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भरी कोर्ट में प्रशांत भूषण की बात सुनकर उखड़ गए सुप्रीम कोर्ट के जज
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 17 Dec 2016 10:43 AM IST
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प्रशांत भूषण
- फोटो : ANI
जस्टिस जेएस खेहर को वकील प्रशांत भूषण का यह कहना बेहद नागवार गुजरा कि मोदी के खिलाफ जांच की गुहार संबंधी याचिका पर उन्हें सुनवाई नहीं करनी चाहिए क्योंकि चीफ जस्टिस नियुक्त करने संबंधी उनकी फाइल सरकार के पास अभी लंबित है। जस्टिस खेहर ने भूषण की इस दलील को बहुत अनुचित और गलत बताया है।
जस्टिस जेएस खेहर और न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की पीठ ने भूषण से कहा, 'आप देश की शीर्षस्थ अदालत के बारे में बात कर रहे हैं। आप संवैधानिक अथॉरिटी पर संदेह कर रहे हैं। क्या आपको ऐसा लगता है कि हम किसी दबाव के आगे झुक जाएंगे।'
आयकर विभाग की छापेमारी में कथित तौर पर मिले दस्तावेजों के आधार पर मोदी समेत कुछ अन्य मुख्यमंत्रियों पर रिश्वत लेने के आरोपों की एसआईटी की जांच की गुहार करने वाले एनजीओ के वकील प्रशांत भूषण ने जस्टिस खेहर से कहा कि कोर्ट का ऑफिसर होने के नाते मेरा यह दायित्व है कि आपका ध्यान उस ओर दिलाया जाए कि चीफ जस्टिस के रूप में आपके एलिवेशन संबंधी फाइल सरकार के पास लंबित है।
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भूषण ने यह बात तब उठाई जब जस्टिस खेहर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि आपकी जनहित याचिका में साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। पीठ ने कहा कि आपको अहम साक्ष्यों के साथ जनहित याचिका दायर करनी चाहिए थी।
भूषण द्वारा उठाए गए सवाल पर पीठ ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि यह बहुत अनुचित है। आपको यह बात तब बतानी चाहिए थी जब हमने पहली बार सुनवाई की थी। पहली बार तो क्या आपने दूसरी सुनवाई में भी यह बात नहीं उठाई। जवाब में भूषण ने कहा कि वह संस्थान (सुप्रीम कोर्ट) की विश्वसनीयता पर सवाल नहीं उठा रहे हैं बल्कि वह सभी तरह की अफवाहों से संस्थान को बचाना चाहते हैं।
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जस्टिस जेएस खेहर और न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की पीठ ने भूषण से कहा, 'आप देश की शीर्षस्थ अदालत के बारे में बात कर रहे हैं। आप संवैधानिक अथॉरिटी पर संदेह कर रहे हैं। क्या आपको ऐसा लगता है कि हम किसी दबाव के आगे झुक जाएंगे।'
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आयकर विभाग की छापेमारी में कथित तौर पर मिले दस्तावेजों के आधार पर मोदी समेत कुछ अन्य मुख्यमंत्रियों पर रिश्वत लेने के आरोपों की एसआईटी की जांच की गुहार करने वाले एनजीओ के वकील प्रशांत भूषण ने जस्टिस खेहर से कहा कि कोर्ट का ऑफिसर होने के नाते मेरा यह दायित्व है कि आपका ध्यान उस ओर दिलाया जाए कि चीफ जस्टिस के रूप में आपके एलिवेशन संबंधी फाइल सरकार के पास लंबित है।
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भूषण ने यह बात तब उठाई जब जस्टिस खेहर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि आपकी जनहित याचिका में साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। पीठ ने कहा कि आपको अहम साक्ष्यों के साथ जनहित याचिका दायर करनी चाहिए थी।
भूषण द्वारा उठाए गए सवाल पर पीठ ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि यह बहुत अनुचित है। आपको यह बात तब बतानी चाहिए थी जब हमने पहली बार सुनवाई की थी। पहली बार तो क्या आपने दूसरी सुनवाई में भी यह बात नहीं उठाई। जवाब में भूषण ने कहा कि वह संस्थान (सुप्रीम कोर्ट) की विश्वसनीयता पर सवाल नहीं उठा रहे हैं बल्कि वह सभी तरह की अफवाहों से संस्थान को बचाना चाहते हैं।
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अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा, ‘यह घटिया चाल है और उचित नहीं है।'
जस्टिस जगदीश सिंह खेहर
प्रशांत भूषण द्वारा उठाए गए सवाल पर अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा, ‘यह घटिया चाल है और उचित नहीं है। और सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।’ हालांकि पीठ ने अटॉर्नी जनरल से कहा कि वह कुछ न बोले क्योंकि भूषण सवाल उठा चुके हैं।
इसके बाद पीठ ने रोहतगी को दो विकल्प दिए। पहला, इस मामले को चीफ जस्टिस के पास भेज दिया जाए व दोपहर साढ़े तीन बजे विशेष पीठ का गठन किया जाए और दूसरा विकल्प दिया कि सुनवाई शीतकालीन अवकाश के बाद तक के लिए टाल दी जाए।
अटॉर्नी जनरल ने दूसरे विकल्प को चुना। जिसे स्वीकार करते हुए पीठ ने सुनवाई 11 जनवरी तक के लिए टाल दी। अदालत के आदेश से यह लगभग स्पष्ट है कि जस्टिस खेहर ने खुद को इस मामले से अलग कर लिया है।
इसके बाद पीठ ने रोहतगी को दो विकल्प दिए। पहला, इस मामले को चीफ जस्टिस के पास भेज दिया जाए व दोपहर साढ़े तीन बजे विशेष पीठ का गठन किया जाए और दूसरा विकल्प दिया कि सुनवाई शीतकालीन अवकाश के बाद तक के लिए टाल दी जाए।
अटॉर्नी जनरल ने दूसरे विकल्प को चुना। जिसे स्वीकार करते हुए पीठ ने सुनवाई 11 जनवरी तक के लिए टाल दी। अदालत के आदेश से यह लगभग स्पष्ट है कि जस्टिस खेहर ने खुद को इस मामले से अलग कर लिया है।