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राइट टू एजुकेशन का दायरा बढ़ाने की तैयारी, 12वीं तक शिक्षा होगी अनिवार्य
सीमा शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 07 Jan 2018 08:55 AM IST
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शिक्षा का अधिकार
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केंद्र सरकार राइट टू एजुकेशन (शिक्षा का अधिकार कानून 2009) का दायरा बढ़ाने जा रही है, अब उसे पहली से आठवीं की बजाय नर्सरी कक्षा से 12 वीं कक्षा तक लेकर जाएगी। प्री स्कूल और सेकेंडरी स्कूल पर अगले हफ्ते केंद्र सरकार और देशभर के शिक्षा मंत्रियों की कैब (सेंट्रल एडवाइजरी बोर्ड ऑफ एजुकेशन) की बैठक में फैसला होगा। खास बात यह है कि उत्तराखंड और मध्य प्रदेश सरकार की मांग पर आरटीई के तहत निजी स्कूलों में 25 फीसदी ईडल्यूएस कोटे को खत्म करने पर भी सहमति बन सकती है।
केंद्र सरकार से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, अभी तक पहली से आठवीं कक्षा तक के छात्रों को राइट टू एजुकेशन एक्ट के तहत अनिवार्य शिक्षा का लाभ मिलता है। हालांकि कई राज्यों ने पिछली कैब बैठक में प्री स्कूल को राइट टू एजुकेशन में शामिल करने की मांग रखी थी, लेकिन अब उसका दायरा आठवीं से 12 वीं कक्षा तक करने की तैयारी है। हरियाणा, जम्मू कश्मीर, दिल्ली समेत 12 राज्यों ने प्री स्कूल को प्राइमरी स्कूल में जोडने पर सहमति दी है।
पढ़ें- बच्चों को आठवीं तक पास करने की पॉलिसी होगी 'फेल', कैबिनेट ने दी मंजूरी
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केंद्र सरकार से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, अभी तक पहली से आठवीं कक्षा तक के छात्रों को राइट टू एजुकेशन एक्ट के तहत अनिवार्य शिक्षा का लाभ मिलता है। हालांकि कई राज्यों ने पिछली कैब बैठक में प्री स्कूल को राइट टू एजुकेशन में शामिल करने की मांग रखी थी, लेकिन अब उसका दायरा आठवीं से 12 वीं कक्षा तक करने की तैयारी है। हरियाणा, जम्मू कश्मीर, दिल्ली समेत 12 राज्यों ने प्री स्कूल को प्राइमरी स्कूल में जोडने पर सहमति दी है।
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फाइनल बैठक से पहले 11 जनवरी को कैब सब कमेटी में रिपोर्ट होगी पेश
किरण बेदी से पप्पू को प्रेरणा मिली
- फोटो : thebetterindia.com
उक्त राज्यों का तर्क है कि नर्सरी कक्षा में दाखिले के लिए अभिभावकों को निजी स्कूलों में लाखों रुपये की फीस देकर सीट मिलती है। यदि नर्सरी कक्षा भी राइट टू एजुकेशन में शामिल होती है तो निजी स्कूलों की बजाय अभिभावकों के पास सरकारी स्कूलों में दाखिले का विकल्प होगा और दाखिले की मनमानी भी रूक जाएगी। क्योंकि इस एक्ट के तहत सरकारी स्कूलों में प्री स्कूल के तहत नर्सरी भी जुड़ जाएंगी।
वहीं, उत्तराखंड व मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र को सुझाव दिया था कि राइट टू एजुकेशन के तहत निजी स्कूलों में 25 फीसदी ईडल्यूएस कोटे को खत्म किया जाए। क्योंकि इस कोटे के दाखिले पर केंद्र सरकार करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन असल में छात्रों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। बल्कि इस पैसे को सरकारी स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारने पर खर्च किया जाना चाहिए।
सीमा शर्मा- कैब की बैठक से पहले 11 जनवरी को कैब की सब कमेटी की बैठक होगी, जिसकी अध्यक्षता मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री सत्यपाल सिंह करेंगे। इस हरियाणा,यूपी, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, त्रिपुरा, बिहार , गुजरात, मनीपुर,केरल, पश्चिम बंगाल व असम के शिक्षा मंत्री भी शामिल होंगे। इस बैठक में प्री स्कूल व सेकेंडरी स्कूल पर जो सुझाव व रिपोर्ट आएगी, वह कैब की बैठक में पेश होगी, जिसमें आखिरी फैसला लिया जाएगा।
वहीं, उत्तराखंड व मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र को सुझाव दिया था कि राइट टू एजुकेशन के तहत निजी स्कूलों में 25 फीसदी ईडल्यूएस कोटे को खत्म किया जाए। क्योंकि इस कोटे के दाखिले पर केंद्र सरकार करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन असल में छात्रों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। बल्कि इस पैसे को सरकारी स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारने पर खर्च किया जाना चाहिए।
सीमा शर्मा- कैब की बैठक से पहले 11 जनवरी को कैब की सब कमेटी की बैठक होगी, जिसकी अध्यक्षता मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री सत्यपाल सिंह करेंगे। इस हरियाणा,यूपी, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, त्रिपुरा, बिहार , गुजरात, मनीपुर,केरल, पश्चिम बंगाल व असम के शिक्षा मंत्री भी शामिल होंगे। इस बैठक में प्री स्कूल व सेकेंडरी स्कूल पर जो सुझाव व रिपोर्ट आएगी, वह कैब की बैठक में पेश होगी, जिसमें आखिरी फैसला लिया जाएगा।