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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया तेलंगाना हाईकोर्ट का आदेश, सुरक्षात्मक हिरासत पर की यह टिप्पणी
Sat, 23 Mar 2024 02:49 PM IST
मिथिलेश नौटियाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मिथिलेश नौटियाल
Updated Sat, 23 Mar 2024 02:49 PM IST
सार
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुरक्षात्मक हिरासत की अवधारणा किसी बंदी को उसके किए गए काम के लिए दंडित करना नहीं बल्कि उसे ऐसा करने से रोकना है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट के एक आदेश को रद्द कर दिया है। दरअसल तेलंगाना के राचाकोंडा में 12 सितंबर 2023 के दिन एक व्यक्ति को खतरनाक गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम 1986 के तहत पुलिस द्वारा सुरक्षात्मक हिरासत में लिया गया था। व्यक्ति द्वारा चार दिन बाद तेलंगाना हाईकोर्ट में अपील की गई लेकिन उसकी याचिका खारिज कर दी गई। इसके बाद बंदी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने बंदी की अपील को खारिज करने वाले तेलंगाना उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया है।
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सुरक्षात्मक हिरासत पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सुरक्षात्मक हिरासत की अवधारणा किसी व्यक्ति को उसके किए गए काम के लिए दंडित करना नहीं बल्कि उसे ऐसा करने से रोकने के लिए है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सुरक्षात्मक हिरासत से संबंधित किसी भी अधिनियम के तहत शक्ति का प्रयोग बहुत सावधानी और संयम के साथ किया जाना चाहिए। साथ ही यह भी कहा कि सुरक्षात्मक हिरासत एक कठोर उपाय है। इसके नियमित प्रयोग पर आधारित इस तरह के किसी भी कदम को शुरुआत में ही खत्म किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की पीठ में न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल थे। उन्होंने पुलिस को निर्देश दिया कि कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने में राज्य की पुलिस मशीनरी अगर फेल होती है, तो यह बात सुरक्षात्मक हिरासत लागू करने का बहाना नहीं होनी चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे लिए यह कहना मुश्किल है कि अपीलकर्ता ने सार्वजनिक व्यवस्था का उल्लंघन किया है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने तेलंगाना उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द करते हुए हिरासत आदेश को रद्द कर दिया।
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