फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Racked communities on reservation quota: Maratha, Jat, Patidar, Gujjar, Kapu

महाराष्ट्र से राजस्थान, गुजरात से आंध्रप्रदेश तक फैली है आरक्षण की आग

Thu, 09 Aug 2018 07:27 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 09 Aug 2018 07:27 PM IST
विज्ञापन
Racked communities on reservation quota: Maratha, Jat, Patidar, Gujjar, Kapu

सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण की मांग को लेकर मराठा संगठनों द्वारा आज बुलाए गए महाराष्ट्र बंद के मद्देनजर व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। मराठा संगठनों के विरोध प्रदर्शन के चलते पिछले महीने राज्य के विभिन्न हिस्सों में बड़े पैमाने पर हिंसा और आगजनी हुई थी।  ऐसे में जान लीजिए कि मराठा समुदाय की कोटा की मांग कितनी पुरानी है?

विज्ञापन


1980 के दशक में, मराठा समुदाय जातिगत कोटा के खिलाफ थे और ‘पिछड़ा’ के रूप में पहचान बनाना नहीं चाहते थे। लेकिन नब्बे के दशक में मराठा समुदायों ने नौकरियों और शिक्षा में कोटा की मांग को समर्थन दिया। पिछले 10 साल में, यह धारणा प्रबल हुई कि एससी/एसटी के अलावा, ओबीसी श्रेणी को भी फायदा हुआ है। मराठा कुनबी उपजाति ओबीसी श्रेणी में शामिल है।
विज्ञापन


मराठा समुदाय को क्यों चाहिए कोटा?

मराठा समुदाय राज्य की आबादी का लगभग 31 प्रतिशत है। यह एक प्रमुख जाति समूह है और यह समरूप यानी एक समान नहीं है। यह क्षत्रिय समुदाय का विस्तार है, जिसमें पूर्व सामंती अभिजात वर्ग और शासकों के साथ-साथ सबसे ज्यादा वंचित किसान शामिल हैं। राज्य के राजनीतिक परिदृश्य पर मराठा हावी है क्योंकि ज्यादातर मुख्यमंत्री मराठा रहे हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


कृषि संकट, नौकरियों की कमी और राज्य के अधूरे वादों ने इस मांग को तेज कर दिया है। मराठों ने परंपरागत रूप से एससी और ब्राह्मणों के खिलाफ गठबंधन किया था, ओबीसी के राजनीतिक उदय ने भी अवसरों की कमी की धारणा को जन्म दिया है। गुजरात में पाटीदार आंदोलन से मराठा हलचल को बढ़ावा मिला।

Racked communities on reservation quota: Maratha, Jat, Patidar, Gujjar, Kapu

क्या चाहते हैं जाट?

उधर जाट आरक्षण हमेशा से जाट समूह की सबसे बड़ी मांग रही है। जाट समुदाय के लोगों की मांग है कि सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कैटेगरी के तहत आरक्षण दिया जाए। इस मांग को लेकर ही जाट समूह आए दिन प्रदर्शन करते हैं जो कई मौकों पर हिंसक भी हो जाती है।

जाट आंदोलन का इतिहास

अखिल भारतीय जाट महासभा के 2007 के सम्मेलन में बहुत से बड़े जाट नेताओं की मौजूदगी में आरक्षण की मांग को बल मिला और इसने एक बड़े आन्दोलन का रूप लिया। तब से जाट समुदाय ने कई बार आंदोलन किया। मार्च 2014 में लोकसभा चुनाव के लिए नोटिफिकेशन जारी होने से एक दिन पहले यूपीए सरकार ने जाट समुदाय के लिए आरक्षण को मंजूरी दे दी। लेकिन मार्च 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी में जाट समुदाय को शामिल करने के केंद्र सरकार के फैसले को निरस्त कर दिया था। इसके बाद जाट समुदाय के लोग उग्र हो गए और फिर से आंदोलन शुरू कर दिया। 

Racked communities on reservation quota: Maratha, Jat, Patidar, Gujjar, Kapu

क्या चाहते हैं पाटीदार?

पाटीदार गुजरात की मुख्य जाति है। राज्य की जनसंख्या में वे 12.3 फीसदी हैं लेकिन वे अपने सामाजिक-आर्थिक स्टेटस की वजह से राज्य की राजनीति में असाधार प्रभाव डालते हैं। ये बिल्कुल उसी तरह हैं जैसे महाराष्ट्र की राजनीति में मराठाओं का प्रभाव होता है। पाटीदार राज्य में काफी समृद्ध हैं।

साल 1985 में पाटीदारों ने ओबीसी आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किया। इस दौरान राज्य में हिंसक प्रदर्शन हुआ और तकरीबन 100 लोगों की जान गई। इसके बाद गुजरात को एक के बाद एक परेशानियों का सामना करना पड़ा। साल 1997 से 2002 के बीच गुजरात का विकास दर राष्ट्रीय विकास दर से कम था। इस दौरान पाटीदारों ने भी काफी मुश्किलों का सामना किया। उनकी खेती कम हो गई और वे शहरों की तरफ भागने के लिए विवश हो गए। एक तरफ कहा जाता है कि पाटीदारों की आर्थिक स्थिति काफी अच्छी है तो दसरी तरफ ये भी कहा जाता है कि सिर्फ 20 फीसदी पाटीदार संपन्न हैं।

साल 2015 में सामने आया असंतोष

धीरे-धीरे पाटीदारों का असंतोष बढ़ने लगा। इसका असर साल 2015 में देखने को मिला। नौकरी की समस्या का सामना कर रहे हजारों पाटीदार युवा मेहसाणा की सड़कों पर उतरे और समुदाय को ओबीसी स्टेटस देने की मांग करने लगे। उनका कहना है कि इससे उन्हें नौकरी और शिक्षा में आरक्षण मिलेगा। उनकी इस मांग को पूरे पाटीदार समुदाय का समर्थन मिला और उन्हें लगने लगा कि आने वाले साल 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले वह अपनी मांग मनवाने में कामयाब होंगे।

Racked communities on reservation quota: Maratha, Jat, Patidar, Gujjar, Kapu

क्या चाहते हैं गुर्जर?

पूर्व में आंदोलन के दौरान गुर्जरों ने खुद को अनुसूचति जन जाति में रखने की मांग को लेकर आंदोलन छेड़ा था जिसमें बदलाव करते हुए अब अलग से पांच प्रतिशत आरक्षण मांगा गया है। राजस्थान की जनसंख्या में 5 फीसदी हिस्सेदारी के साथ गुर्जरों की कुल तादाद लगभग 25 लाख के करीब है।

देश के अन्य राज्यों के मुकाबले राजस्थान में गुर्जर आर्थिक और सामाजिक रूप से वाकई पिछड़े माने जाते हैं, इसलिए वो सन 1960 से ही आरक्षण के लिए आवाज उठाते रहे हैं। लेकिन आंदोलन की ये चिंगारी साल 2008 में उस समय शोला बन गई जब आरक्षण की मांग को लेकर पटरियों पर जमे गुर्जरों पर 23 मई को पुलिस ने फायरिंग कर दी जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई।

इसके विरोध में भड़की हिंसा को रोकने के लिए पुलिस को फिर फायरिंग करनी पड़ी जिसमें 17 लोगों की और जान चली गई। इसके बाद हालात बेकाबू हुए तो सेना को बुलाना पड़ा। कई दिनों तक चले बवाल के बाद भाजपा की तत्कालीन वसुंधरा राजे सरकार ने गुर्जरों को आरक्षण देने के लिए अलग से कमेटी का गठन किया गया था।

उसके बाद से साल 2010 में भी एक बार फिर गुर्जर आंदोलन भड़का लेकिन तब जल्द ही मामला शांत पड़ गया। हाल में फिर यह झगड़ा उस समय उभर कर सामने आ गया जब कोर्ट ने गुर्जरों को दिए जाने वाले पांच फीसदी आरक्षण को घटाकर मात्र एक फीसदी कर दिया।

Racked communities on reservation quota: Maratha, Jat, Patidar, Gujjar, Kapu

क्या चाहता है कापू समुदाय?

वहीं आंध्र प्रदेश विधानसभा ने पिछले साल कापू समुदाय को नौकरियों और शिक्षा में पांच फीसदी आरक्षण देने वाले विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया है। कापू समुदाय को अब एक नई कैटगरी बीसी (एफ) बनाकर अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल किया जाएगा। पिछ़़ड़ी जातियों का इसको लेकर विरोध है, इसकी एक बड़ी वजह ये भी है कि कापू समुदाय को आंध्र प्रदेश में राजनीतिक और आर्थिक हैसियत से काफी मजबूत माना जाता है। 

मनजुनाथा कमीशन की सिफारिशों पर सहमति के बाद कापू समुदाय को आरक्षण देने के लिए आंध्र प्रदेश सरकार ने राज्य विधानसभा में बिल पेश किया। कापू समुदाय काफी समय से सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण की मांग को लेकर मुद्रागाडा पद्मनाभम और समुदाय के दूसरे नेताओं के नेतृत्व में आंदोलन कर रहा था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed