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Droupadi Murmu: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बताई साहित्य की अहमियत, कहा- यह समाज को बेहतर बनाता है
Sat, 23 Nov 2024 09:37 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: बशु जैन
Updated Sat, 23 Nov 2024 09:37 PM IST
सार
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि जो लेखक लोगों के सुख-दुख से जुड़े रहते हैं, उनकी रचनाएं पाठकों को पसंद आती हैं। समाज उन लेखकों को नकार देता है जो समाज के अनुभवों को कच्चा माल मानते हैं। ऐसे लेखकों की रचनाएं एक छोटे से साहित्यिक दुकान तक ही सीमित रह जाती हैं।
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द्रौपदी मुर्मू, राष्ट्रपति
- फोटो : ANI
विस्तार
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एक टीवी कार्यक्रम में साहित्य की अहमियत बताई। उन्होंने कहा कि साहित्य मानवता को सशक्त बनाता है और समाज को बेहतर बनाता है। देश के क्षेत्रीय साहित्य में अखिल भारतीय चेतना हमेशा मौजूद रही है। यह चेतना रामायण और महाभारत से लेकर हमारे स्वतंत्रता संग्राम तक की हमारी यात्रा में दिखाई देती रही है और आज के साहित्य में भी देखी जा सकती है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि जो लेखक लोगों के सुख-दुख से जुड़े रहते हैं, उनकी रचनाएं पाठकों को पसंद आती हैं। समाज उन लेखकों को नकार देता है जो समाज के अनुभवों को कच्चा माल मानते हैं। ऐसे लेखकों की रचनाएं एक छोटे से साहित्यिक दुकान तक ही सीमित रह जाती हैं।
उन्होंने कहा कि जहां बौद्धिक आडंबर और पूर्वाग्रह है, वहां साहित्य नहीं है। लोगों के दुख-दर्द को साझा करना साहित्य की पहली शर्त है। साहित्य को मानवता से जुड़ना चाहिए। साहित्य मानवता को सशक्त और समाज को बेहतर बनाता है। साहित्य मानवता के शाश्वत मूल्यों को बदलती परिस्थितियों के अनुसार ढालता है। साहित्य समाज को नया जीवन देता है।
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राष्ट्रपति ने कहा कि महात्मा गांधी के विचारों पर कई संतों और कवियों का प्रभाव था। साहित्य के ऐसे प्रभाव का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने मौलिक लेखन और अनुवाद के माध्यम से बाल साहित्य को प्रोत्साहित करने के लिए कहा। क्योंकि इससे देश और समाज को समृद्ध बनाने में मदद मिलेगी।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि जो लेखक लोगों के सुख-दुख से जुड़े रहते हैं, उनकी रचनाएं पाठकों को पसंद आती हैं। समाज उन लेखकों को नकार देता है जो समाज के अनुभवों को कच्चा माल मानते हैं। ऐसे लेखकों की रचनाएं एक छोटे से साहित्यिक दुकान तक ही सीमित रह जाती हैं।
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उन्होंने कहा कि जहां बौद्धिक आडंबर और पूर्वाग्रह है, वहां साहित्य नहीं है। लोगों के दुख-दर्द को साझा करना साहित्य की पहली शर्त है। साहित्य को मानवता से जुड़ना चाहिए। साहित्य मानवता को सशक्त और समाज को बेहतर बनाता है। साहित्य मानवता के शाश्वत मूल्यों को बदलती परिस्थितियों के अनुसार ढालता है। साहित्य समाज को नया जीवन देता है।
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राष्ट्रपति ने कहा कि महात्मा गांधी के विचारों पर कई संतों और कवियों का प्रभाव था। साहित्य के ऐसे प्रभाव का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने मौलिक लेखन और अनुवाद के माध्यम से बाल साहित्य को प्रोत्साहित करने के लिए कहा। क्योंकि इससे देश और समाज को समृद्ध बनाने में मदद मिलेगी।