फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Quad and august : What attempt being taken to counter China, what is the difference between the two groups

क्वाड और ऑकस: चीन को घेरने के लिए क्या-क्या किया जा रहा है, दोनों समूहों के बीच क्या अंतर है

Thu, 23 Sep 2021 02:32 PM IST
प्रतिभा ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Thu, 23 Sep 2021 02:32 PM IST
सार

चीन की विस्तारवादी महत्वाकांक्षी योजनाएं कई देशों के लिए भारी चेतावनी की तरह है, खासकर अमेरिका के लिए जो चीन को विश्व शक्ति बनने से रोक रहा है और भारत के लिए जिसकी सीमाएं चीन से लगती हैं। दुनिया की आर्थिक महाशक्तियां अब अलग-अलग समूह बनाकर ड्रैगन को घरेने की तैयारी कर रही है, तो चीन इसमें रोड़े अटकाने की कोशिश करता है। 

विज्ञापन
Quad and august : What attempt being taken to counter China, what is the difference between the two groups
अमेरिका में पीएम मोदी के कार्यक्रम के लिए लगी होर्डिंग - फोटो : Social Media

विस्तार

क्वाड लीडर्स शिखर बैठक में शामिल होन के लिए और संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) की बैठक में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका पहुंच गए हैं। वहां प्रधानमंत्री का जोरदार स्वागत किया गया। पीएम मोदी क्वाड समूह के नेताओं के शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन और जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा के साथ हिस्सा लेंगे।
विज्ञापन


व्हाइट हाउस के बयान के अनुसार, बैठक में क्वाड के नेता कोविड-19 संकट, जलवायु परिवर्तन, साइबर स्पेस और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करेंगे। माना जा रहा है कि क्वाड समूह चीन की घेरने की रणनीति के तहत बनाया गया है। वहीं चीन की दूसरी तरफ से घेराबंदी के लिए ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका ने बीते दिनों एक त्रिपक्षीय सुरक्षा समझौते का एलान किया था। इसे 'ऑकस' नाम दिया गया है।
विज्ञापन


क्या है दोनों समूहों में अंतर
विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने 'क्वाड' और 'ऑकस' के बीच का अंतर साफ करते हुए बताया कि दोनों संगठनों के उद्देश्य अलग-अलग हैं और एक दूसरे को प्रभावित करने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि 'क्वाड' का गठन हिंद-प्रशांत क्षेत्र की जरूरतें पूरी करने के लिए किया गया है। जबकि 'ऑकस', तीन देशों के बीच सुरक्षा गठबंधन है। 'ऑकस' का 'क्वाड' से कोई संबंध नहीं है और इसका 'क्वाड' की गतिविधियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। 
विज्ञापन
विज्ञापन


क्या है क्वाड और क्यों पड़ी इसे बनाने की जरूरत? 
हिंद महासागर में सुनामी के बाद, भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका ने आपदा राहत प्रयासों में सहयोग करने के लिए एक अनौपचारिक गठबंधन बनाया था। मोटे तौर पर तो क्वाड चार देशों का संगठन है और इसमें भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान शामिल हैं। ये चारों देश विश्व की बड़ी आर्थिक शक्तियां हैं। 2007 में, जापान के तत्कालीन प्रधान मंत्री शिंजो आबे ने इसे क्वाड्रीलैटरल सिक्योरिटी डायलॉग या क्वाड का औपचारिक रूप दिया। 

2017 में, चीन का खतरा बढ़ने पर  चारों देशों ने क्वाड को पुनर्जीवित किया, इसके उद्देश्यों को व्यापक बनाया। इसके तहत एक ऐसे तंत्र का निर्माण किया जिसका उद्देश्य धीरे-धीरे एक नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था स्थापित करना है और इसके केंद्र में है चीन। ये चारों देश एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती दादागिरी और उसके प्रभाव को काबू में करना चाहते हैं। खासकर जापान और भारत ने क्वाड बनाने की पहल की।

चीन की घेराबंदी में जुटे अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया इसमें शामिल हुए तो यह ताकतवार क्षेत्रीय संगठन बनकर उभरा। यह संगठन एशिया-प्रशांत क्षेत्र में लगातार अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश में जुटे चीन को घेरने के इरादे से अपने समूह को मजबूत करता गया। माना जाता है कि आने वाले कुछ समय में यह समूह नाटो की तर्ज पर एशिया-प्रशांत का शक्तिशाली समूह बनकर उभर सकता है।
 

Quad and august : What attempt being taken to counter China, what is the difference between the two groups
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसा साल मार्च में भी क्वाड देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ वर्चुअल बैठक में हिस्सा लिया था। - फोटो : PIB/एजेंसी
चीन से इन देशों को क्या है खतरा 
हालांकि, क्वाड में सुरक्षा मुद्दों के अलावा अन्य व्यापक मुद्दों पर भी चर्चा होती है लेकिन इसे चीन इस संगठन से डरा रहता है और इसे अपने लिए खतरा मानता है। दूसरी तरफ क्वाड के प्रत्येक सदस्य के पास चीन के उदय से डरने के अपने कारण हैं और बीजिंग की सैन्य, आर्थिक और तकनीकी प्रगति को रोकना सभी के राष्ट्रीय हित में है। क्वाड के प्रत्येक सदस्य को ऐसा लगता है कि दक्षिण चीन सागर में चीन जिस तरह अपने पैर पसार रहा है और वन बेल्ट वन रोड प्रोजेक्ट जैसी पहलों के माध्यम से अपने प्रभाव क्षेत्र का विस्तार करने की कोशिश कर रहा है उससे उनके लिए खतरा बढ़ रहा है।

अमेरिका लंबे समय से चीन के साथ वैश्विक प्रतिस्पर्धा को लेकर चिंतित है। इसी तरह जापान और ऑस्ट्रेलिया दोनों दक्षिण और पूर्वी चीन सागर में चीन की बढ़ती उपस्थिति को लेकर परेशान है। भारत क्वाड का एकमात्र ऐसा देश है जिसकी सीमाएं चीन से लगती हैं। बीजिंग के बढ़ते सैन्य प्रभाव से भारत का तनाव में आना उचित ही है। इसलिए जब ये चारों देश चीन की आक्रामक विस्तारवाद योजना को घेरने के लिए इस तरह समूह बनाकर साथ आए तो चीन घबरा गया। 

क्वाड को किस नजर से देखता है बीजिंग
चीन ने शुरू में क्वाड के गठन का विरोध किया था और उसके बाद से 13 सालों में बीजिंग ने अपने रूख में बदलाव नहीं किया। 2018 में, चीनी विदेश मंत्री ने क्वाड को "केवल सुर्खियों में रहने वाला" विचार बताया। इस साल की शुरुआत में क्वाड का संयुक्त बयान जारी होने के बाद, चीनी विदेश मंत्रालय ने इस समूह पर एशिया में क्षेत्रीय शक्तियों के बीच खुले तौर पर कलह को भड़काने का आरोप लगाया। बीजिंग क्वाड को उसे घेरने की एक बड़ी रणनीति के तौर पर देखता है और इस समूह को किसी भी तरह का सहयोग नहीं देने के लिए बांग्लादेश जैसे देशों पर दबाव डालता है।

क्या क्वाड चीन की बढ़ती ताकत को रोकने में सक्षम है
भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका आपस में रक्षा संबंध बढ़ा रहे हैं, लेकिन क्या यह चौकड़ी रणनीतिक मतभेद वाले चीन की बढ़ती ताकत का मुकाबला करने के प्रयासों में कामयाब हो सकता है? विश्लेषकों का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका की नौसेनाओं ने पिछले साल नवंबर में अपना सबसे बड़ा नौसैनिक अभ्यास आयोजित किया था जिसमें हिंद महासागर में युद्धपोत, पनडुब्बी और विमान भेजे गए,  इससे चीन की सैन्य और राजनीतिक प्रभाव का मुकाबला करने में चार देशों की गंभीरता का संकेत मिलता है।

हालांकि क्वाड को चीन विरोधी माना जाता है, लेकिन किसी भी संयुक्त बयान चीन या सैन्य सुरक्षा का कोई सीधा जिक्र नहीं होता है क्योंकि सभी क्वाड देश चीनी आपूर्ति श्रृंखलाओं पर बहुत अधिक निर्भर हैं, और प्रत्येक देश एक दूसरे की तुलना में चीन के साथ आर्थिक रूप से अधिक जुड़ा हुआ है।

इसलिए विशेषज्ञों का अनुमान है कि क्वाड आधिकारिक तौर पर चीन के सैन्य खतरे को संबोधित करने से परहेज करेगा और इसके बजाय अपने आर्थिक और तकनीकी प्रभाव पर ध्यान देने की कोशिश करेगा, लेकिन चीन पर दबाव डालने के लिए दूसरे तरीके निकालेंगे। विशेषज्ञ मानते हैं कि वैक्सीन उत्पादन और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों पर कार्य समूहों के गठन को चीन को विवश करने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है।


 

Quad and august : What attempt being taken to counter China, what is the difference between the two groups
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
बन रही है समूह विस्तार की योजना
आने वाले दिनों में इस समूह में वैश्विक और क्षेत्रीय जरूरत के मुताबिक इसमें समान विचारधारा वाले देशों को भी जोड़ने की योजना बन रही है जिससे गठबंधन को विस्तार दिया जा सके। बताया जा रहा है कि अमेरिका हिंद-प्रशांत क्षेत्र में क्वाड को मजबूत बनाने पर गंभीर है। भारत और अमेरिका दोनों देशों का मानना है कि क्वाड साझा हितों पर आधारित साझेदारी है, इसे केवल कुछ देशों तक सीमित रखने का इरादा नहीं है। कोई भी देश जो स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र की वकालत करता है वह इसका हिस्सा किसी न किसी रूप में बन सकता है। माना जाता है कि यह प्रयास अधिक से अधिक देशों को चीन के खिलाफ इकट्ठा करना है।

ऑकस का त्रिकोण
वहीं चीन की घेराबंदी के लिए ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका ने बीते दिनों एक त्रिपक्षीय सुरक्षा समझौते का एलान किया था। इसे 'ऑकस' नाम दिया गया है। जिसे चीन का मुकाबला करने के एक स्पष्ट प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया को ऑकस करार के रुप में परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां मिलेंगी, जिसे चीन का मुकाबला करने के प्रयास माना जा रहा है।

बाइडन प्रशासन की पहल
इस समूह के गठन के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन प्रशासन की पहल मानी जा रही है जो अब हर हाल में चीन को काउंटर करने की योजना पर जोर लगा रहा है। तीनों देशों के नेताओं ने बुधवार को इस गठबंधन का अनावरण किया और जोर देकर कहा कि उनकी पनडुब्बियां परमाणु शक्ति से संचालित होंगी, और परमाणु हथियार नहीं ले जाएंगी।

चीन ने की नए गठबंधन की निंदा
इनके नेताओं ने भी अपने बयान में चीन का नाम खुलकर नहीं लिया। लेकिन चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने नए गठबंधन की निंदा करते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए "बेहद गैर-जिम्मेदार" खतरा बताया। झाओ ने एक नियमित प्रेस ब्रीफिंग में कहा, "तीनों देश क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा रहे हैं, हथियारों की होड़ तेज कर रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय परमाणु अप्रसार प्रयासों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।"

 

Quad and august : What attempt being taken to counter China, what is the difference between the two groups
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन - फोटो : पीटीआई
चीन को रोकने के लिए अमेरिका कुछ भी करने को तैयार
इस समूह का गठन चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए अमेरिका की एक और बड़ी कोशिश मानी जा रही है। अमेरिका चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए कुछ भी करने को तैयार है क्योंकि बीजिंग और वाशिंगटन के बीच प्रतिस्पर्धा बहुत बढ़ गई है। इधर ऑस्ट्रेलिया के भी कोरोनो महामारी और व्यापार को लेकर चीन के साथ संबंध तेजी से बिगड़े हैं। 

संसद की विदेश मामलों की समिति की अध्यक्षता करने वाले ब्रिटेन की सत्तारूढ़ कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद टॉम तुगेंदत ने ट्विटर पर इस संगठन की उत्पति के बारे में बताते हुए लिखा- साफ तौर पर इसकी वजह चीन है। वर्षों से धमकाने और व्यापार शत्रुता के बाद, और अब फिलीपींस जैसे क्षेत्रीय पड़ोसियों के जल क्षेत्र में अतिक्रमण को देखते हुए, ऑस्ट्रेलिया के पास कोई विकल्प नहीं था और न ही अमेरिका या ब्रिटेन के पास। 

दक्षिण चीन सागर पर कृत्रिम टापूओं का निर्माण
हाल के वर्षों में, चीन ने दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम टापुओं का निर्माण किया है कि उसे सैन्य चौकियों में बदल गया है। इन अस्थायी टापूओं पर उसने अपने तट रक्षकों और समुद्री सैनिकों को तैनात किया है। जनवरी में इसने एक कानून पारित किया जिसमें तट रक्षक को विदेशी जहाजों पर गोली चलाने की अनुमति दी गई।

चीन के जवाब में अमेरिका दक्षिण चीन सागर और ताइवान के पास नियमित रूप से ' फ्रीडम ऑफ नेविगेशन'  अभियान का संचालन कर रहा है, जबकि ब्रिटेन की नेवी ने भी इस क्षेत्र में गतिविधियां तेज कर दी हैं। विमानवाहक पोत, एचएमएस क्वीन एलिजाबेथ इस क्षेत्र में है और पिछले महीने जापान के रक्षा बल के साथ मिलकर दक्षिण चीन सागर में ड्रिल किया था। 




 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed