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ट्रेनों का पंक्च्यूलिटी रेश्यो 76 से घटकर पहुंचा 70-72 प्रतिशत 

Wed, 25 Apr 2018 12:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Updated Wed, 25 Apr 2018 12:01 AM IST
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Punctuality ratio of trains decreased from 76 to 70-72 percent
भारतीय रेलवे
रेलवे अब दुर्घटना से देर भली वाले श्लोगन के रास्ते पर चल रही है। स्टेशनों पर अब बार-बार उदघोषणा सुनने को मिल रही है कि असुविधा के लिए खेद है। आपकी ट्रेन 10 घंटे की देरी से चल रही है। दरअसल इनदिनों ट्रेनों की समयबद्घता (पंक्च्यूलिटी) का ग्राफ काफी नीचे गिर गया है। पिछले साल एक्सप्रेस ट्रेनों का ग्राफ जहां 76 प्रतिशत था वहीं इस साल गिरकर 70-72 प्रतिशत पहुंच गया है। 
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भीषण गर्मी में भारतीय रेल की ज्यादातर ट्रेन लेट चल रही है। पैसेंजर ट्रेनों से लेकर सुपरफास्ट व प्रीमियम ट्रेनें तक लेटलतीफी की शिकार हैं। इसका खामियाजा हर वर्ग के यात्रियों को उठाना पड़ रहा है। आकड़े बताते है कि पैसेंजर ट्रेनों की समयबद्घता पिछले साल 76.53 प्रतिशत थी तो इस साल यह घटकर 72.66 प्रतिशत हो गई है। समय से ट्रेन संचालन में सबसे बुरा हाल नार्थ सेंट्रल रेलवे का रहा। इस जोन में ट्रेनों की समयबद्घता 40-45 प्रतिशत ही रही। 
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रेलवे इसका मुख्यकारण ट्रैफिक ब्लॉक मान रहा है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि निर्माणकार्य के लिए पिछले साल जहां 14 लाख घंटा ट्रैफिक ब्लॉक लिया गया तो इस साल यह बढ़कर 18 लाख 90 हजार घंटा हो गया है। 4426 जगह निर्माणकार्य चल रहा है। जबकि पिछले साल 2687 जगह काम के लिए ट्रैफिक ब्लॉक लिया गया था। उत्कल एक्सप्रेस दुर्घटना मामले में फाइनल रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्लॉक बस्टिंग पर रेलवे अधिकारियों को समग्र दृष्टिकोण रखने की आवश्यकता है। एक विभाग दूसरे विभाग पर आरोप-प्रत्यारोप से बचे।  
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गणित ऐसा कि सबकुछ ठीक 

ट्रेनों की लेटलतीफी के जो आंकड़े रेलवे बोर्ड को भेजे जाते हैं अधिकारी उसके गणित में उलझकर रह जाते हैं। अगर कोई ट्रेन नार्थ सेंट्रल रेलवे जोन से चलकर उत्तर रेलवे जोन में पहुंचती है तो उत्तर रेलवे इसे अपने जोन की लेटलतीफी नहीं मानता। रेलवे बोर्ड को भेजे गए आंकड़े में 100 प्रतिशत तक पंक्च्यूलिटी दिखा दी जाती है। इसे लेकर रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्वनी लोहानी ने बैठक में स्पष्ट तौर पर कहा कि सभी जोन वास्तविक समयबद्घता को ही दर्शाए। समयबद्घता को लेकर छेड़छाड़ नहीं किया जाए।  
 
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