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प्रकाश जावेड़कर बोले- अब एनसीईआरटी पाठ्यक्रम होगा आधा
एजेंसी, नई दिल्ली
Updated Sat, 24 Feb 2018 10:06 PM IST
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केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर
- फोटो : amar ujala
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स्कूली विद्यार्थियों को राहत देने के प्रयास के तहत एनसीईआरटी पाठ्यक्रम को शैक्षणिक सत्र 2019 से घटाकर आधा किया जाएगा। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने शनिवार को बताया कि एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम बीए और बी. कॉम कोर्स से ज्यादा है और इसे आधा किए जाने की जरूरत है ताकि सर्वांगीण विकास को अन्य गतिविधियों के लिए विद्यार्थियों को वक्त मिल सके। उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति पर अगले महीने के अंत तक रिपोर्ट आएगी और जरूरी मंजूरी मिलने के बाद इसे सार्वजनिक किया जाएगा।
राज्यसभा टीवी को दिए इंटरव्यू में जावड़ेकर ने कहा कि ज्ञान संबंधी कौशल के लिए छात्रों को पूरी आजादी दिए जाने की जरूरत है। इसके लिए एनसीईआरटी से पाठ्यक्रम में कमी लाने को कहा गया है। स्कूली शिक्षा में सुधार पर विचार चल रहा है। इसके तहत परीक्षा और अगली कक्षा में नहीं भेजे जाने की व्यवस्था लागू की जाएगी।
संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में इससे संबंधित बिल पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि परीक्षा के बिना कोई प्रतिस्पर्धा और लक्ष्य नहीं रहता है। बेहतर परिणाम के लिए प्रतिस्पर्धा जैसा कुछ जरूर होना चाहिए। अगर कोई विद्यार्थी मार्च में हुई परीक्षा में असफल रहता है तो उसे मई में एक और अवसर दिया जाएगा। इसमें भी नाकाम रहने पर उसे उसी कक्षा में फिर से पढ़ना होगा।
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केंद्रीय मंत्री ने शिक्षकों की कमतर गुणवत्ता पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इससे बच्चों के सीखने समझने की क्षमता पर प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि शिक्षा के अधिकार कानून के तहत वर्ष 2015 तक 20 लाख शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाना था लेकिन मात्र पांच लाख को ही किया जा सका है। 14 लाख शिक्षक कौशल उन्नयन कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं, इससे बेहतर नतीजे आने चाहिए।
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राज्यसभा टीवी को दिए इंटरव्यू में जावड़ेकर ने कहा कि ज्ञान संबंधी कौशल के लिए छात्रों को पूरी आजादी दिए जाने की जरूरत है। इसके लिए एनसीईआरटी से पाठ्यक्रम में कमी लाने को कहा गया है। स्कूली शिक्षा में सुधार पर विचार चल रहा है। इसके तहत परीक्षा और अगली कक्षा में नहीं भेजे जाने की व्यवस्था लागू की जाएगी।
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संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में इससे संबंधित बिल पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि परीक्षा के बिना कोई प्रतिस्पर्धा और लक्ष्य नहीं रहता है। बेहतर परिणाम के लिए प्रतिस्पर्धा जैसा कुछ जरूर होना चाहिए। अगर कोई विद्यार्थी मार्च में हुई परीक्षा में असफल रहता है तो उसे मई में एक और अवसर दिया जाएगा। इसमें भी नाकाम रहने पर उसे उसी कक्षा में फिर से पढ़ना होगा।
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केंद्रीय मंत्री ने शिक्षकों की कमतर गुणवत्ता पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इससे बच्चों के सीखने समझने की क्षमता पर प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि शिक्षा के अधिकार कानून के तहत वर्ष 2015 तक 20 लाख शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाना था लेकिन मात्र पांच लाख को ही किया जा सका है। 14 लाख शिक्षक कौशल उन्नयन कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं, इससे बेहतर नतीजे आने चाहिए।