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कतर की जेल में भारतीय कमांडर: रिहाई में देरी का कारण क्या, स्वदेश वापसी कब? पूर्णेंदु तिवारी पर मिला नया अपडेट

Thu, 23 Apr 2026 10:39 PM IST
Himanshu Singh Chandel एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली Published by: Himanshu Singh Chandel Updated Thu, 23 Apr 2026 10:39 PM IST
सार

कतर में हिरासत में लिए गए भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कमांडर पूर्णेंदु तिवारी के मामले में विदेश मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट की है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि तिवारी दो अलग-अलग मामलों का सामना कर रहे हैं। जिस मामले में उन्हें राहत मिली वह अलग है, जबकि वर्तमान में वह कोर्ट ऑफ कैसेशन द्वारा सुनाई गई सजा काट रहे हैं।

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Qatar Dispute Involving Eight Former Naval Officer Seven Return Home Diplomatic Efforts Continue for Commander
विदेश मंत्रालय (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : ANI

विस्तार

कतर में हिरासत में लिए गए भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कमांडर पूर्णेंदु तिवारी के मामले में भारत सरकार ने एक अहम बयान दिया है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को साफ किया कि वे इस मुश्किल समय में अधिकारी के परिवार के साथ लगातार संपर्क में हैं और उन्हें हर संभव मदद दी जा रही है। यह मामला काफी समय से चर्चा में है और सरकार अधिकारी को राहत दिलाने और कानूनी मदद पहुंचाने के लिए अपने कूटनीतिक रास्ते अपना रही है।
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कतर की जेल में बंद पूर्व नौसेना कमांडर पूर्णेंदु तिवारी को लेकर मीडिया में कुछ भ्रम फैल गया था कि जब उन्हें एक मामले में राहत मिल गई है, तो उन्हें अभी तक रिहा क्यों नहीं किया गया है। इसी बात पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया को जवाब दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कमांडर तिवारी से जुड़े दो अलग-अलग कानूनी मामले हैं और लोगों को इन दोनों मामलों को आपस में मिलाना नहीं चाहिए। जिस मामले में उन्हें 12 मार्च को राहत मिली है, वह एक अलग केस है। अभी वह जिस मामले में जेल में बंद हैं, उसमें कतर की 'कोर्ट ऑफ कैसेशन' ने उन्हें ओमान के एक मालिक और कतर के एक अन्य अधिकारी के साथ सजा सुनाई है। अदालत का यह फैसला फरवरी 2026 में आया था।
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विदेश मंत्रालय क्या कह रहा है?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि सरकार इस पूरे मामले को बहुत गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि हम परिवार के लगातार संपर्क में हैं और उन्हें हर तरह की कानूनी और राजनयिक मदद मुहैया करा रहे हैं। जायसवाल ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि जिस मामले में आठ पूर्व नौसेना अधिकारियों को भारत सरकार के दखल के बाद रिहा किया गया था, वह पूरी तरह से अलग मामला था। कमांडर तिवारी को जिस केस में अभी सजा मिली है, उसका उस पुराने केस से कोई लेना-देना नहीं है। 
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नौसेना अधिकारियों का पुराना मामला क्या था?
कतर में अगस्त 2022 में आठ पूर्व भारतीय नौसेना अधिकारियों को हिरासत में लिया गया था। इनमें कैप्टन नवतेज सिंह गिल, कैप्टन सौरभ वशिष्ठ, कमांडर पूर्णेंदु तिवारी, कैप्टन बीरेंद्र कुमार वर्मा, कमांडर सुगुनाकर पकाला, कमांडर संजीव गुप्ता, कमांडर अमित नागपाल और नाविक रागेश शामिल थे। इन सभी पर पनडुब्बी कार्यक्रम से जुड़ी जासूसी का आरोप लगा था, हालांकि कतर की तरफ से इन आरोपों को कभी आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किया गया था। अक्टूबर 2023 में इन सभी को मौत की सजा सुनाई गई थी, लेकिन 28 दिसंबर 2023 को कतर की 'कोर्ट ऑफ अपील' ने इस सजा को कम कर दिया था।

बाकी सात अधिकारी भारत कैसे लौटे?
सजा कम होने के बाद, भारत सरकार के लगातार राजनयिक प्रयासों के चलते आठ में से सात पूर्व नौसेना अधिकारी सुरक्षित भारत लौट आए थे। हालांकि, कमांडर पूर्णेंदु तिवारी कुछ कानूनी वजहों से कतर में ही रुक गए थे। इस मामले को सुलझाने में कूटनीति ने बड़ी भूमिका निभाई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुबई में हुए 'COP28' शिखर सम्मेलन के दौरान कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी से खास मुलाकात की थी। इस बैठक में दोनों नेताओं के बीच आपसी रिश्तों और कतर में रहने वाले भारतीय समुदाय की भलाई को लेकर लंबी चर्चा हुई थी।

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