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Prophet Row: आरिफ मोहम्मद बोले, कतर का माफी मांगने पर जोर देना महत्वपूर्ण नहीं, प्रधानमंत्री और संघ प्रमुख की बातें ध्यान से सुनें
Mon, 06 Jun 2022 08:36 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Mon, 06 Jun 2022 08:36 PM IST
सार
राज्यपाल ने कहा कि हमारी परंपरा न सिर्फ है, बल्कि सभी परंपराओं के लिए सम्मान और स्वीकृति है। हम सभी परंपराओं का सम्मान करते हैं।
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केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान
- फोटो : फेसबुक
विस्तार
केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने सोमवार को इस्लाम पर पूर्व भाजपा नेताओं द्वारा की गई विवादास्पद टिप्पणी पर कतर द्वारा सार्वजनिक माफी की मांग को महत्वपूर्ण नहीं कहकर खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि लोगों को प्रधानमंत्री और आरएसएस पर ध्यान देना चाहिए जिन्होंने भारत की समावेशिता की परंपरा को मजबूत करने की अपील की है।
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कई देशों ने कश्मीर और दूसरे मामलों पर भारत के खिलाफ बयान दिए
दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए आरिफ खान ने कहा कि ऐसे देश हैं जिन्होंने कई वर्षों तक कश्मीर और यहां तक कि अन्य मामलों पर भी भारत के खिलाफ बात की है। कतर से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में राज्यपाल ने कहा कि लोग अपनी राय के हकदार हैं। यह कैसे मायने रखता है? यह (माफी की मांग) महत्वपूर्ण नहीं है। भारत इस तरह की छोटी प्रतिक्रियाओं से परेशान नहीं हो सकता।
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खान ने कहा कि भारत को अपनी परंपराओं की रक्षा करने के बारे में सावधान रहना होगा। राज्यपाल ने संवाददाताओं से कहा कि हमारी परंपरा न सिर्फ है, बल्कि सभी परंपराओं के लिए सम्मान और स्वीकृति है। हम सभी परंपराओं का सम्मान करते हैं और हम सभी परंपराओं को सत्य मानते हैं। भारत की संस्कृति किसी को भी दूसरों के रूप में नहीं मानती है। हमें इस बात पर अधिक ध्यान देना चाहिए कि प्रधानमंत्री बार-बार क्या कह रहे हैं और आरएसएस प्रमुख बार-बार क्या कह रहे हैं। वे कहते हैं हम चाहते हैं कि हमारी समावेशन की परंपरा को मजबूत किया जाए। किसी को भी बाहर नहीं किया जाना है। यही हमारी सांस्कृतिक विरासत है। हमें इसे मजबूत करने की जरूरत है।
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उन्होंने यह भी कहा कि निष्कासित भाजपा नेताओं ने जो कहा वह शायद टीवी के सामने एक पल के गुस्से का नतीजा था। ये चीजें वास्तव में महत्वपूर्ण नहीं हैं। लगभग 10 दिन पहले एक टीवी डिबेट में नेताओं की टिप्पणियों और हटाए गए ट्वीट्स ने भी एक ट्विटर ट्रेंड को जन्म दिया, जिसमें कुछ अरब देशों में भारतीय उत्पादों के बहिष्कार का आह्वान किया गया है।