हैदराबाद के सरकारी अस्पताल में बिजली गुल होने से 21 लोगों की मौत!
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हैदराबाद के एक सरकारी अस्पताल में दिनभर में 21 लोगों की मौत की दिल दहला देने वाली खबर है। इतने लोगों की मौत के पीछे अस्पताल के स्टाफ ने अजीब वजह बताई है। स्टाफ कह रहा है कि बिजली गुल होने की वजह से लोगों की जान गई।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक राज्य सरकार द्वारा संचालित गांधी अस्पताल में मारे गए लोग भर्ती थे। 1200 बेड वाला अस्पताल प्रीमियम सुविधाओं वाला माना जाता है।
अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि बार-बार बिजली गुल होने से इतने लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा। डॉक्टरों के मुताबिक पहले रात के करीब 3 बजे बिजली गई, इसके बार थोड़-थोड़े अंतराल में बिजली आती-जाती रही। इस दौरान 4 जनरेटरों को चालू रखा गया। स्टाफ की मानें तो अस्पताल की बिजली में पता नहीं कौन सी खराबी है बार-बार बिजली गुल होने की वजह पता नहीं चल रही है।
ज्यादातर मौतें स्पेशल वार्ड में हुईं। वहीं तेलंगाना के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर सी लक्ष्मा रेड्डी ने कहा कि यह कहना गलत होगा कि बिजली गुल होने की वजह से सरकारी अस्पताल में इतने लोगों की जान चली गई।
वहीं, तेलंगाना डॉक्टर्स एसोसिएशन और गांधी अस्पताल के जनरल सेक्रेटरी डॉक्टर आर रघु ने कहा कि उनके 14 वर्षों के कार्यकाल में अब तक अस्पताल में रोजाना औसतन 10 मरीजों की मौत होती है।
डॉक्टरों को मोबाइल की टॉर्च जलाकर करना पड़ता है ऑपरेशन
अस्पताल के सुप्रिटेंडेंट इंचार्ज प्रोफेसर सीवी चलम ने कहा कि एक दिन इतने लोगों के मारे जाने के मामले की जांच कराई जाएगी।
वहीं एक वरिष्ठ डॉक्टर ने यह कहते हुए चौंकाया कि एक 28 साल के शख्स की संक्रमित इंटेस्टाइन की ऑपरेशन करते वक्त उन्होंने बिजली न होने की वजह से अपने मोबाइल की टॉर्च का इस्तेमाल किया था।
वहीं, साउदर्न पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के सिकंदराबाद डिवीजन के इंजीनियर राजाराम रेड्डी ने माना कि शुक्रवार को बिजली सेवा बाधित रही। उन्होंने इसके पीछे लोकल स्टेशन में कुछ गड़बड़ी होने की दुहाई दी। उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल की खुद की जेनरट व्यवस्था जोखिम भरी है।
बता दें कि गांधी अस्पताल तेलंगाना के 10 जिलों के लोगों को सेवा देता है। यहां तक की महाराष्ट्र और कर्नाटक तक से लोग इस अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल में जिन मरीजों की मौत हुई, उनके परिजनों से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन सवाल उठना लाजमी है कि आखिर व्यवस्थाओं के नाम पर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करना कितना सही है?