{"_id":"5b1badfd4f1c1bae6e8b71db","slug":"pranab-mukherjee-may-be-consensus-pm-candidate-if-bjp-does-not-get-majority-in-2019-shiv-sena","type":"story","status":"publish","title_hn":"2019 में बीजेपी को बहुमत नहीं मिला तो प्रणब मुखर्जी हो सकते हैं पीएम उम्मीदवार: शिवसेना","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
2019 में बीजेपी को बहुमत नहीं मिला तो प्रणब मुखर्जी हो सकते हैं पीएम उम्मीदवार: शिवसेना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Updated Sat, 09 Jun 2018 04:07 PM IST
विज्ञापन
नागपुर में आरएसएस के समारोह में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और संघ प्रमुख मोहन भागवत
- फोटो : PTI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शिवसेना ने शनिवार को कहा कि यदि बीजेपी 2019 के आम चुनावों में बहुमत हासिल करने में नाकाम रही तो पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी प्रधान मंत्री पद के लिए सर्वसम्मति से उम्मीदवार हो सकते हैं।
शिवसेना ने भाजपा के वैचारिक सलाहकार संगठन आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी शिवसेना के पूर्व प्रमुख बाल ठाकरे को अपने मंच पर आमंत्रित नहीं किया और इफ्तार पार्टी आयोजित कर मुसलमानों को खुश करने की कोशिश कर रही है।
पार्टी के मुखपत्र सामाना के संपादकीय में यह टिप्पणियां ऐसे समय पर आई है जब बीजेपी और शिवसेना के आपसी रिश्ते अच्छे नहीं चल रहे हैं और दो दिन पहले ही गुरुवार को नागपुर में आरएसएस के कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने हिस्सा लिया था।
विज्ञापन
संघ मुख्यालय में मुखर्जी की यात्रा पर बहुत तीखी प्रतिक्रियां सामने आई थी। मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी सहित उनकी अपनी पार्टी के कई नेताओं ने उनके संघ मुख्यालय जाने के फैसले की आलोचना की थी।
शिवसेना ने कांग्रेस को फटकार लगाते हुए कहा कि मुखर्जी की यात्रा को रोकने की कोशिश में उसने खुद का मजाक बनाया। सेना ने कहा कि यह एक "बिना आवाज वाले पटाखे की तरह था।" सेना ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि आखिर आरएसएस ने क्या सोचकर इस कद्दावर नेता को आमंत्रित करना के फैसला किया, जिन्होंने नेहरूवादी विचारधारा को अपने दिल के करीब रखा था।
संपादयकीय में कहा गया है कि आरएसएस थिंक टैंक भविष्य की राजनीति के लिए रणनीतिक रूप से ऐसी यात्राओं (जैसे मुखर्जी द्वारा) का इस्तेमाल करता है। इस विशेष घटना को लेकर उनके दिमाग में क्या है इसका खुलासा सिर्फ 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान ही हो पाएगा।
विज्ञापन
शिवसेना ने भाजपा के वैचारिक सलाहकार संगठन आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी शिवसेना के पूर्व प्रमुख बाल ठाकरे को अपने मंच पर आमंत्रित नहीं किया और इफ्तार पार्टी आयोजित कर मुसलमानों को खुश करने की कोशिश कर रही है।
विज्ञापन
पार्टी के मुखपत्र सामाना के संपादकीय में यह टिप्पणियां ऐसे समय पर आई है जब बीजेपी और शिवसेना के आपसी रिश्ते अच्छे नहीं चल रहे हैं और दो दिन पहले ही गुरुवार को नागपुर में आरएसएस के कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने हिस्सा लिया था।
विज्ञापन
संघ मुख्यालय में मुखर्जी की यात्रा पर बहुत तीखी प्रतिक्रियां सामने आई थी। मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी सहित उनकी अपनी पार्टी के कई नेताओं ने उनके संघ मुख्यालय जाने के फैसले की आलोचना की थी।
शिवसेना ने कांग्रेस को फटकार लगाते हुए कहा कि मुखर्जी की यात्रा को रोकने की कोशिश में उसने खुद का मजाक बनाया। सेना ने कहा कि यह एक "बिना आवाज वाले पटाखे की तरह था।" सेना ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि आखिर आरएसएस ने क्या सोचकर इस कद्दावर नेता को आमंत्रित करना के फैसला किया, जिन्होंने नेहरूवादी विचारधारा को अपने दिल के करीब रखा था।
संपादयकीय में कहा गया है कि आरएसएस थिंक टैंक भविष्य की राजनीति के लिए रणनीतिक रूप से ऐसी यात्राओं (जैसे मुखर्जी द्वारा) का इस्तेमाल करता है। इस विशेष घटना को लेकर उनके दिमाग में क्या है इसका खुलासा सिर्फ 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान ही हो पाएगा।