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'ओपन बुक' सिस्टम से परीक्षाएं लेने की तैयारी, घर से एग्जाम देने के बाद भी नहीं कर पाएंगे नकल!

Thu, 14 May 2020 06:49 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 14 May 2020 06:49 PM IST
सार

  • दिल्ली विश्वविद्यालय स्नातक तृतीय वर्ष के छात्रों की ओपन बुक परीक्षा लेने की कर रहा तैयारी
  • छात्र नेता इसके खिलाफ, कहा- पढ़ाई नहीं कर सके हैं छात्र, सबके पास इंटरनेट का संसाधन नहीं

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Preparing to take examinations with 'open book' system, will not be able to copy even after giving exams from home
Delhi University - फोटो : अमर उजाला (फाइल)

विस्तार

कोरोना काल में स्कूल-कॉलेज से लेकर विश्वविद्यालय तक बंद हैं। सबसे ज्यादा मुश्किल इंटरमीडिएट और परास्नातक के अंतिम वर्ष के छात्रों के सामने आ रही है क्योंकि अगर समय रहते उनके परीक्षा परिणाम नहीं आ जाते हैं तो उन्हें अगली कक्षाओं के लिए दाखिला लेने में दिक्कत आ सकती है।
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इस मुश्किल का हल निकालने के लिहाज से ही दिल्ली विश्वविद्यालय स्नातक अंतिम वर्ष के छात्रों के लिेए 'ओपन बुक परीक्षा' आयोजित कराने पर विचार कर रहा है। हालांकि, यह कदम तभी उठाएगा जबकि एक जुलाई तक सामान्य तरीके से परीक्षाओं को आयोजित कराना संभव नहीं हो पाएगा।
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विश्वविद्यालय प्रशासन के इस फैसले की जानकारी होते ही छात्रों में ओपन बुक को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। कुछ छात्र इसे बेहतर तो कुछ इसे सही नहीं बता रहे हैं। छात्रों के अलावा प्रोफेसर और शिक्षाविद भी इसकी उपयोगिता को लेकर सशंकित हैं।
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क्या हो सकता है ओपन बुक का मॉडल

ओपन बुक परीक्षा मॉडल में दो प्रकार से परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं। पहली विधि में छात्रों को कॉलेज या विश्वविद्यालय परिसर में ही आने के लिए कहा जाता है। वहां पर परीक्षा देते समय उन्हें अपनी पुस्तकों या सहायक पुस्तकों का इस्तेमाल करने की इजाजत दी जाती है।


दूसरा मॉडल यूरोप के कुछ देशों में काफी लोकप्रिय है। वहां छात्रों को एक दिए हुए समय पर ऑनलाइन माध्यम से प्रश्न पत्र के सेट भेजे जाते हैं। विशेष लॉग इन के जरिए बच्चे संस्थान के विशेष ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर परीक्षा देते हैं। इस दौरान वे अपनी पुस्तकों या सहायक पुस्तकों का इस्तेमाल करते हैं।

समय बीतते ही छात्र ऑटोमैटिक पोर्टल से लॉग आउट हो जाता है। इस प्रकार निश्चित समय में बच्चों के उत्तर की कॉपी शिक्षण संस्थान के पास पहुंच जाती है, जिसका मूल्यांकन कर छात्र का परिणाम घोषित किया जाता है। दिल्ली विश्वविद्यालय इसी मॉडल से छात्रों की परीक्षा लेने पर विचार कर रहा है।

प्रश्नों का स्वरूप बदल जाएगा

दिल्ली विश्वविद्यालय के दयाल सिंह कॉलेज में रसायन शास्त्र के प्रोफेसर डॉक्टर एके भागी ने अमर उजाला को बताया कि इस समय भी कई देशों में अनेक शिक्षण संस्थान इस माध्यम से परीक्षाएं आयोजित कराते हैं। इसलिए इस माध्यम को अपनाने में कोई बुराई नहीं है। लेकिन इस माध्यम में पूछे जाने वाले प्रश्नों की प्रकृति बदल जाती है।

ऐसे माध्यम में ज्यादातर सवाल विचारात्मक श्रेणी के होते हैं, जिनका उत्तर देते समय तथ्यात्मक जानकारी कम अपेक्षित होती है। यही कारण है कि परीक्षा के समय अगर छात्रों के पास पुस्तक होने के बाद भी वे इससे बहुत ज्यादा मदद नहीं ले सकते। यही वजह है कि जिस छात्र ने ठीक से पढ़ाई नहीं की है, वह इस माध्यम में घर पर पुस्तकों के साथ होकर भी नकल नहीं कर पाते।

क्या है खामियां

लेकिन इस माध्यम से परीक्षा लेने की सबसे बड़ी खामी यह है कि अगर अपने आवास पर कोई छात्र प्रश्नों को किसी एक्सपर्ट के माध्यम से दिलवा देता है, या स्वयं परीक्षा देते समय उससे सहयोग लेता है तो उसका मूल्यांकन मुश्किल हो सकता है। इस तरह यह परीक्षा प्रणाली भी अन्य प्रणालियों की तरह अपनी खामी लिए हुए है।

जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में माइक्रोबायोलोजी के प्रोफेसर डॉक्टर जीडी दास ने कहा कि भारतीय परिप्रेक्ष्य में इसके परिणाम का अध्ययन किया जाना चाहिए। इस माध्यम से सभी बच्चों को बराबर का मौका देने के लिए सभी बच्चों तक संसाधनों का पर्याप्त रूप से होना बहुत आवश्यक है।

अन्यथा तकनीक का उपयोग कर अपेक्षाकृत कम योग्य छात्र ज्यादा बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।

छात्र विरोध में

दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र ओपेन बुक टेस्ट के खिलाफ हैं। दिल्ली विश्वविद्याय छात्र संघ ने भी इस पर अपनी आपत्ति जताई है। एबीवीपी नेता आशुतोष सिंह ने कहा कि हजारों छात्र होली की छुट्टियों के पहले ही अपने घर जा चुके थे और उनके पास पूरी पुस्तकें तक उपलब्ध नहीं थीं।



ऐसे में वे पढ़ाई नहीं कर पाए हैं। ऑनलाइन क्लास की सुविधा भी अनेक छात्र इंटरनेट कनेक्टिविटी के कारण नहीं कर पाए हैं। ऐसे में परीक्षा लेना छात्रों के हितों के साथ खिलवाड़ साबित हो सकता है।

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