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विरोध-प्रदर्शन: रेल कोच फैक्ट्री के निगमीकरण को लेकर रेलवे कर्मियों में रोष

Wed, 31 Mar 2021 06:47 AM IST
Kuldeep Singh अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Wed, 31 Mar 2021 06:47 AM IST
सार

  • पिछले साल राय बरेली कोच फैक्ट्री के निगमीकरण के मुद्दे पर तो कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने जब संसद में यह प्रकरण उठाया तो मुद्दा राष्ट्रीय पटल पर छा गया था

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Rage among railway workers regarding corporatisation of Rail Coach Factory
भारतीय रेलवे (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

विस्तार

रेलवे में निजीकरण के मुद्दे पर जहां सियासत गर्म है तो वहीं रेल कर्मियों में भी रोष है। खासकर रेल कोच फैक्ट्री के निगमीकरण के मुद्दे पर तो पिछले दिनों सड़क पर भी विरोध के सुर सुनने को मिला। रायबरेली कोच के निगमीकरण को लेकर तो यूनियन के पदाधिकारी सड़क पर प्रदर्शन करते दिखे तो कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने भी सियासत को गरमा दिया।

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उत्पादन यूनिट के पूंजीकरण का प्रस्ताव सरकार केसमक्ष विचाराधीन है: रेलवे
उत्पादन यूनिट के निगमीकरण को लेकर संसद सदस्य पीके कुन्हालीकुट्टी ने भी पूछा पूछा कि क्या उत्पादन यूनिट को एकल निकाय के रूप में गठित किया जा रहा है। इसके लिखित जवाब में केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि उत्पादन यूनिट के पूंजीकरण का प्रस्ताव सरकार केसमक्ष विचाराधीन है। इस संबंध में अंतिम निर्णय अभी नहीं लिया गया है।
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पिछले साल रायबरेली कोच फैक्ट्री के निगमीकरण के मुद्दे पर तो कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने जब संसद में यह प्रकरण उठाया तो मुद्दा राष्ट्रीय पटल पर छा गया था। कोरोना के संक्रमण की वजह से तो यह मुद्दा अभी थमा हुआ है, लेकिन रेलवे कर्मचारी इससे समझौता करने को तैयार नहीं है। 

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रेल के सात कारखानों को निगम का स्वरूप देने की योजना
देश के सभी सात कारखानों को निगम का स्वरूप देने की योजना सरकार की है। केंद्र की भाजपा सरकार ने दूसरे कार्यकाल के शुरूआत से ही इसमें तेजी ला दी थी। रेलवे बोर्ड ने 100 दिन के एक्शन प्लान में सभी उत्पादन इकाइयों को एक कंपनी के अधीन करने का प्रस्ताव दिया था।

प्रस्ताव में यह था कि सभी उत्पादन इकाइयां व्यक्तिगत लाभ केंद्र के रूप में काम करेंगी। रेलवे की नई इकाई के सीएमडी को अपनी रिपोर्ट देगी। उत्पादन इकाइयों को भारतीय रेलवे की नई इकाई इंडियन रेलवे रोलिंग स्टॉक के अधीन लाया जाएगा। रेल मंत्रालय का मानना है कि इससे रेलेवे और इकाई दोनों को फायदा होगा। 

निगमीकृत होने वाली प्रस्तावित उत्पादन इकाइयां 

  • .डीजल रेल इंजन कारखाना (वाराणसी)
  • .चितरंजन लोकोमोटिव वक्र्स (आसनसोल)
  • . इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (चेन्नइ)
  • .डीजल वक्र्स (पटियाला)
  • .ह्वील एंड एक्सल प्लांट (बंगलूरू)
  • .मार्डन रेल कोच फैक्ट्री (रायबरेली)


क्या है व्यवस्था

  • .सभी कर्मचारी भारतीय रेलवे के हैं
  • .रेल सेवा अधिनियम लागू होता है
  • .सभी को केंद्रीय कर्मचारी माना जाता है
  • .उत्पादन इकाइयों का सर्वेसर्वा महाप्रबंधक होते है। 

क्या है चिंता

  • . महाप्रबंधक की जगह सीईओ की तैनाती होगी। 
  • . सीईओ सीएमडी को रिपोर्ट करेगा।
  • . ग्रुप सी और डी के कर्मचारी भारतीय रेलवे का हिस्सा नहीं होंगे।
  • . ग्रुप सी और डी के रेल कर्मचारी निगम के कर्मचारी हो जाएंगे।
  • . रेल सेवा अधिनियम लागू नहीं होगा।
  • . निगम के नियमों के तहत काम करना होगा। 
  • . अलग से पे-कमीशन आएगा।
  • . संविदा पर काम करेंगे।
  • . केंद्र सरकार की सुविधाएं नहीं मिलेगी
  • . सेवा शर्तें भी बदल जाएंगी
  • . कर्मचारियों को नौकरी पर तलवार लटकी रहेगी


उत्पादन इकाईयों को निगमीकृत अगर सही तरीके से किया जाए तो बेहतर स्टेप है। उदाहरण के तौर पर मारूती व बीएसएनएल सामने है। चीन में पूरी उत्पादन ईकाईयां है। जब वह बेहतर कर सकता है भारतीय रेलवे क्यों नहीं। कर्मचारियों का भी इससे भला होगा। राय बरेली, कपूरथला, चैन्नई रेल कोच फैक्ट्री काफी बेहतर स्थिति में है।

पांच हजार कोच तक उत्पादन करने की क्षमता है। रही बात बेरोजगारी की तो निगमीकृत होने से कोई बेरोजगार नहीं होगा। कर्मचारियों की बात करें तो इंक्रीमेंट तक ही सीमित रह जाते है। ईकाई में तेजी से बढ़ोत्तरी हो तो वहां के कर्मचारियों को जरूर फायदा होगा। इसका ध्यान भी रखा जाएगा। -राजेश अग्रवाल, पूर्व रेलवे बोर्ड सदस्य रोलिंग स्टॉक

पिछले दिनों ही रेल मंत्री कालका-शिमला गए थे तो उत्पादन इकाई को बंद करने की बात करके आए। जब रेलवे की प्रोडक्शन यूनिट बेहतर काम कर रही है, एलएचबी कोच बना रही है, लाइट वेट कोच बना रही है, विदेशों में भारतीय रेल कोच निर्यात किए जा रहे है तो फिर निगमीकृत करने का क्या मकसद है।

रेलवे ने इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है तो इसे किसी निजी हाथ में सौंपने की वजह नहीं दिखाई देती है। सिर्फ और सिर्फ कमाई के लिए जरिया ढूंढ़ा जा रहा है। सुरक्षा व संरक्षा को ताक पर रखने की कवायद है। निगमीकृत होने का सिर्फ नुकसान है। कर्मचारियों को पहले से ही डरा दिया गया है। 

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