{"_id":"62373b4a077be305c9742503","slug":"punjab-arvind-kejariwal-presenting-big-challenge-to-bjp-with-bhagwant-mann-against-pm-modi-latest-news-update","type":"story","status":"publish","title_hn":"पंजाब: भगवंत मान के सहारे भाजपा के सामने बड़ी चुनौती पेश कर रहे केजरीवाल, इस मॉडल से कैसे मुकाबला करेंगे पीएम मोदी?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
पंजाब: भगवंत मान के सहारे भाजपा के सामने बड़ी चुनौती पेश कर रहे केजरीवाल, इस मॉडल से कैसे मुकाबला करेंगे पीएम मोदी?
Sun, 20 Mar 2022 10:57 PM IST
अमित शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमित शर्मा
Updated Sun, 20 Mar 2022 10:57 PM IST
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
भगवंत मान के कैबिनेट में ये नाम शामिल।
- फोटो :
अमर उजाला/सोनू कुमार
विस्तार
भगवंत मान मंत्रिमंडल ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में ही ऐसे निर्णय किए हैं जो उसे लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय बनाने का काम करेंगे। सरकार ने पहली बैठक में ही 25 हजार सरकारी नौकरियों की भर्ती करने का एलान कर युवाओं का दिल जीत लिया है। दूसरे ही दिन पंजाब सरकार ने अवैध ड्रग्स के मामले में नई एसआईटी का गठन कर भ्रष्टाचार और नशे के कारोबार पर भारी चोट करने का संदेश दिया है। अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के विधायकों और मंत्रियों को संदेश देते हुए कहा कि वे राजधानी तक सीमित न रहें और लोगों के बीच जाएं। उनकी परेशानियां सुनें और उनका निवारण करने का प्रयास करें। उन्होंने भ्रष्टाचार को किसी भी कीमत पर स्वीकार न करने की बात भी साफ लहजे में कही है।
केजरीवाल के इस संदेश से यह साफ हो जाता है कि पंजाब सरकार के हर मंत्री-विधायक पर उनकी पैनी नजर रहेगी। पार्टी पंजाब मॉडल को ‘केजरीवाल मॉडल ऑफ गवर्नेंस’ के रूप में पेश करना चाहती है। केजरीवाल जानते हैं कि जनता के बीच भुनाने के लिए उनके पास बड़े नेताओं के कार्यों की विरासत नहीं है, बल्कि अपनी वर्तमान सरकारों के कामकाज के सहारे ही वे जनता के बीच अपनी मजबूत पैठ बना सकते हैं। पंजाब और दिल्ली का एक बेहतरीन मॉडल आम आदमी पार्टी के दूसरे राज्यों में फैलाव का कारण बन सकता है। वह अरविंद केजरीवाल की राष्ट्रीय राजनीति में महत्त्वाकांक्षाओं का द्वार भी खोल सकता है।
केजरीवाल यह भी जानते हैं कि पंजाब सरकार की किसी भी असफलता से उनकी आगे की राजनीति को बड़ी चोट लग सकती है। किसी भी तरह की असफलता पर विपक्षी दल उस पर एक ‘नाकाम सरकार’ होने का तमगा चिपका सकते हैं। लिहाजा पार्टी हर कदम फूंक-फूंक कर रख रही है और पार्टी नेता लगातार हर कदम पर निगाह रख रहे हैं।
भाजपा पर दिखने लगा दबाव
अरविंद केजरीवाल अभी राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका में नहीं आ सके हैं, लेकिन दिल्ली के बाद पंजाब में आम आदमी पार्टी ने जिस तरह की करिश्माई जीत हासिल की है, उससे उनकी धमक केंद्रीय स्तर पर भी साफ सुनी जा रही है। भाजपा नेताओं के बीच अभी से केजरीवाल मॉडल की काट खोजने की चिंता साफ महसूस की जा सकती है। उनकी राजनीति का ही असर हुआ था कि भाजपा को यूपी चुनाव में किसानों को मुफ्त बिजली देने का एलान करना पड़ा था। योगी आदित्यनाथ सरकार 1.0 में भी अपने राज्य में शिक्षा और स्वास्थ्य पर बेहतर काम करने का दबाव बढ़ा था।
भाजपा पर दिख रहा केजरीवाल का असर
भाजपा जानती है कि अब उसके हर मुख्यमंत्रियों के कामकाज की तुलना पंजाब की भगवंत मान सरकार के कामकाज से होगी। अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी हर बात पर अपना मुकाबला उनसे करते हुए नजर आएंगे। प्रचार तंत्र का बेहतर इस्तेमाल करने में माहिर आम आदमी पार्टी इसे हर स्तर पर खूब प्रचारित करने की कोशिश भी करेगी। लिहाजा भाजपा इस लड़ाई में जरा भी कमजोर नहीं पड़ना चाहती है क्योंकि इससे आम आदमी पार्टी को दूसरे राज्यों में भी पांव फैलाने का अवसर मिल सकता है।
माना जा रहा है कि यूपी में योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्रिमंडल और उत्तराखंड की नई सरकार में भी भाजपा किसी भी दागी चेहरे को शामिल नहीं करेगी। पार्टी का मानना है कि हाल में संपन्न हुए चुनावों में यूपी में उसे जीत केवल इसीलिए मिल सकी, क्योंकि यहां योगी आदित्यनाथ सरकार पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं था। उत्तराखंड में भी धामी सरकार पर भ्रष्टाचार के कोई आरोप नहीं लग सके थे। केंद्रीय स्तर पर भी विपक्ष भाजपा सरकार पर अब तक भ्रष्टाचार का कोई आरोप चिपकाने में सफल नहीं हो सका है। पार्टी इसे हर कीमत पर बरकरार रखना चाहती है और इसीलिए एक-एक चेहरे पर केंद्रीय स्तर पर विचार-विमर्श कर ही नाम तय किए जा रहे हैं। इसे केजरीवाल मॉडल ऑफ गवर्नेंस का प्रभाव भी बताया जा रहा है।