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Droupadi Murmu: ओल चिकी लिपि के 100 साल पूरे, कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने मातृभाषा भाषा के संरक्षण पर दिया जोर

Mon, 16 Feb 2026 08:47 PM IST
अमन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमन तिवारी Updated Mon, 16 Feb 2026 08:47 PM IST
सार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संथाली भाषा की लिपि 'ओल चिकी' के 100 साल पूरे होने पर इसके  संरक्षण और प्रचार पर जोर दिया है। उन्होंने इसे डिजिटल माध्यम में बढ़ते देख खुशी जताई। राष्ट्रपति ने मातृभाषा के महत्व को बताते हुए भारत को भाषाओं का बगीचा कहा।

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President  Droupadi Murmu Ol Chiki script Santhali language celebration tribal language preservation
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

विस्तार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को संथाली भाषा की लिपि 'ओल चिकी' को बचाने और इसे आगे बढ़ाने की अपील की। उन्होंने ओल चिकी लिपि के 100 साल पूरे होने पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित किया। राष्ट्रपति ने इस बात पर खुशी जताई कि यह लिपि अब डिजिटल माध्यमों में भी तेजी से अपनी जगह बना रही है।
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चिकी लिपि के 100 साल पूरे
पंडित रघुनाथ मुर्मू ने साल 1925 में ओल चिकी लिपि बनाई थी। तब से यह संथाल समाज की पहचान का एक बड़ा प्रतीक बन गई है। साल 2003 में इसे भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था। अपने भाषण में राष्ट्रपति ने भारत को कई भाषाओं का बगीचा बताया। उन्होंने लोगों से अपनी मातृभाषा में बातचीत करने पर जोर दिया।
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यह कार्यक्रम दिल्ली के डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में हुआ। वहां एक सैन्य बैंड ने राष्ट्रपति का स्वागत किया। बैंड ने सबसे पहले 'वंदे मातरम' और फिर राष्ट्रगान 'जन गण मन' बजाया। इस दौरान कलाकारों ने संथाली भाषा में गीत गाए और नृत्य पेश किया। इन प्रस्तुतियों में भारत की प्रकृति और सांस्कृतिक विविधता की झलक दिखी। कार्यक्रम में ओल चिकी लिपि के इतिहास और विकास पर एक शॉर्ट फिल्म भी दिखाई गई।
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जारी हुआ डाक टिकट और 100 रुपये का स्मारक सिक्का
इस खास मौके पर एक विशेष डाक टिकट और 100 रुपये का स्मारक सिक्का जारी किया गया। साथ ही इस लिपि पर एक स्मारिका का भी विमोचन हुआ। संथाली भाषा भारत की प्रमुख जनजातीय भाषाओं में से एक है। यह झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम और बिहार में बड़े स्तर पर बोली जाती है। यह भाषा ऑस्ट्रोएशियाटिक परिवार से जुड़ी है और लंबे समय तक मौखिक रूप से चलती रही।

राष्ट्रपति ने लिपि को बढ़ावा देने वालों को किया सम्मानित
ओल चिकी लिपि में कुल 30 अक्षर हैं। इन्हें संथाली भाषा की आवाजों को सही ढंग से लिखने के लिए बनाया गया है। इसकी दो शैलियां हैं, जिन्हें 'चपा' और 'उसारा' कहा जाता है। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम, गजेंद्र सिंह शेखावत और संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल भी मौजूद रहे। राष्ट्रपति ने उन लोगों को सम्मानित भी किया जिन्होंने इस लिपि को बढ़ावा देने के लिए खास काम किया है।

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