पंजाब में लड़ाई कांग्रेस और आप के बीच, अकाली-भाजपा बाहर
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पंजाब में राजनीतिक लड़ाई कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच में सिमट गई है। चुनाव विश्लेषक यशवंत देशमुख का कहना है कि दोनों ही दलों में कांटे की टक्कर है। वहीं भाजपा-अकाली दल गठबंधन चुनाव में कोई करिश्मा नहीं कर पा रहा है। देशमुख का कहना है कि भाजपा-अकाली गठबंधन राज्य में लड़ाई से बाहर हो गया है।
पंजाब में सबसे बड़ा मुद्दा नशाबंदी ही है। अकाली दल गठबंधन चुनाव में न तो जनता के बीच अपनी मार्केटिंग कर पा रहा है और न ही राज्य में अच्छी सरकार देने का भरोसा पैदा कर पा रहा है। बतौर भावी मुख्यमंत्री पंजाब की जनता कैप्टन अमरिंदर सिंह को पहली पसंद मान रही है।
वहीं नवजोत सिंह सिद्धू, सरदार परगट सिंह समेत कई नेताओं के कांग्रेस में जाने से उसके मतदाताओं की संख्या बढ़ी है। कांग्रेस की पंजाब प्रभारी आशा कुमारी का कहना है कि उनका दल राज्य में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाएगा। रहा सवाल आम आदमी पार्टी का तो वह दिल्ली सरकार के कामकाज का आधार बनाकर पंजाब चुनाव में उतरी है। जनता का सेवक बताकर मतदाताओं को रिझाने की कोशिश में है। उसकी अपील लोगों में महसूस की जा रही है।
किसकी बनेगी सरकार
यह कहना मुश्किल है। चुनाव पूर्व सर्वेक्षण में भी भाजपा अकाली दल लड़ाई से बाहर हैं। अकाली दल-भाजपा गठबंधन के तीसरे नंबर पर आने की उम्मीद है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला बताया जा रहा है। दोनों पहले और दूसरे नंबर पर आने के लिए कांटे के मुकाबले में हैं।
चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस के पास मजबूत उम्मीदवार हैं। कांग्रेस जनता में सभी वर्गो की नब्ज टटोलकर मुद्दे उठा रही है।
वहीं आम आदमी पार्टी का युवाओं में खासा क्रेज है। उसके अधिकांश उम्मीदवार नये हैं। दोनों ही दल गांव, शहर और कस्बाई मतदाताओं को रिझाने में लगे हैं। इसलिए अभी साफ तौर पर नहीं कहा जा सकता कि किसका पलड़ा भारी होगा।