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लाभ का पद: आप के 20 विधायकों की कुर्सी गई, EC की सिफारिश पर राष्ट्रपति की मुहर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 21 Jan 2018 08:23 PM IST
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आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अयोग्य करार दे दिया है। रविवार को ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में चुनाव आयोग की सिफारिश को राष्ट्रपति ने मंजूरी दे दी। राष्ट्रपति की मुहर के बाद इस निर्णय की अधिसूचना जारी कर दी गई है। बता दें कि केजरीवाल ने इन 20 विधायकों को संसदीय सचिव बनाया गया था।
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इसमें चुनाव आयोग की कार्रवाई असंवैधानिक व अलोकतांत्रिक बताया गया था। बैठक में तय हुआ था कि विधायक अपना पक्ष रखने के लिए अब राष्ट्रपति का दरवाजा खटखटाएंगे। बैठक में 20 विधायकों के साथ उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और अन्य पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद रहे थे, हालांकि विधायकों के कोर्ट पहुंचने से पहले ही राष्ट्रपति ने अपना फैसला सुना दिया।
हालांकि सिसोदिया का दावा था कि आयोग ने बगैर हमारे विधायकों की सुने ही उनकी सदस्यता रद्द करने की सिफारिश की है। यह किसी भी तरह लोकतांत्रिक नहीं है। सिसोदिया ने कहा था कि हम राष्ट्रपति से इस मामले में समय लेंगे।
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20 #AAP MLAs of Delhi Assembly disqualified: Government notification.
— Press Trust of India (@PTI_News) January 21, 2018विज्ञापन
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इसमें चुनाव आयोग की कार्रवाई असंवैधानिक व अलोकतांत्रिक बताया गया था। बैठक में तय हुआ था कि विधायक अपना पक्ष रखने के लिए अब राष्ट्रपति का दरवाजा खटखटाएंगे। बैठक में 20 विधायकों के साथ उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और अन्य पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद रहे थे, हालांकि विधायकों के कोर्ट पहुंचने से पहले ही राष्ट्रपति ने अपना फैसला सुना दिया।
हालांकि सिसोदिया का दावा था कि आयोग ने बगैर हमारे विधायकों की सुने ही उनकी सदस्यता रद्द करने की सिफारिश की है। यह किसी भी तरह लोकतांत्रिक नहीं है। सिसोदिया ने कहा था कि हम राष्ट्रपति से इस मामले में समय लेंगे।
भाजपा कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी पर निशाना
दूसरी ओर विधायकों की सदस्यता जाते ही जहां पूरी आम आदमी पार्टी सकते में है, पार्टी ने अब हमलावर रुख अख्तियार कर लिया है। आप नेता गोपाल राय ने इस फैसले के लिए सीधे सीधे राष्ट्रपति और चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
वहीं सदस्यता गंवाने वाली चांदनी चौक की विधायक अलका लांबा ने भी इसके लिए भाजपा और चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया है। लांबा ने कहा कि राष्ट्रपति के फैसले को कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
दूसरी ओर इस मामले में विपक्षी दलों भाजपा और कांग्रेस ने भी आम आदमी पार्टी पर हमला बोल दिया है। भाजपा नेत्री और सांसद मीनाक्षी लेखी ने कहा कि चुनाव आयोग ने अपना काम किया है। आयोग का निर्णय किसी भी तरह पक्षपातपूर्ण नहीं है, इसका सबूत यही है कि आप के तीन सांसद आराम से राज्यसभा के लिए चुने गए, अगर आयोग पहले निर्णय देता तो यह मुमकिन नहीं था।
वहीं कांग्रेस नेता अजय माकन ने इस मुद्दे पर आप और भाजपा दोनों पर निशाना साधा। माकन ने कहा कि भाजपा ने जानबूझकर इस मुद्दे को लटकाए रखा, इसी वजह से आप के तीन नेता राज्यसभा पहुंचने में सफल रहे।
वहीं सदस्यता गंवाने वाली चांदनी चौक की विधायक अलका लांबा ने भी इसके लिए भाजपा और चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया है। लांबा ने कहा कि राष्ट्रपति के फैसले को कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
दूसरी ओर इस मामले में विपक्षी दलों भाजपा और कांग्रेस ने भी आम आदमी पार्टी पर हमला बोल दिया है। भाजपा नेत्री और सांसद मीनाक्षी लेखी ने कहा कि चुनाव आयोग ने अपना काम किया है। आयोग का निर्णय किसी भी तरह पक्षपातपूर्ण नहीं है, इसका सबूत यही है कि आप के तीन सांसद आराम से राज्यसभा के लिए चुने गए, अगर आयोग पहले निर्णय देता तो यह मुमकिन नहीं था।
वहीं कांग्रेस नेता अजय माकन ने इस मुद्दे पर आप और भाजपा दोनों पर निशाना साधा। माकन ने कहा कि भाजपा ने जानबूझकर इस मुद्दे को लटकाए रखा, इसी वजह से आप के तीन नेता राज्यसभा पहुंचने में सफल रहे।