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जन्मदिन विशेष: जब चाय बागान के मालिक ने इंदिरा गांधी को नहीं पिलाई चाय
शशिधर पाठक
Updated Sat, 19 Nov 2016 10:55 PM IST
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घटना 1978 की है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इंदिरा जी को उनके 100वें जन्मदिन पर व्याख्यान में याद करते हुए बताई। उस दिन प्रणब दा असम में चुनाव प्रचार के दौरान इंदिरा जी के साथ थे। इंदिरा जी को चाय की बुरी तरह से तलब लगी। उन्होंने अपनी इच्छा प्रणब दा से जाहिर की।
ढाबे का था हाल बुरा
प्रणब दा के सामने सबसे बड़ी चुनौती इंदिरा जी को चाय पिलवाने की ही थी, क्योंकि आस पास कोई ऐसी जगह नहीं दिखाई दे रही थी, जहां इस तलब को पूरा कर पाते। एक ढाबा भी दिखाई दिया, तो धूल और गंदगी से भरा बुरे हाल में था।
याद आया कांग्रेसी बागान मालिक
अचानक प्रणब दा को याद आया कि पास में ही एक चाय का बागान मालिक रहता है। उसके चाय के बागान भी हैं और उसका बंगला भी नजदीक ही है। क्यों न उसके यहां चलकर चाय की तलब पूरी कर ली जाए। प्रणब दा ने इंदिरा जी से अपनी इच्छा बताई और कहा कि पास में चाय के बागान के मालिक का बंगला है। वह कांग्रेस समर्थक भी है। क्यों न वहीं चाय पी ली जाए।
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ढाबे का था हाल बुरा
प्रणब दा के सामने सबसे बड़ी चुनौती इंदिरा जी को चाय पिलवाने की ही थी, क्योंकि आस पास कोई ऐसी जगह नहीं दिखाई दे रही थी, जहां इस तलब को पूरा कर पाते। एक ढाबा भी दिखाई दिया, तो धूल और गंदगी से भरा बुरे हाल में था।
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याद आया कांग्रेसी बागान मालिक
अचानक प्रणब दा को याद आया कि पास में ही एक चाय का बागान मालिक रहता है। उसके चाय के बागान भी हैं और उसका बंगला भी नजदीक ही है। क्यों न उसके यहां चलकर चाय की तलब पूरी कर ली जाए। प्रणब दा ने इंदिरा जी से अपनी इच्छा बताई और कहा कि पास में चाय के बागान के मालिक का बंगला है। वह कांग्रेस समर्थक भी है। क्यों न वहीं चाय पी ली जाए।
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.. लेकिन खाली हाथ लौटी इंदिरा
फाइल फोटोः प्रणब मुखर्जी
- फोटो : PTI
इंदिरा जी और प्रणब दा उस चाय बागान मालिक के बंगले पर गए। दरवाजा खटखटाया, लेकिन चाय बागान के मालिक ने इस डर से दरवाजा ही नहीं खोला कि कहीं कोई उसे इंदिरा जी के साथ देख न ले। उसने न तो दरवाजा खोला और न ही चाय या पानी का गिलास ही ऑफर किया। लिहाजा पूर्व प्रधानमंत्री बिना चाय, पानी के प्रणब दा के साथ लौट आई।
क्यों नहीं खोला दरवाजा
दरअसल, इससे पहले इंदिरा गांधी सत्ता में थी, तो उन्होंने आपातकाल लागू किया था। मार्च 1977 के आम चुनाव में इंदिरा जी के इस कदम का बड़े पैमाने पर विरोध हुआ और उनकी पार्टी बुरी तरह से चुनाव हार गई थी। वहीं सत्ता में आई जनता दल सरकार ने इंदिरा गांधी के खिलाफ कार्रवाई के लिए काफी सख्त रुख अपनाया था।
क्यों नहीं खोला दरवाजा
दरअसल, इससे पहले इंदिरा गांधी सत्ता में थी, तो उन्होंने आपातकाल लागू किया था। मार्च 1977 के आम चुनाव में इंदिरा जी के इस कदम का बड़े पैमाने पर विरोध हुआ और उनकी पार्टी बुरी तरह से चुनाव हार गई थी। वहीं सत्ता में आई जनता दल सरकार ने इंदिरा गांधी के खिलाफ कार्रवाई के लिए काफी सख्त रुख अपनाया था।