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कांग्रेस में पदाधिकारियों को हटाने के तरीके पर उठने लगे सवाल

Sat, 06 Oct 2018 04:08 AM IST
अनूप वाजपेयी, नई दिल्ली
अनूप वाजपेयी, नई दिल्ली Updated Sat, 06 Oct 2018 04:08 AM IST
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questions are being raised on way of removing office bearers

बदलाव के वक्त से गुजर रही कांग्रेस में नेताओं के बदलने के तौर तरीके को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कई वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मिलकर उन्हें हटाए जाने के समय और तरीके पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। हाल में पश्चिम बंगाल के अध्यक्ष रहे अधीर रंजन चौधरी को हटाए जाने के मामले में खुद राहुल को हस्तक्षेप करना पड़ा। जिसके बाद तय हुआ कि अब किसी पदाधिकारी को हटाने से पहले उसे कांग्रेस अध्यक्ष के कार्यालय से सूचित किया जाएगा।

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कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में सोमेंद्र नाथ मित्रा को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी देने के साथ अधीर रंजन को चुनाव अभियान समिति का चेयरमैन बनाकर साधने की कोशिश जरूर की है। लेकिन अधीर को ये बात नागवार गुजरी कि उन्हें हटाने से पहले इस बात के संकेत तक नहीं दिए गए। उन्होंने अपनी शिकायत सीधे कांग्रेस अध्यक्ष से की। उसके बाद राहुल ने तय किया कि अब एआईसीसी की ओर से होने वाले बदलावों की जानकारी संबंधित नेता को उनके कार्यालय से ही दी जाएगी। 

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इन्हें भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से अलग किया गया

जर्नादन द्विवेदी, मोहन प्रकाश, बीके हरिप्रसाद, सीपी जोशी भी पार्टी के उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से अलग कर दिया गया है। जर्नादन द्विवेदी को हटाने की सूचना उन्हीं के हस्ताक्षर से जारी हुई। लेकिन उन्हें यह विदाई पसंद नहीं आई। उनके समर्थकों की मानें तो द्विवेदी ने राहुल से खुद ही पद छोड़ने की पेशकश की थी। वह मानकर चल रहे थे कि पार्टी उन्हें सम्मानजनक तरीके से कोई और जिम्मेदारी दे देगी। अंबिका सोनी से भी कई राज्यों की जिम्मेदारी लेने के बाद उन्हें जम्मू-कश्मीर से जोड़े रखा गया है।

बीके हरिप्रसाद और सीपी जोशी से भी छीना गया प्रभार

कर्नाटक के नेता बीके हरिप्रसाद एक समय कई राज्यों के प्रभारी थे। उन्हें हटाने का फैसला ऐसे समय हुआ, जब वह राज्य के चुनाव में राहुल संग प्रचार में जुटे थे। उन्हें अचानक दिल्ली से हटाए जाने की सूचना मिली। सीपी जोशी से पहले ही कई राज्यों का प्रभार ले लिया गया था। उनसे आखिरी राज्य भी ऐसे समय छीन लिया गया है, जब राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने हैं। उनके समर्थकों की मानें तो जोशी खुद राज्य की राजनीति में लौटना चाहते हैं। कभी राहुल के करीबी रहे दिग्विजय सिंह की राज्य में वापसी को भी इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।

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