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उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण मतदाताओं की लहलहा रही है फसल, काटेगा कौन?

Wed, 26 Aug 2020 09:05 AM IST
देव कश्यप शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Wed, 26 Aug 2020 09:05 AM IST
सार

  • कांग्रेस, सपा, बसपा सबकी निगाह
  • भाजपा भी डैमेज कंट्रोल में जुटी
  • 12 प्रतिशत मतदाता सामाजिक समीकरण पर भारी

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Politics of Uttar Pradesh brahmin voters angry with BJP party engaged in Operation Damage Control
भाजपा और सपा

विस्तार

भाजपा के माथे पर ब्राह्मण मतदाताओं को लेकर बल है। उत्तर प्रदेश के संगठन मंत्री सुनील बंसल से लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह की टीम आपरेशन डैमेज कंट्रोल में जुट गई है। प्रयागराज से संघ के कार्यकर्ता, बनारस प्रांत में सक्रिय भूमिका निभा रहे ब्राह्मण नेता का कहना है कि यूपी में ब्राह्मणों की नाराजगी बढ़ी है।

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भाजपा के ही एक राज्यपाल के करीबी का भी मानना है कि कानपुर, लखनऊ, इलाहाबाद, बनारस, गोरखपुर मंडल में ब्राह्मण कुछ चिंतित हैं, लेकिन समय के सब ठीक हो जाएगा। बताते हैं सूबे में ठाकुरों के बढ़ रहे वर्चस्व, अधिकारियों की महत्वपूर्ण पदों पर तैनाती तथा ब्राह्मण और ठाकुर के बीच में गोरखपुर से गाजियाबाद तक खास किस्म की प्रतिस्पर्धा वर्चस्व के कारण यह स्थिति पैदा हुई है।
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ज्ञानपुर के विधायक विजय मिश्र पर कानूनी कार्रवाई के बाद भाजपा के रणनीतिकारों ने इस ओर विशेष ध्यान दिया। भाजपा के ब्राह्मण नेताओं ने ज्ञानपुर विधायक के खिलाफ तेजी से मोर्चा खोला। ताकि ब्राह्मणों के भीतर विजय मिश्र को लेकर गलत संदेश न जाने पाए।
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प्रदेश में 12 प्रतिशत हैं ब्राह्मण मतदाता
यूपी के राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार राज्य में करीब हर गांव में एक घर ही सही ब्राह्मण और दलित का जरूर हैं। ब्राह्मण मतदाता 12 प्रतिशत से ज्यादा हैं। यूपी में पूर्वांचवल की राजनीति को समझने वाले श्याम नारायण पांडे कहते हैं कि अगली जातियां हमेशा फ्लोटिंग वोट रही है। इसमें ब्राह्मण भी आता है और ठाकुर भी। जिधर यह फ्लोटिंग वोट मुड़ता है, उधर सरकार बनवा देता है। बताते हैं 2007 के चुनाव में ब्राह्मणों ने बसपा की तरफ रुख कर लिया था। मायावती पूर्ण बहुमत के साथ मुख्यमंत्री बनी थी।

2012 के चुनाव में सामाजिक समीकरण समाजवादी पार्टी के साथ चला गया था। अखिलेश यादव ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। श्याम नारायण के अनुसार 2014 से ब्राह्मण, ठाकुर, वैश्य, कुछ पिछड़ा वर्ग समेत अन्य भाजपा के साथ हैं। आप नतीजा देख सकते हैं कि 2014, 2019 के लोकसभा चुनाव तथा 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सफलता के झंडे गाड़ दिए हैं। बीएचयू से राजनीति शास्त्र की पढ़ाई करने के बाद स्थानीय सर्वे में व्यस्त संजय सिंह कहते हैं कि जिधर भी फ्लोटिंग वोट जाता, उसकी सरकार बनने की संभावना बढ़ जाती है। संजय सिंह कहते हैं कि कभी यह वोट बैंक कांग्रेस का होता था। आज उसकी जड़े सूख गई हैं। अब यह बसपा, सपा और भाजपा में अपना भविष्य देख रहा है।

बसपा देख रही है 2007 का सपना
बसपा ने 2007 में अपने वरिष्ठ नेता सतीश चंद्र मिश्र को आगे करके ब्राह्मण मतदाताओं को साथ लिया था। इसे तब मायावती की सोशल इंजीनियरिंग की संज्ञा दी गई थी। बाद में समाजवादी पार्टी ने अभिषेक मिश्रा को आगे करके अपने राजनीतिक अभियान को धार देने की कोशिश की। पार्टी के पास जनेश्वर मिश्र जैसे नेता भी थे। बसपा को यहां झटका लगा। ब्राह्मणों का मायावती से मोह भंग हुआ। अभी मोह भंग की स्थिति जारी है। हालांकि बसपा प्रमुख ब्राह्मण मतदाताओं को बसपा के पाले में करने के लिए हर दांव चल रही हैं। गांव-गांव के स्तर पर संदेश देने का प्रयास जारी है। इस बारे में श्याम नारायण पांडे का कहना है कि बसपा कोशिश जरूर कर रही है, लेकिन ब्राह्मणों की हालत दूध का जला छाछ फूंककर पीने जैसी है।

अखिलेश यादव के भी बदले हैं टोन
समाजवादी पार्टी के एमएलसी संजय लाठर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के करीबियों में हैं। लाठर को भरोसा है कि इस बार ब्राह्मण समाजवादी पार्टी के साथ जुड़ेगा। लाठर कहते हैं कि भाजपा को चुनाव में हराने की क्षमता जिसके पास होगी, उसे वोट मिलेगा। लाठर कहते हैं कि 2022 के प्रस्तावित विधानसभा चुनाव में भाजपा को हराने की क्षमता केवल समाजवादी पार्टी में है। ब्राह्मण, यादव, मुस्लिम, अन्य पिछड़ा वर्ग और गैर जाटव सब समाजवादी पार्टी के साथ जुड़ रहे हैं। समाजवादी पार्टी के जौनपुर से नेता सुशील चंद्र दूबे का भी मानना है कि ब्राह्मण भाजपा से नाराज होकर बड़े पैमाने पर पार्टी से जुड़ रहे हैं।

प्रियंका गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस चला रही है अभियान
ब्राह्मण की लहलहा रही फसल पर कांग्रेस की भी निगाह है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जतिन प्रसाद ने अभियान ही छेड़ दिया था। बिकरू गांव, कानपुर में कुख्यात अपराधी विकास दूबे के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद मध्यप्रदेश-उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार के ब्राह्मण विरोधी हो जाने हवा चल निकली थी। बनारस से अभय शंकर तिवारी और विनोद द्विवेदी कहते हैं कि योगी सरकार के ब्राह्मण विरोधी होने की भावना गांव-गांव में फैल गई है।


लखनऊ में दिनकर कपूर कहते हैं कि मिर्जापुर, सोनभद्र, डाला, चोपन से लेकर वह लखनऊ तक के बारे में बता सकते हैं कि ब्रह्मण राज्य सरकार से नाराज चल रहा है। यदि भाजपा ने डैमेज कंट्रोल नहीं किया और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने समझदारी दिखाई तो यूपी में राजनीतिक जमीन बदल सकती है। हालांकि, दिनकर का कहना है कि इससे पहले कांग्रेस को जमीन पर खड़ा भी होना होगा। युवक कांग्रेस के पदाधिकारी शिवराय तो कहते हैं कि ब्राह्मण कांग्रेस का परंपरागत वोटर रहा है। वह अपनी पार्टी की तरफ लौट रहा है।

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