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अस्पताल के दर पर घंटों तड़पती रही प्रसूता, डॉक्टर घर से नहीं निकलीं

Mon, 18 Jul 2016 04:46 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, लखीमपुर खीरी
ब्यूरो/ अमर उजाला, लखीमपुर खीरी Updated Mon, 18 Jul 2016 04:46 AM IST
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Procreative travaileth hours, the doctor was not come out from home
- फोटो : डेमो पिक

सरकार जननी सुरक्षा योजना के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, चिकित्सकों के लिए अस्पताल परिसर के पास आवास दिए जा रहे हैं लेकिन गांव-गिरांव की गर्भवती महिलाओं के इलाज के लिए स्वास्थ्य महकमा संवेदनशील नहीं है।

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मोहम्मदी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक गर्भवती महिला तीन घंटे तक दर्द से तड़पती रही लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। स्टाफ ने उसे भर्ती नहीं किया और परिसर के आवास में रहने वाली महिला डॉक्टर उसे देखने तक नहीं आईं। घरवाले सुबह जच्चा बच्चा को ले गए। शनिवार रात ब्लाक क्षेत्र के गांव पाल अभय कचनार निवासी प्रमोद की पत्नी सरिता को प्रसव पीड़ा हुई। प्रमोद ने 102 नंबर एंबुलेंस को कॉल किया। एंबुलेंस गांव से सरिता को रात नौ बजे सीएचसी मोहम्मदी ले आई।
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यहां ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स प्रीति कश्यप ने उन्हें देखा और छोटा आपरेशन करने की बात कहकर सुबह तीन बजे आने को कहा। सरिता की हालत बिगड़ने पर प्रमोद और उनके साथ आई महिलाओं ने नर्स से काफी देर तक गुहार लगाई तथा डॉक्टर से मिलवाने के लिए कहा। स्टाफ नर्स ने अस्पताल परिसर में रह रही डॉ अंजना सिंह को फोन किया, तो मोबाइल बंद मिला।

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रातभर बरामदे में पड़ा रहा बच्चा

Procreative travaileth hours, the doctor was not come out from home
नवजात शिशु - फोटो : Getty

पीड़ित की हालत बिगड़ती देख परिवार के लोग डॉक्टर के दरवाजे पर भी गए और आवाज देते रहे लेकिन वह बाहर नहीं आईं। भर्ती न किए जाने के कारण परिवार की महिलाओं ने सरिता को पुराने पीएचसी भवन के बरामदे में लिटा दिया। रात करीब 12 बजे परिवार की महिलाओं के सहयोग से सरिता ने बिटिया को जन्म दिया।

रात भर जच्चा-बच्चा उसी बरामदे में पड़े रहे लेकिन कोई देखने नहीं आया। सुबह प्रमोद पत्नी और बच्ची को लेकर गांव चला गया। महकमे की संवेदनहीनता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अस्पताल से महज 50 मीटर दूर बने आवासों में रहने वाले अधीक्षक, महिला डॉक्टर तक प्रसूता की चीख नहीं पहुंची।

सुबह प्रमोद ने अधीक्षक डा. सुरेंद्र कुमार को महिला डॉक्टर समेत स्टाफ के खिलाफ शिकायती पत्र दिया है लेकिन अधीक्षक मामले की जानकारी होने से इंकार कर रहे हैं। वहीं, डॉ अंजना सिंह का कहना है कि स्टाफ नर्स ने उन्हें कोई फोन नहीं किया, वरना वह जरूर देखने जातीं।

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