर्व सैनिकों से वादा किया था कि अगर उनकी सरकार सत्ता में आती है तो सभी पूर्व सैनिकों को ओआरओपी का लाभ दिया जाएगा। 

सरकार इस मामले में सैनिकों का पूरा ख्याल रखेगी। हालांकि सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार ने साल 2015 में ओआरओपी का लाभ दिए जाने की घोषणा भी कर दी और इसके लिए 5 हजार करोड़ से ज्यादा की धनराशि भी जारी कर दी। लेकिन कई मुद्दों को लेकर अभी भी पूर्व सैनिक हड़ताल पर बैठे हुए हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed