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कर्नाटक: इन इलाकों में तेंदुए, हाथी और काला हिरण है चुनावी मुद्दा, जानिए क्यों
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Updated Mon, 30 Apr 2018 12:21 PM IST
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कर्नाटक में जंगलों के आसपास के सीमावर्ती इलाकों से चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के लिए सड़क और बिजली से जुड़े चुनावी वादों से ज्यादा जरूरी जंगली जानवरों को इलाके में आने से रोकना हो गया है। यहां केवल हाथी ही नहीं बल्कि तेंदुए, बंदर, मगरमच्छ और काला हिरण भी चुनावी मुद्दा बन चुके हैं।
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हसन जिले के सकलेशपुर इलाके में उम्मीदवार जैसे ही अपने चुनावी वादों की घोषणा करने आए वैसे ही लोगों ने उन्हें रोक लिया और विरोध करना शुरू कर दिया। वहां मौजूद स्थानीय व्यक्ति प्रणब कॉल का कहना है कि वह लोग चाहते हैं कि उम्मीदवार हाथियों के खतरे से निपटने के लिए किसी ठोस योजना के साथ आएं। उन्होंने कहा कि उनके इलाके में हर हफ्ते लोगों की मौत होती है। उनके क्षेत्र की महिलाएं और बच्चे अंधेरा होने के बाद घर से निकलने में डरते हैं।
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यह हाल केवल यहीं का नहीं है बल्कि यहां से करीब 250 किमी दूर देवरागर जिले के रानेबेन्नुरु का भी है। यहां काला हिरण चिंता का विष्य बना हुआ है। चुनावी क्षेत्र में यह राज्य का सबसे बड़ा कृष्णमृग आरक्षित क्षेत्र है। स्थानीय निवासी परमेश एनएम जो कि एक किसान हैं का कहना है कि जंगलों में घास की कमी होने के कारण हिरण खेतों में घुस जाते हैं। जिस कारण उनकी फसल को काफी नुकसान हो रहा है।
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इसके अलावा बंगलुरु के ग्रामीण इलाकों सहित मैसूर, मांड्या और तुमकुर जिलों में तेंदुए लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। वहीं उत्तरी कर्नाटक के बेलागाम, विजयवाड़ा और बागलकोट जिलों में मगरमच्छ के कारण लोग डरे हुए हैं। यहां नदी के किनारों से निकलकर वह खेतों में घुस जाते हैं। आंकड़ों के मुताबिक तीन सालों के भीतर कुल 149 लोगों की मौत जंगली जानवरों के कारण हुई है। जिसमें मौत का आंकड़ा साल 2014-15 में 53, 2015-16 में 47 और 2016-17 में 49 रहा। इसमें मुआवजे के तौर पर कुल 7.3 करोड़ रुपये भी दिए गए हैं।