पुनरुद्धार की तैयारी: अब डाकघरों को मिलेंगे अधिकार, राज्यसभा से पास हुआ विधेयक
वैष्णव के अनुसार, डाकघरों को व्यावहारिक रूप से बैंकों में तब्दील किया गया है। डाकघरों के विस्तार को देखें तो 2004 से 2014 के बीच 660 डाकघर बंद किए गए। वहीं, 2014 से 2023 के बीच में करीब 5,000 नए डाकघर खोले गए और करीब 5,746 डाकघर खुलने की प्रक्रिया में हैं।
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राज्यसभा ने सोमवार को डाकघरों से संबंधित कानून को संशोधित करने के उद्देश्य से लाए गए एक अहम विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस विधेयक के जरिये 125 साल पुराने भारतीय डाकघर अिधनियम को निरस्त कर देशभर के पोस्ट ऑफिस से संबंधित कानून में संशोधन किया गया है। विधेयक के मुताबिक केेंद्र सरकार अधिसूचना जारी कर किसी अधिकारी को राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध, सार्वजनिक व्यवस्था, आपातकाल या सार्वजनिक सुरक्षा के हित में डाक से भेजे जा रहे सामान/पार्सल को रोकने या खोलने का अधिकार दे सकती है।
निजीकरण की कोई मंशा नहीं
सदन में हुई चर्चा का जवाब देते हुए दूर संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने डाक सेवाओं के निजीकरण संबंधी विपक्षी सदस्यों की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि इसका न तो विधेयक में कोई प्रावधान है न ही सरकार की ऐसी कोई मंशा है। सरकार काफी समय से प्रासंगिकता खो रहे डाकघरों का पुनरुद्धार करने में जुटी है। सरकार इन्हें सेवा प्रदान करने वाला संस्थान बनाना चाहती है। इन्हें बैंकों में तब्दील करने के लिए पिछले नौ साल में कई प्रयास किए गए हैं।
वैष्णव के अनुसार, डाकघरों को व्यावहारिक रूप से बैंकों में तब्दील किया गया है। डाकघरों के विस्तार को देखें तो 2004 से 2014 के बीच 660 डाकघर बंद किए गए। वहीं, 2014 से 2023 के बीच में करीब 5,000 नए डाकघर खोले गए और करीब 5,746 डाकघर खुलने की प्रक्रिया में हैं।