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पंजाब कांग्रेस में घमासान: चुनाव से चार माह पहले कांग्रेस के असरदार सरदार ने छोड़ा ‘हाथ’

Sun, 19 Sep 2021 06:30 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली
अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Sun, 19 Sep 2021 06:30 AM IST
सार

11 मार्च 1942 को पटियाला राजघराने में जन्मे अमरिंदर तो सेना को समर्पित थे। वह 1963 में सेना में भर्ती हुए और 1965 की भारत-पाक जंग का हिस्सा भी रहे। लेकिन फिर स्कूल के दोस्त राजीव गांधी 1980 में कांग्रेस में ले आए। पढ़ें फिर क्या हुआ...

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Punjab Congress Crisis Four months before the election Amarinder Singh Resigns
कैप्टन अमरिंदर सिंह - फोटो : ANI

विस्तार

देश में 2014 के बाद चुनावी रण में जब कांग्रेस हर ओर पस्त होती जा रही थी, तब यह अमरिंदर सिंह ही थे, जिन्होंने पंजाब में पार्टी की विजय पताका फहराई। 2017 में वह दूसरी बार मुख्यमंत्री की कुर्सी तक तो पहुंचे ही, साथ में कांग्रेस के बड़े क्षत्रप भी बनकर उभरे।

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राजघराने से सेना और फिर सियासत का सफर
11 मार्च 1942 को पटियाला राजघराने में जन्मे अमरिंदर तो सेना को समर्पित थे। वह 1963 में सेना में भर्ती हुए और 1965 की भारत-पाक जंग का हिस्सा भी रहे। लेकिन फिर स्कूल के दोस्त राजीव गांधी 1980 में कांग्रेस में ले आए। इसी साल वह लोकसभा सांसद बने। 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में चरमपंथियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के विरोध में उन्होंने लोकसभा और कांग्रेस, दोनों से इस्तीफा दे दिया। अगले साल 1985 में शिरोमणि अकाली दल में शामिल हो गए। सात साल बाद 1992 में अकाली दल से भी अलग होकर अकाली दल (पंथिक) का गठन कर लिया। कांग्रेस में वापसी के बाद पार्टी का विलय हो गया।

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दोनों कार्यकालों में खींचतान का किया सामना
1998 में पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनने के बाद उनकी मेहनत का परिणाम भी दिखा, जब 2002 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सत्ता पर काबिज हुई। पार्टी ने उन्हें मुख्यमंत्री पद दिया। कैप्टन को पहले कार्यकाल में ही खींचतान का सामना करना पड़ा। अगले चुनावों में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। उनका दूसरा कार्यकाल भी कमोबेश खींचतान में ही गुजरा। नवजोत सिद्धू ने 2017 पंजाब चुनाव से पहले ही कांग्रेस का दामन थामा। माना गया कि उपमुख्यमंत्री पद मिलेगा पर कैबिनेट मंत्री से संतुष्ट होना पड़ा।

 

2019 में बढ़ गया तनाव, पार्टी ने भुगता नुकसान
जून 2019 में सिद्धू को प्रमुख विभागों से हटा दिया। सिद्धू ने कह डाला कि मेरे कप्तान तो राहुल गांधी हैं और वह कैप्टन के भी कैप्टन हैं। खींचतान का नतीजा कांग्रेस को 2019 लोकसभा चुनाव में भुगतना पड़ा।मोदी लहर में वह 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के बड़े नेता अरुण जेटली को अमृतसर से हराकर लोकसभा पहुंचे थे। इसके बाद इस्तीफा देकर वह फिर से पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष बने।

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