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राहुल ने चीन को लेकर पीएम से पूछे तीन सवाल, कहा- यथास्थिति बनाए रखने का दबाव क्यों नहीं डाला

Tue, 07 Jul 2020 12:53 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Tue, 07 Jul 2020 12:53 PM IST
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Rahul attack centre over india china standoff ask why china allowed to justify murder of 20 unarmed jawans
राहुल गांधी (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

कांग्रेस नेता राहुल गांधी भारत और चीन के बीच जारी सीमा विवाद को लेकर लगातार केंद्र सरकार पर हमला कर रहे हैं। अब उन्होंने पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में चीनी सेना के पीछे हटने और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ हुई बातचीत को लेकर तीन सवाल पूछे हैं।

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पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने ट्वीट कर कहा, 'राष्ट्रीय हित सर्वोपरि है। भारत सरकार का कर्तव्य इसकी रक्षा करना है। इसलिए, पहला- पूर्व की यथास्थिति बहाल करने पर जोर क्यों नहीं दिया गया? दूसरा- हमारे क्षेत्र में 20 निहत्थे जवानों की हत्या को चीन को सही ठहराने क्यों दिया गया? तीसरा- गलवां घाटी पर हमारी भूभागीय संप्रभुता का उल्लेख क्यों नहीं किया गया?
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अपने ट्वीट के साथ राहुल ने भारत और चीन की सरकारों के बयानों को साझा किया है। इससे पहले चार जुलाई को भी राहुल ने मोदी सरकार पर निशाना साधा था। राहुल गांधी ने कहा था कि देशभक्त लद्दाखी चीनी घुसपैठ के खिलाफ अपनी आवाज उठा रहे हैं और सरकार से अपनी बात सुनने को कह रहे हैं। उनकी चेतावनी को नजरअंदाज करना भारत को महंगा पड़ सकता है।


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गौरतलब है कि तनाव कम होने के पहले संकेत के रूप में चीनी सेना ने सोमवार को पूर्वी लद्दाख में कुछ इलाकों से अपनी सीमित वापसी शुरू कर दी। इससे एक दिन पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने टेलीफोन पर बात की जिसमें वे एलएसी से सैनिकों के 'तेजी से' पीछे हटने की प्रक्रिया को पूरा करने पर सहमत हुए।

विदेश मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि डोभाल और वांग के बीच रविवार को हुई वार्ता में इस बात पर सहमति बनी कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता की पूर्ण बहाली के लिए 'जल्द से जल्द' सैनिकों का 'पूरी तरह पीछे हटना' आवश्यक है तथा दोनों पक्षों को मतभेदों को विवाद में तब्दील नहीं होने देना चाहिए। डोभाल और वांग दोनों देशों के बीच सीमा वार्ता से संबंधित विशेष प्रतिनिधि हैं।

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