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पुणे पोर्श केस: नाबालिग आरोपी की हिरासत 14 दिन बढ़ाने की मांग; जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पुलिस की याचिका
Wed, 05 Jun 2024 04:00 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: श्वेता महतो
Updated Wed, 05 Jun 2024 04:00 PM IST
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पुणे पोर्श मामला
- फोटो : PTI
महाराष्ट्र के पुणे पोर्श मामले में पुलिस ने जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) के समक्ष एक याचिका दायर कर नाबालिग आरोपी की रिमांड 14 दिनों के लिए बढ़ाने की मांग की है। 17 वर्षीय नाबालिग आरोपी की रिमांड बुधवार को खत्म हो रही है। एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी। बता दें कि इस हादसे में दो आईटी इंजीनियरों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
पुणे क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी ने कहा, "हमने जेजेबी के समक्ष अपनी याचिका दायर की, जिसमें निगरानी गृह में नाबालिग आरोपी की रिमांड अगले 14 दिनों तक बढ़ाने की मांग की है। पुलिस की याचिका पर बुधवार को सुनवाई होगी।"
क्या था पूरा मामला
पुणे शहर में 18-19 मई की दरम्यानी रात को करीब तीन करोड़ रुपये की पोर्श कार को तेज गति से दौड़ाने के चक्कर में 17 साल के लड़के ने एक बाइक को टक्कर मार दी थी। गाड़ी की टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक अपना संतुलन खोकर काफी दूर तक सड़क पर घिसटते चली गई, जिससे उस पर सवार दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। मौके पर मौजूद लोगों ने हादसे की सूचना पुलिस को दी, जिसके बाद आरोपी नाबालिग को गिरफ्तार कर लिया गया।
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इस घटना के 14 घंटे बाद आरोपी नाबालिग को कोर्ट से कुछ शर्तों के साथ जमानत मिल गई थी। कोर्ट ने उसे 15 दिनों तक ट्रैफिक पुलिस के साथ काम करने और सड़क दुर्घटनाओं के प्रभाव-समाधान पर 300 शब्दों का निबंध लिखने का निर्देश दिया था। बाद में विवाद बढ़ा तो कोर्ट ने उसकी जमानत रद्द कर दी थी। इसके बाद उसे 5 जून तक एक निरीक्षण गृह भेज दिया गया था। इसके अलावा इस मामले में अबतक नाबलिग के पिता, दादा और मां को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। नाबालिग के खून के नमूने को उसकी मां के खून के नमूने से बदलने के आरोप में दो डॉक्टरों को भी गिरफ्तार किया गया है।
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पुणे क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी ने कहा, "हमने जेजेबी के समक्ष अपनी याचिका दायर की, जिसमें निगरानी गृह में नाबालिग आरोपी की रिमांड अगले 14 दिनों तक बढ़ाने की मांग की है। पुलिस की याचिका पर बुधवार को सुनवाई होगी।"
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क्या था पूरा मामला
पुणे शहर में 18-19 मई की दरम्यानी रात को करीब तीन करोड़ रुपये की पोर्श कार को तेज गति से दौड़ाने के चक्कर में 17 साल के लड़के ने एक बाइक को टक्कर मार दी थी। गाड़ी की टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक अपना संतुलन खोकर काफी दूर तक सड़क पर घिसटते चली गई, जिससे उस पर सवार दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। मौके पर मौजूद लोगों ने हादसे की सूचना पुलिस को दी, जिसके बाद आरोपी नाबालिग को गिरफ्तार कर लिया गया।
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इस घटना के 14 घंटे बाद आरोपी नाबालिग को कोर्ट से कुछ शर्तों के साथ जमानत मिल गई थी। कोर्ट ने उसे 15 दिनों तक ट्रैफिक पुलिस के साथ काम करने और सड़क दुर्घटनाओं के प्रभाव-समाधान पर 300 शब्दों का निबंध लिखने का निर्देश दिया था। बाद में विवाद बढ़ा तो कोर्ट ने उसकी जमानत रद्द कर दी थी। इसके बाद उसे 5 जून तक एक निरीक्षण गृह भेज दिया गया था। इसके अलावा इस मामले में अबतक नाबलिग के पिता, दादा और मां को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। नाबालिग के खून के नमूने को उसकी मां के खून के नमूने से बदलने के आरोप में दो डॉक्टरों को भी गिरफ्तार किया गया है।