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सुलेमानी के एजेंट सुबह आए, इस्राइली राजनयिक की गाड़ी में धमाका किया, रात में ही भारत छोड़ गए

Sun, 05 Jan 2020 02:59 AM IST
योगेश साहू गुंजन कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली
गुंजन कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: योगेश साहू Updated Sun, 05 Jan 2020 02:59 AM IST
सार

  • अल-कुद्स भारत समेत पूरे उपमहाद्वीप में रहा सक्रिय 
  • भारतीय एजेंसियों का दावा- अल-कुद्स भारत समेत पूरे उपमहाद्वीप में रहा सक्रिय
  • खुफिया एजेंसियां ट्रंप के दावे को नहीं कर रहीं खारिज
  • 2012 में दिल्ली में इस्राइली राजनयिक की गाड़ी में रहस्यमयी विस्फोटक से धमाका थी कुद्स की करतूत  

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Qasim Sulaimanis agent Came india in morning exploded Israeli diplomats car then left india at night
प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : amar ujala

विस्तार

ईरान की एलीट फोर्स अल-कुद्स और उसके मारे गए जनरल कासिम सुलेमानी के भारत में आतंकी प्लॉट रचने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ट ट्रंप के दावे को भारतीय खुफिया एजेंसियां खारिज नहीं कर रही। एजेंसियों का मानना है कि अल-कुद्स सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरे भारतीय उप महाद्वीप में परोक्ष रुप से सक्रिय रहा है।

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उच्चपदस्थ सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि 2012 में दिल्ली में इस्त्रायली राजनयिक की इनोवा गाड़ी में एक रहस्यमयी विस्फोटक से हुआ धमाका इसका एक उदाहरण है। वह एक ऐसी घटना थी जिससे कुद्स की करतूतें सामने आ गई थी। सूत्रों के मुताबिक हालांकि कोवर्ट ऑपरेशन की दुनिया में वह एक नाकाम कोशिश थी क्योंकि उसमें कोई हताहत नहीं हुआ था।
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गाड़ी में सवार इस्त्रायली राजनयिक की पत्नी, एक स्टाफ और ड्राइवर मामूली रूप से घायल हुआ था। सूत्रों ने बताया कि 13 फरवरी 2012 को दिल्ली  में इस  ऑपरेशन के साथ ही कुद्स ने जार्जिया में ऐसे ही प्लॉट को अंजाम दिया था। लेकिन वहां कार में रखा बम फटा नहीं था।
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जांच में पता चला कि कुद्स के दो एजेंट 13 फरवरी को सुबह दिल्ली पहुंचे थे और शाम करीब चार बजे इस ऑपरेशन को अंजाम देकर रात में ही भारत छोड़ने में कामयाब रहे थे। मौजूदा केंद्रीय मंत्री और उस दौरान गृहसचिव रहे आरके सिंह ने उस धमाके में कुद्स की संलिप्तता की पुष्टि भी की थी।

भारतीय एजेंसियों और दिल्ली पुलिस की जांच में ईरानी न्यूज एजेंसी के लिए काम करने वाला एक पत्रकार सैयद मोहम्मद अहमद काजमी रडार पर आया। उसे गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया। सूत्रों के मुताबिक 2012 में इस्राइल की एजेंसी मोसाद और कुद्स के बीच गंभीर तनातनी चल रही थी। दोनों एक दूसरे के खिलाफ कोवर्ट ऑपरेशन पर आमादा थे।


उसके बाद पश्चिमी एशिया और खाड़ी के देशों में समीकरण तेजी से बदलने लगे थे। उसी का परिणाम है कि ईरान और अमेरिका के बीच गंभीर तनातनी शुरू हो गई। सूत्रों के मुताबिक भारतीय एजेंसियों को कुद्स की हरकतों के बारे में कई सुराग मिलते रहे थे।

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