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PMML: पीएम संग्रहालय का बड़ा फैसला; दुर्लभ दस्तावेजों का डिजिटलीकरण, शोधकर्ताओं को मिलेगी रिमोट एक्सेस सुविधा

Sat, 29 Nov 2025 07:24 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Sat, 29 Nov 2025 07:24 PM IST
सार

PMML: पीएम संग्रहालय की तरफ से उन दस्तावेजों का डिजिटल रूपांतरण किया जाएगा, जो काफी दुर्लभ हैं। वहीं जो दस्तावेज सबसे अधिक उपयोग किए जाते हैं, उनका बड़ा हिस्सा पहले ही डिजिटलीकृत किया जा चुका है। इन्हें नए सिस्टम पर अपलोड भी कर दिया गया है, जिससे उन्हें तुरंत इस्तेमाल किया जा सकेगा।

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Prime Ministers' Museum and Library digitising archival collection; scholars to get 'remote access'
प्रधानमंत्री संग्रहालय - फोटो : pmsangrahalaya.gov.in

विस्तार

प्रधानमंत्रियों का संग्रहालय और पुस्तकालय (पीएमएमएल) अब अपने दुर्लभ संग्रह को पूरी तरह डिजिटल रूप में संरक्षित करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, यह व्यापक डिजिटलीकरण परियोजना भविष्य के लिए महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेजों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी और शोधकर्ताओं को रिमोट तरीके से सामग्री देखने की सुविधा भी उपलब्ध कराएगी।
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पीएम संग्रहालय के पास ढाई करोड़ से अधिक दस्तावेज 
पीएमएमएल के पास दुनिया की सबसे बड़ी दुर्लभ ऐतिहासिक सामग्रियों में से एक संग्रह मौजूद है, जिसमें ढाई करोड़ से अधिक दस्तावेज शामिल हैं। ये दस्तावेज 1300 से अधिक व्यक्तियों और संगठनों से संबंधित हैं। मंत्रालय ने बताया कि अभिलेखों में व्यक्तिगत पांडुलिपियां, पत्राचार, भाषण, डायरियां, और पुराने समाचार-पत्र लेख शामिल हैं। इन दस्तावेजों की नाजुक स्थिति को देखते हुए इन्हें सुरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक था, इसलिए डिजिटल रूपांतरण शुरू किया गया है।
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शोधकर्ताओं को घर बैठे दस्तावेज देखने की सुविधा
मंत्रालय के मुताबिक, डिजिटल अभिलेखों को देखने के लिए एक विशेष आईटी प्लैटफॉर्म तैयार किया गया है। पंजीकृत शोधकर्ता अब ऑनलाइन अनुरोध भेजकर विशेष दस्तावेज देख सकेंगे। मंजूरी मिलने के बाद अनुरोधित सामग्री शोधकर्ता के कंप्यूटर पर केवल देखने के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। इसका लक्ष्य विश्वभर के शोधकर्ताओं, इतिहास के विद्यार्थियों और ज्ञान के इच्छुक लोगों को आसान पहुंच प्रदान करना है।


तीन मूर्ति भवन में स्थित PMML की बड़ी पहल
पीएमएमएल राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक तीन मूर्ति भवन में स्थित है। यह संस्था स्वतंत्रता के बाद अब तक भारत के सभी प्रधानमंत्रियों की विरासत को सहेजने और प्रदर्शित करने के लिए समर्पित है। पीएमएमएल के निदेशक अश्विनी लोहानी ने कहा कि यह पहल शोध को बढ़ावा देने और आधुनिक व समकालीन भारत के अध्ययन को मजबूत करने के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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क्यों अहम है यह परियोजना?
इस परियोजना में दुर्लभ और नाजुक ऐतिहासिक दस्तावेज सुरक्षित रहेंगे। शोधकर्ताओं को दस्तावेज देखने के लिए दिल्ली आने की आवश्यकता नहीं होगी। वहीं टेक्नोलॉजी के माध्यम से वैश्विक अकादमिक समुदाय को भी फायदा होगा। इस डिजिटलीकरण परियोजना को आधुनिक इतिहास संरक्षण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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