यमुना किनारे बसे शहरों के शुद्ध जल का सच हैरान करने वाला
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देश की प्रमुख नदियों में से एक यमुना नदी के किनारे बसे शहरों में शुद्ध जल का सच हैरान करने वाला है। बात चाहे मथुरा की करें, आगरा की या फीरोजाबाद की, तीनों जिले पानी के लिए कब जंग के मुहाने पर आ जाएं कहा नहीं जा सकता।
इन जिलों से संचालित उद्योगों ने यमुना को तो दूषित किया ही, भूमिगत जल भी जहर बना दिया है। गौर करने वाली बात यह है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की नजर भी इस पर नहीं जाती। पेश है आगरा से नीरज शर्मा, मथुरा से पुनीत शर्मा, फीरोजाबाद से दीपक जैन की रिपोर्ट....
250 फुट बोरिंग के बाद भी पानी खारा
ट्रांसयमुना फेज वन और फेज टू को छोड़ दें तो शेष इलाके में पानी की लाइन नहीं है। फेज टू में कई टंकियां कनेक्शन के अभाव में सफेद हाथी बन गई हैं। पुराना इलाका वर्ष भर पानी को तरसता है। टेढ़ी बगिया, फाउंड्री नगर, शोभा नगर, नराइच, सीता नगर सहित तमाम बस्तियों में टैंकरों से पानी की सप्लाई की होती है। नगला मोहन लाल में हालात यह हैं कि मकानों में बने सीवर टैंक पानी जमा करने के लिए प्रयोग हो रहे हैं।
यहां की अधिकांश आबादी गरीब है। आसपास की फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों को खाने के लाले हैं, ऐसे में उन्हें 60 से 70 रुपये रोज का पानी खरीदकर पीना पड़ता है। प्रशासन की अनदेखी के चलते टैंकर माफिया का पूरे क्षेत्र में कब्जा है। टैंकर चालक खंदौली और आसपास के ग्रामीण इलाकों से पानी भरकर लाते हैं और रोजाना करीब 300 से 400 घरों में मनमानी दरों पर पानी बेचते हैं। इन टैंकरों की वजह से झगड़े तो आम हैं हीं आए दिन हादसे हो रहे हैं।
क्षेत्रीय विधायक धर्मपाल सिंह ने जनता की प्यास बुझाने के लिए करीब 35 करोड़ रुपये स्वीकृत कराकर 11 बोरिंग कराईं। इन बोरिंगों से आसपास की टंकियों में कनेक्शन कराया गया है लेकिन पानी आज मोल में ही बिक रहा है।
सुहाग नगरी में फ्लोराइड युक्त पानी गंभीर समस्या
फीरोजाबाद शहर कांच की चूड़ियों के कारण देश-विदेश में सुहाग नगरी के नाम से जाना जाता है। यहां से करीब 19 किलोमीटर दूर जिले के नारखी ब्लाक में दो दर्जन से अधिक गांवों में रह रहे करीब 30 हजार लोग वर्षों से दूषित और खारे पानी की समस्या से जूझ रहे हैं।
जिले में भूमिगत जल का स्तर लगातार गिर रहा है। फीरोजाबाद, शिकोहाबाद, टूंडला, मदनपुर और नारखी ब्लाक डार्क जोन में हैं। नारखी ब्लाक के दो दर्जन गांवों में भूमिगत जल विषैला और खारा हो चुका है। इसे जानवर भी नहीं पीते। नारखी ब्लाक के गांव कायथा, गांगनी, मिलिक, गंज, नगला कढे़रू, राजपुर, सलेमपुर, नारखी धौकल, नारखी ताल्लुका, भूड़ नगरिया, गढी अफोह, कूमरपुर, बड़ा गांव, परीक्षतपुर, गढ़ी हंसराम में फ्लोराइड युक्त पानी की गंभीर समस्या है। इन गावों में सैकड़ों ग्रामीण दांत खराब होने, घुटनों में दर्द, चेहरे पर सूजन जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं।
वाजिदपुर निवासी जितेंद्र सिंह ने बताया कि हम लोग एक किलोमीटर दूर प्राइवेट समबर्सिबल से पानी लाने को विवश हैं। गांव के अंदर का पानी खारा है। जो टंकी है, एक साल से बंद पड़ी है। पाइप लाइन उखड़ी हुई है। गढ़ी अफोह निवासी अरविंद सिंह का कहना है कि गांव के अंदर काफी विषैला पानी है। गांव से करीब एक किलोमीटर दूर से पानी लेने के लिए जाना पड़ता है। छोटे-छोटे बच्चे हैं, पानी की समस्या के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बच्चे सुबह से पानी भरने में लग जाते हैं और स्कूल नहीं जा पाते।
बता दें कि जल निगम ने इन गांवों के लिए 35 वर्ष पहले पेयजल योजना स्थापित कराई, वह अब तक कागजों में दफन है। जलनिगम ने पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए दो दर्जन गांवों का सर्वे भी कराया था। इसके बाद नौ करोड़ की नई योजना भी तैयार की गई लेकिन शासन से बजट न मिलने की बता कहकर विभाग ने हाथ खड़े कर दिए।
मथुरा में टीडीएस मीटर फेल
मथुरा के लोग खारे पानी की समस्या से जूझ रहे है। आलम ये है कि यहां के भूगर्भ जल स्त्रोतों में टोटल डिजॉल्व सॉल्ट (टीडीएस) की मात्रा मानकों से कई गुना अधिक है। ये ही वजह है कि यहां के वाशिंदे पेट की बीमारियों से परेशान है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुसार पीने के पानी में टोटल डिजॉल्व सॉल्ट की मात्रा 10 से 300 तक होनी चाहिए। इसके बाद इसकी संख्या जैसे-जैसे बढ़ती जाती है लोग पेट, पाचन क्रिया सबंधी बीमारियों से ग्रस्त होते चले जाते है।
आरओ मशीन के कारोबारी पुनीत अग्रवाल बताते हैं कि उनके एजेंट शहर के अलग-अलग स्थानों पर आरओ लगाते है। उन स्थानों का टीडीएस चौंकाने वाला है। शहर की पॉश कॉलोनी डेंपियर नगर में टीडीएस की मात्रा 8,000 के पार है तो विकास बाजार, कटौती कुआं, मिशन टीला पर ये मात्रा 2,500 से 3,500 के करीब आती है।
बीते पांच सालों में ही मोती कुंज, चंदनवन कालोनी में टीडीएस 1,200 से बढ़कर 2,500 तक पहुंच गया है। शहर के बाहर नरसी पुरम, इंदुपुरम, हाइवे से सटी कुछ कालोनी में टीडीएस की मात्रा 800 से 1200 के करीब है।
ग्रामीण अंचल में भी बिगड़ रहे है हालात
नौहझील, बाजना, मांट, टैंटीगांव, सुरीर, राया, बलदेव आदि ग्रामीण अंचल के क्षेत्र में भी भूगर्भ जल में टीडीएस की मात्रा तेजी के साथ बढ़ रही है। इन क्षेत्रों में टीडीएस 800 से 1,500 के बीच तक पहुंच गया है।
जिले के अधिकांश क्षेत्रों के जल में टीडीएस की मात्रा बढ़ रही है। इसके चलते लोग पेट के रोग, पाचन क्रिया सबंधी बीमारियों से जूझ रहे है। पथरी बनने की एक वजह पीने के पानी में टीडीएस की अधिक मात्रा होती है।
- डा. राजीव मित्तल
सचिव, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन मथुरा