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West Bengal: आलू की आपूर्ति पर प्रतिबंध से संकट में उद्योग, राज्य के कोल्ड स्टोरेज संघ ने जताई चिंता

Tue, 17 Dec 2024 09:33 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 17 Dec 2024 09:33 PM IST
सार

West Bengal: पश्चिम बंगाल के कोल्ड स्टोरेज संघ ने राज्य के भीतर आलू के निर्यात पर पाबंदी को लेकर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं आलू का अधिक भंडार जमा हो गया है, जिससे इनके सड़ने का खतरा बढ़ गया है। 
 

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Potato movement ban could spell disaster, warns West Bengal cold storage body
आलू - फोटो : फ्रीपिक

विस्तार

पश्चिम बंगाल कोल्ड स्टोरेज संघ (डब्ल्यूबीसीएसए) ने मंगलवार को कहा कि राज्य के भीतर आलू के परिहवन पर हाल ही में लगाए गए प्रतिबंध से उद्योग को भारी नुकसान हो रहा है। संगठन ने इस पर तुरंत विचार करने की मांग की।  

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इसके मुताबिक, राज्य में आमतौर पर 60 फीसदी आलू की पारंपरिक खपत होती है, जबकि 40 फीसदी आलू अन्य राज्यों में भेजा जाता है। लेकिन इस प्रतिबंध ने व्यापार को पूरी तरह से प्रभावित किया है, जिसके कारण कोल्ड स्टोरेज में आलू का भंडार बढ़ गया है, खासकर दक्षिण बंगाल के बांकुरा, मेदिनीपुर, बर्धमान और हुगली जिलों में। 
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डब्ल्यूबीसीएसए के उपाध्यक्ष शुभजीत साहा ने कहा, आलू के परिवहन पर प्रतिबंध से कोल्ड स्टोरेज उद्योग को भारी नुकसान हो रहा है और इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ेगा। किसान, खासकर छोटे और मंझले किसान परेशान हैं। 
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पश्चिम बंगाल सरकार ने यह प्रतिबंध राज्य में आलू की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए लगाया है। ताकि उपभोक्ताओं पर महंगाई का असर न पड़े। हालांकि, यह प्रतिबंध उद्योग और किसानों के लिए समस्या बन गया है।

साहा ने बताया कि 'ज्योति' और चंद्रमुखी जैसी किस्मों के आलू की राज्य में अधिक खपत होती है, जबकि दक्षिण बंगाल के आलू अन्य राज्यों को भेजे जाते हैं। अब इन आलू के भंडारण में फंसने से खराब होने का खतरा बढ़ गया है। 


डब्ल्यूबीसीएसए के पूर्व अध्यक्ष पतित पावन डे ने कहा, अगर जल्दी इन आलू का निर्यात नहीं हुआ, तो यह आलू खराब हो जाएंगे और किसानों को बड़ा नुकसान होगा। राज्य सरकार ने आलू को स्टोर करने की समय सीमा को बढ़ाकर दिसंबर अंत तक कर दिया है, ताकि आलू को स्टॉक को निकाला जा सके। 

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