खूबसूरती पर भी प्रदूषण का ग्रहण, 30 फीसदी तक बढ़ी ब्यूटी प्रोडक्ट्स की बिक्री
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एक समय था जब लोग गोरी त्वचा के लिए तरह-तरह के ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना चाहते थे। मगर अब सांवला रंग नहीं बल्कि प्रदूषण से बचाव पहली प्राथमिकता बनता जा रहा है। हमारी सेहत ही नहीं बल्कि खूबसूरती को भी प्रदूषण का ग्रहण लगता जा रहा है। इसी वजह से ब्यूटी प्रोडक्ट्स का बाजार 30 फीसदी तक बढ़ चुका है।
प्रदूषण का बढ़ता हुआ स्तर लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। महानगर खासतौर पर इससे प्रभावित दिखाई हैं। लोग अपनी ओर से हर संभव प्रयास करते हैं कि अधिकतम सुरक्षा कैसे की जा सकती है। इससे एयर-प्यूरीफायर से लेकर मास्क तक उत्पादों की वृद्धि बढ़ गई। मगर हाल ही के सर्वे बताते हैं कि यह चिंता अब त्वचा तक आ पहुंची है।
आंकड़े बताते हैं कि प्रदूषण से बचाव वाले उत्पादों की बिक्री 25 से 30 प्रतिशत बढ़ी है जबकि गोरेपन की क्रीम की बिक्री पूरे साल में 8 से 10 प्रतिशत की ही वृद्धि हो सकी।
इन उत्पादों की बिक्री बढ़ी
प्रदूषण से निपटने वालों उत्पादों में फेसवॉश, टॉनर और फेस क्लीनजर शामिल हैं। पॉन्ड्स, लॉटस और एम्वे जैसी कंपनियों ने 30 प्रतिशत की वृद्धि की है। जबकि फेयर एंड लवली, लॉटस व्हाइट ग्लो, गार्नियर व्हाइट कॉम्पलैक्स जैसे उत्पाद अधिकतम 10 प्रतिशत की ही वृद्धि कर पाए।
गोरेपन की क्रीम से तीन गुना ज्यादा बिक्री
ऐसी ही बड़ी कंपनी के एक अधिकारी के मुताबिक एंटी-पॉल्यशन उत्पादों की किसी फेयरनेस क्रीम की तुलना में तीन गुना तेजी से बढ़े हैं। यह सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में हर उस स्थान पर है जहां प्रदूषण की मात्रा बढ़ी है। कंपनियों ने भी उन उत्पादों पर जोर देना शुरू किया है, जो त्वचा को सुरक्षा दें न कि उसकी रंगत निखारें। जानकारों का यह भी कहना है कि त्वचा के किसी खास रंग का प्रचार करना गलत है और कंपनी भी इस बात को संज्ञान में ले रही हैं।