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जमीन घोटाला: एफआईआर में पार्थ पवार का नाम क्यों नहीं? बॉम्बे हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, पुलिस की मंशा पर उठे सवाल
Wed, 10 Dec 2025 08:32 PM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: राहुल कुमार
Updated Wed, 10 Dec 2025 08:32 PM IST
सार
विवादित पुणे जमीन सौदे की पुलिस जांच पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने पूछा कि क्या पुलिस महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री मुख्यमंत्री अजीत पवार के बेटे पार्थ पवार को बचा रही है, क्योंकि एफआईआर में उनका नाम शामिल नहीं किया गया।
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अजीत पवार और उनके बेटे पार्थ (फाइल)
- फोटो : एएनआई
विस्तार
मुंबई हाईकोर्ट ने पुणे के एक विवादास्पद भूमि सौदे की पुलिस जांच पर बुधवार को तीखे सवाल उठाए और पूछा कि क्या अधिकारी उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार को प्राथमिकी में नामजद न करके उन्हें बचाने की कोशिश कर रहे हैं? न्यायमूर्ति माधव जामदार की एकल न्यायाधीश पीठ ने मामले में आरोपी व्यवसायी शीतल तेजवानी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए अभियोजन पक्ष से तीखे सवाल पूछे।
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न्यायमूर्ति जामदार ने इस बात पर गौर किया कि संबंधित कंपनी में अधिकतम साझेदारी पार्थ पवार के पास है, बावजूद इसके उनका नाम प्राथमिकी में शामिल नहीं किया गया है। न्यायधीश ने सीधे पूछा, ‘क्या पुलिस उपमुख्यमंत्री के बेटे को बचा रही है और केवल दूसरों की जांच कर रही है।’लोक अभियोजक मनकुंवर देशमुख ने कहा कि मामले की जांच कर रही पुलिस कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करेगी।
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क्या है मामला?
मामला पुणे के पॉश मुंधवा इलाके की 40 एकड़ जमीन की बिक्री से जुड़ा है। यह जमीन सरकारी थी, जिसे बेचा नहीं जा सकता था। इसके बावजूद इसे 300 करोड़ रुपये में अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी नाम की एक कंपनी को बेचा गया, जिसमें पार्थ पवार की हिस्सेदारी है। आरोप है कि कंपनी को 21 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी से भी छूट मिली।
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एफआईआर में पार्थ का नाम नहीं
संयुक्त पंजीकरण महानिरीक्षक की अध्यक्षता वाली समिति ने कारोबारी दिग्विजय पाटिल, शीतल तेजवानी और उप-पंजीयक रविंद्र तारू पर जिम्मेदारी तय की और इन्हें एफआईआर में शामिल किया है। अधिकारियों के मुताबिक, उपमुख्यमंत्री के बेटे पार्थ पवार का नाम किसी भी दस्तावेज में नहीं होने के कारण उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। शीतल तेजवानी को 3 दिसंबर को पुणे पुलिस की आर्थिक अपराधा शाखा (ईओडब्ल्यू) ने गिरफ्तार किया था और वह 11 दिसंबर तक पुलिस हिरासत में हैं।
इसी मामले में बावधान थाने में तेजवानी के खिलाफ दूसरी प्राथमिकी दर्ज की गई, जिसके चलते उन्होंने अग्रिम जमानत याचिका दायर की। तेजवानी के वकील राजीव चव्हाण और अधिवक्ता अजय भीसे ने तर्क दिया कि यह दूसरी प्राथमिकी है, जबकि पुणे पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा जांच जारी है। जब पीठ ने याचिका पर विचार न करने की इच्छा व्यक्त की, तो तेजवानी के अधिवक्ताओं ने याचिका वापस ले ली। विपक्ष ने आरोप लगाया था कि ‘महार वतन’ भूमि के रूप में वर्गीकृत की गई इस जमीन की वास्तविक कीमत 300 करोड़ रुपये से कहीं अधिक है।