राष्ट्रपति चुनाव: विपक्षी एकता बनाए रखना सोनिया के लिए बना सिरदर्द
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पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी माकपा के बीच जबरदस्त मतभेद हैं। माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के नेताओं से कहा है कि बंगाल में उनके कार्यकर्त्ताओं की पिटाई हो रही है।
ऐसे में उनके लिए दिल्ली में ममता बनर्जी के साथ बैठकर एकता दिखाना मुश्किल होगा। उधर, ममता यह संदेश देना चाह रही हैं कि राष्ट्रपति चुनाव में मोदी को चुनौती देने के लिए वही विपक्षी एकता की अगुवाई कर रही हैं।
26 मई को संसद भवन परिसर की लाइब्रेरी में होने वाली बैठक के लिए सोनिया की लगभग सभी दलों के नेताओं से या तो मुलाकात हो चुकी है या फिर टेलीफोन पर बात हुई है।
दूसरी तरफ नीतीश कुमार ने बैठक में आने से इनकार कर दिया है। उन्होंने सोनिया के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल से कहा है कि वह इतने शॉर्ट नोटिस में नहीं आ सकते। हालांकि नीतीश ने शरद यादव को बैठक में जाने को कहा है।
जून अंत में विपक्ष कर सकता है अपने उम्मीदवार का एलान
सूत्रों ने बताया कि नीतीश चाहते थे कि कोई उम्मीदवार खड़ा करने से पहले मोदी सरकार पर सर्वसम्मति के लिए दबाव बनाया जाए। इसीलिए उन्होंने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का नाम आगे किया था। मगर कांग्रेस इसके लिए तैयार नहीं है।
बीजद प्रमुख और उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। वह भाजपा और कांग्रेस दोनों से समान दूरी बनाने की कोशिश कर रहे हैं। विपक्ष के कई नेता यह मान कर चल रहे हैं कि वह मौका देख एनडीए के पाले में जा सकते है।
जून महीने के आखिर में विपक्ष की ओर से किसी उम्मीदवार का एलान हो सकता है। सूत्रों ने बताया कि गोपाल कृष्ण गांधी, मीरा कुमार और शरद यादव का नाम सबसे आगे है। फिलहाल इन बैठकों के जरिये विपक्षी एकता को दर्शाने की कोशिश की जाएगी।