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Politics Over CM's Health In Maharashtra: पहले भी हो चुकी है नेताओं की सेहत पर सियासत, बिगड़ती सेहत मतलब सत्ता का संघर्ष
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उद्धव ठाकरे
- फोटो :
पीटीआई
विस्तार
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की सेहत को लेकर महाराष्ट्र में सियासत चल रही है। बताया जा रहा है कि ठाकरे की सर्वाइकल स्पाइन सर्जरी हुई है जिसके बाद वे स्वास्थ लाभ ले रहे हैं। इस सर्जरी के लिए वे लगभग तीन सप्ताह तक अस्पताल में भर्ती रहे। मुख्यमंत्री लगभग 45 दिनों से किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर नही आए हैं। इस पर महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि उद्धव ठाकरे जब तक बीमार हैं तब तक उन्हें अपने किसी विश्वसनीय को सीएम की कुर्सी सौंप देनी चाहिए। हालांकि उनके बेटे और राज्य के मंत्री आदित्य ठाकरे ने कहा है कि सीएम की तबीयत एकदम ठीक है और उन्होंने कल भी एक जरूरी बैठक की है।नेताओं का स्वास्थ्य बड़ा मुद्दा
कुछ सालों पहले सत्ता के गलियारों में अफवाहों की भरमार थी कि ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक गंभीर रूप से अस्वस्थ हैं। उनके करीबी अब दावा करते हैं कि एक पार्टी के विद्रोही ने ओडिशा की राजनीति पर उनकी पकड़ को कमजोर करने के लिए दुर्भावनापूर्ण रूप से झूठी सूचना फैलाई। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी को बीमारी की वजह से अपनी कुर्सी तक छोड़नी पड़ी। कैलाश जोशी 24 जून, 1977 में मध्य प्रदेश के सीएम बने थे. लेकिन छह महीने बाद 17 जनवरी, 1978 को ही उन्होंने बीमारी की बात कहते हुए सीएम पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि बाद में वे कई बड़ी जिम्मेदारी निभाते रहे।
भारतीय राजनीति में नेताओं का स्वास्थ्य बड़ा मुद्दा बन जाता है, लेकिन ज्यादतर अपने पद पर बने रहते हैं। कुछ नेताओं को ऐसी बीमारियां हुई हैं जो स्वाभाविक रूप से हुई हैं लेकिन कुछ नेताओं को जीवनशैली संबंधी विकारों या तनाव संबंधी समस्याओं के कारण पीड़ित देखा जाता है। ज्यादातर जानकारों का मानना है कि राजनेताओं की उम्र और स्वास्थ्य उनके पूर्णकालिक राजनेता बनने और अच्छी तरह से शासन करने की उनकी क्षमता को प्रभावित करते हैं। इस रिपोर्ट में हम कुछ राजनेताओं के स्वास्थ्य और उससे जुड़ी घटनाओं के बारे में बता रहे हैं।
अटल बिहारी वाजपेयी
- फोटो :
पीटीआई
अटल बिहारी वाजपेयी
जून 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी जब प्रधानमंत्री थे तो टाइम मैगजीन ने 10 जून को उनके स्वास्थ्य को लेकर एक स्टोरी प्रकाशित की थी जिसका शीर्षक था ‘अस्लीप एट द व्हील’। स्टोरी में कहा गया कि क्या प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भारत के परमाणु कार्यक्रम की अध्यक्षता करने के लिए फिट थे, क्योंकि वे कथित तौर पर कैबिनेट की बैठकों में सो गए थे। संभवत: यह पहली बार हुआ था जब किसी अंतरराष्ट्रीय पत्रिका में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की सेहत को लेकर खबर छापी गई थी। इसे लेकर देश में काफी हंगामा मचा और विवाद पैदा हो गया था। सरकार इतनी नाराज थी कि टाइम पत्रिका के दिल्ली संवाददाता एलेक्स पेरी के निर्वासन तक की नौबत आ गई थी। राजनीतिक जानकारों का मानना था कि यह वाजपेयी को प्रधानमंत्री पद से हटाने की एक रणनीति का हिस्सा था। हालांकि बाद में मैगजीन ने अपनी स्टोरी को लेकर माफी भी मांगी थी।
सूत्रों के मुताबिक इस घटना से कुछ समय पहले राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए सरकार में मंथन चल रहा था। संघ में यह तय किया गया था कि अब सरकार में नेतृत्व परिवर्तन किया जाए। माना जाता है कि इसी सिलसिले में संघ के कुछ नेताओं ने वाजपेयी से मुलाकात की थी और उनसे राष्ट्रपति बनने और और लाल कृष्ण आडवाणी को प्रधानमंत्री बनाने का सुझाव दिया था। उस समय वाजपेयी ने संघ नेताओं को कोई जवाब नही दिया। लेकिन इस घटना के कुछ दिनों बाद लाल कृष्ण आडवाणी को उप प्रधानमंत्री बना दिया गया, लेकिन चर्चाएं यहीं खत्म नहीं हुईं।
वाजेपयी ने विरोधियों को दिया जवाब
जिस दिन टाइम मैगजीन ने वाजपेयी की सेहत को लेकर स्टोरी प्रकाशित की थी उसी दिन वाजपेयी ने चौंकाने वाला कदम उठाते हुए ए पी जे अब्दुल कलाम को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने की घोषणा कर दी। जानकारों का कहना है कि यह एक तरह से विरोधियों को वाजपेयी का जवाब था जो कि सेहत को लेकर सवाल उठा रहे थे। बाद में वे 2004 तक अपने पद पर बने रहे। वाजपेयी की 2001 में घुटने की रिप्लेसमेंट सर्जरी हुई थी और 2004 में पद छोड़ने के बाद उनका स्वास्थ्य तेजी से बिगड़ गया।
जून 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी जब प्रधानमंत्री थे तो टाइम मैगजीन ने 10 जून को उनके स्वास्थ्य को लेकर एक स्टोरी प्रकाशित की थी जिसका शीर्षक था ‘अस्लीप एट द व्हील’। स्टोरी में कहा गया कि क्या प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भारत के परमाणु कार्यक्रम की अध्यक्षता करने के लिए फिट थे, क्योंकि वे कथित तौर पर कैबिनेट की बैठकों में सो गए थे। संभवत: यह पहली बार हुआ था जब किसी अंतरराष्ट्रीय पत्रिका में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की सेहत को लेकर खबर छापी गई थी। इसे लेकर देश में काफी हंगामा मचा और विवाद पैदा हो गया था। सरकार इतनी नाराज थी कि टाइम पत्रिका के दिल्ली संवाददाता एलेक्स पेरी के निर्वासन तक की नौबत आ गई थी। राजनीतिक जानकारों का मानना था कि यह वाजपेयी को प्रधानमंत्री पद से हटाने की एक रणनीति का हिस्सा था। हालांकि बाद में मैगजीन ने अपनी स्टोरी को लेकर माफी भी मांगी थी।
सूत्रों के मुताबिक इस घटना से कुछ समय पहले राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए सरकार में मंथन चल रहा था। संघ में यह तय किया गया था कि अब सरकार में नेतृत्व परिवर्तन किया जाए। माना जाता है कि इसी सिलसिले में संघ के कुछ नेताओं ने वाजपेयी से मुलाकात की थी और उनसे राष्ट्रपति बनने और और लाल कृष्ण आडवाणी को प्रधानमंत्री बनाने का सुझाव दिया था। उस समय वाजपेयी ने संघ नेताओं को कोई जवाब नही दिया। लेकिन इस घटना के कुछ दिनों बाद लाल कृष्ण आडवाणी को उप प्रधानमंत्री बना दिया गया, लेकिन चर्चाएं यहीं खत्म नहीं हुईं।
वाजेपयी ने विरोधियों को दिया जवाब
जिस दिन टाइम मैगजीन ने वाजपेयी की सेहत को लेकर स्टोरी प्रकाशित की थी उसी दिन वाजपेयी ने चौंकाने वाला कदम उठाते हुए ए पी जे अब्दुल कलाम को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने की घोषणा कर दी। जानकारों का कहना है कि यह एक तरह से विरोधियों को वाजपेयी का जवाब था जो कि सेहत को लेकर सवाल उठा रहे थे। बाद में वे 2004 तक अपने पद पर बने रहे। वाजपेयी की 2001 में घुटने की रिप्लेसमेंट सर्जरी हुई थी और 2004 में पद छोड़ने के बाद उनका स्वास्थ्य तेजी से बिगड़ गया।
एमजीआर
- फोटो :
सोशल मीडिया
एमजी रामचंद्रन
एमजीआर के नाम से मशहूर एमजी रामचंद्रन तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थे। तमिल फिल्मों और राजनीति में उनका दबदबा था। मुख्यमंत्री बनने वाले वे पहले फिल्म अभिनेता जिन्होंने 1977 से 10 वर्षों तक तमिलनाडु का नेतृत्व किया। एमजीआर को पांच अक्तूबर 1984 में एक स्ट्रोक के बाद चेन्नई के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुरुआत में उनकी हालत के बारे में किसी को कुछ पता नहीं था लेकिन बाद में कुछ अखबारों ने प्रकाशित किया कि उनका गुर्दा खराब हो चुका है और उन्हें स्ट्रोक आया है।
पूरे राज्य में राज्य में तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी। उनकी सेहत को लेकर मुख्य विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहा था। एमजीआर के समर्थक अस्पताल के बाहर जुटने लगे थे। डॉ एचवी हांडे जो उस समय स्वास्थ्य मंत्री थे। एमजीआर की स्थिति के बारे में प्रेस को जानकारी देने का काम कर रहे थे।
पार्टी में सत्ता का संघर्ष बढ़ा
1987 में उनकी मृत्यु के बाद राज्य में लगभग एक महीने तक अशांति रही। कथित तौर पर कई लोगों ने आत्महत्या कर ली और उनकी पार्टी एआईडीएमके में सत्ता का संघर्ष बढ़ा। एमजी के निधन के बाद उनकी सत्ता किसको सौंपी जाए इसको लेकर काफी हो-हल्ला हुआ था। लेकिन संघर्ष के बाद इस सत्ता को पाने में उनकी सबसे करीबी कही जाने वाली जयललिता ने बाजी मारी थी।
एमजीआर के नाम से मशहूर एमजी रामचंद्रन तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थे। तमिल फिल्मों और राजनीति में उनका दबदबा था। मुख्यमंत्री बनने वाले वे पहले फिल्म अभिनेता जिन्होंने 1977 से 10 वर्षों तक तमिलनाडु का नेतृत्व किया। एमजीआर को पांच अक्तूबर 1984 में एक स्ट्रोक के बाद चेन्नई के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुरुआत में उनकी हालत के बारे में किसी को कुछ पता नहीं था लेकिन बाद में कुछ अखबारों ने प्रकाशित किया कि उनका गुर्दा खराब हो चुका है और उन्हें स्ट्रोक आया है।
पूरे राज्य में राज्य में तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी। उनकी सेहत को लेकर मुख्य विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहा था। एमजीआर के समर्थक अस्पताल के बाहर जुटने लगे थे। डॉ एचवी हांडे जो उस समय स्वास्थ्य मंत्री थे। एमजीआर की स्थिति के बारे में प्रेस को जानकारी देने का काम कर रहे थे।
पार्टी में सत्ता का संघर्ष बढ़ा
1987 में उनकी मृत्यु के बाद राज्य में लगभग एक महीने तक अशांति रही। कथित तौर पर कई लोगों ने आत्महत्या कर ली और उनकी पार्टी एआईडीएमके में सत्ता का संघर्ष बढ़ा। एमजी के निधन के बाद उनकी सत्ता किसको सौंपी जाए इसको लेकर काफी हो-हल्ला हुआ था। लेकिन संघर्ष के बाद इस सत्ता को पाने में उनकी सबसे करीबी कही जाने वाली जयललिता ने बाजी मारी थी।
जयललिता
- फोटो :
ANI
जयललिता की सेहत को लेकर भी हुई थी सियासत
तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता भी लंबे समय तक बीमार रही थीं और अक्तूबर 2016 में वे करीब 75 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रही थीं। जयललिता का स्वास्थ्य राज्य में प्रशासनिक से ज्यादा राजनीतिक चिंता का कारण बन गया था। मुख्य विपक्षी दल डीएमके प्रमुख करुणानिधि ने कहा था कि तमिलनाडु सरकार की जिम्मेदारी है कि वह लोगों को मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य के बारे में बताए।
यह आरोप लगे कि जब जयललिता थीं, तब उनके मंत्रियों ने उनके ठीक होने के बारे में झूठ बोला था। जब वह सितंबर से दिसंबर 2016 तक अस्पताल में थीं, तब राज्य का कामकाज ठप हो गया था, लेकिन कहा गया कि वह अस्पताल से पत्र लिख रही थीं। कई लोगों ने हस्ताक्षर पर संदेह जताया था। राजनीतिक हालत ऐसे बन गए थे कि उनकी सेहत को लेकर एक सामाजिक कार्यकर्ता ने मद्रास उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर कर दी। जिसमें मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य पर स्पष्टीकरण मांगा गया था और कहा गया था कि जनता को जानने का अधिकार है कि उनकी सेहत कैसी है?
तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता भी लंबे समय तक बीमार रही थीं और अक्तूबर 2016 में वे करीब 75 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रही थीं। जयललिता का स्वास्थ्य राज्य में प्रशासनिक से ज्यादा राजनीतिक चिंता का कारण बन गया था। मुख्य विपक्षी दल डीएमके प्रमुख करुणानिधि ने कहा था कि तमिलनाडु सरकार की जिम्मेदारी है कि वह लोगों को मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य के बारे में बताए।
यह आरोप लगे कि जब जयललिता थीं, तब उनके मंत्रियों ने उनके ठीक होने के बारे में झूठ बोला था। जब वह सितंबर से दिसंबर 2016 तक अस्पताल में थीं, तब राज्य का कामकाज ठप हो गया था, लेकिन कहा गया कि वह अस्पताल से पत्र लिख रही थीं। कई लोगों ने हस्ताक्षर पर संदेह जताया था। राजनीतिक हालत ऐसे बन गए थे कि उनकी सेहत को लेकर एक सामाजिक कार्यकर्ता ने मद्रास उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर कर दी। जिसमें मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य पर स्पष्टीकरण मांगा गया था और कहा गया था कि जनता को जानने का अधिकार है कि उनकी सेहत कैसी है?
मनोहर पर्रिकर
- फोटो :
फाइल फोटो
मनोहर पर्रिकर
गोवा के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए दिवंगत मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर भी लंबे समय तक बीमार रहे। अग्नाशय के कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद 17 मार्च 2019 को निजी आवास पर उनका निधन हो गया। मनोहर पर्रिकर के खराब स्वास्थ्य ने गोवा में सत्ता संघर्ष शुरू कर दिया था और एक ‘स्वीकार्य उत्तराधिकारी’ की तलाश भारतीय जनता पार्टी के लिए एक चुनौती बन गई थी।
कई नेता बीमार
उद्धव ठाकरे की कथित बीमारी ने इस बात को एक बार फिर उजागर किया गया है कि देश के कई वरिष्ठ नेता गंभीर चिकित्सा समस्याओं से पीड़ित हैं। लगभग सभी राजनीतिक दलों के किसी न किसी तरह की चिकित्सा ले रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी स्वास्थ्य कारणों से ही पार्टी में सक्रियता से अपनी भूमिका नहीं निभा पा रही हैं। वे कई बार इलाज के लिए विदेश जाती हैं लेकिन पार्टी की तरफ से कभी भी आधिकारिक तौर पर कुछ भी नहीं कहा गया है। राजद अध्यक्ष लालू यादव किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं।
बताया जाता है कि सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव अल्पकालिक स्मृति खोने जैसी बीमारी से पीड़ित हैं। अपनी उम्र और स्वास्थ्य कारणों में उन्होंने पार्टी की बागडोर अखिलेश यादव को सौंप दी है। कहा जाता है कि पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह मधुमेह से पीड़ित हैं।
अमेरिका का उदाहरण
अमेरिका में यह नियमित रूप से राजनेताओं से पूछा जाने वाला प्रश्न है। दरअसल, अमेरिकी चुनाव में उम्मीदवार का स्वास्थ्य एक बड़ा मुद्दा होता है। 2016 के राष्ट्रपति चुनाव के समय राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन की खांसी और छींक स्वास्थ्य एक मुद्दा बन गया। था।
गोवा के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए दिवंगत मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर भी लंबे समय तक बीमार रहे। अग्नाशय के कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद 17 मार्च 2019 को निजी आवास पर उनका निधन हो गया। मनोहर पर्रिकर के खराब स्वास्थ्य ने गोवा में सत्ता संघर्ष शुरू कर दिया था और एक ‘स्वीकार्य उत्तराधिकारी’ की तलाश भारतीय जनता पार्टी के लिए एक चुनौती बन गई थी।
कई नेता बीमार
उद्धव ठाकरे की कथित बीमारी ने इस बात को एक बार फिर उजागर किया गया है कि देश के कई वरिष्ठ नेता गंभीर चिकित्सा समस्याओं से पीड़ित हैं। लगभग सभी राजनीतिक दलों के किसी न किसी तरह की चिकित्सा ले रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी स्वास्थ्य कारणों से ही पार्टी में सक्रियता से अपनी भूमिका नहीं निभा पा रही हैं। वे कई बार इलाज के लिए विदेश जाती हैं लेकिन पार्टी की तरफ से कभी भी आधिकारिक तौर पर कुछ भी नहीं कहा गया है। राजद अध्यक्ष लालू यादव किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं।
बताया जाता है कि सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव अल्पकालिक स्मृति खोने जैसी बीमारी से पीड़ित हैं। अपनी उम्र और स्वास्थ्य कारणों में उन्होंने पार्टी की बागडोर अखिलेश यादव को सौंप दी है। कहा जाता है कि पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह मधुमेह से पीड़ित हैं।
अमेरिका का उदाहरण
अमेरिका में यह नियमित रूप से राजनेताओं से पूछा जाने वाला प्रश्न है। दरअसल, अमेरिकी चुनाव में उम्मीदवार का स्वास्थ्य एक बड़ा मुद्दा होता है। 2016 के राष्ट्रपति चुनाव के समय राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन की खांसी और छींक स्वास्थ्य एक मुद्दा बन गया। था।