नोटों को सड़ने से बचाने के लिए राजनीतिक पार्टियों का नया प्लान
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नोट बैन को लेकर मोदी सरकार के फैसले से उन तमाम राजनीतिक दलों के लिए बड़ी समस्या खड़ी हो गई है, जिनका वजूद ही कालेधन और खरीदे हुए मतदाताओं पर टिका है। खासकर जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, वहां, गैर-कानूनी तरीके से जमा किया गया धन राजनीतिक दलों के गले फांस बनता जा रहा है।
सूत्रों की मानें तो ये पार्टियां यूपी, पंजाब, उत्तराखंड और गोवा में चुनाव से पहले ही करोड़ों के 500 और 1000 के करेंसी नोटों को सड़ने से बचने के लिए नया दांव खेल सकती हैं।
सरकार की डेडलाइन के मुताबिक बैंकों से नोट बदली करने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर है। सूत्रों की मानें तो नोट बदली की अतिम तारीख से पहले ही राजनीतिक पार्टियों ने मतदाताओं को लुभाने के लिए थोड़े-थोड़े करके नोटों को उनमें बंटवा सकती हैं। सियासी पार्टियों को उम्मीद है कि ऐसा करके लोग बैंकों में जाकर नोट बदलवा सकते हैं और मतदान के वक्त उन्हें ही वोट देंगे।
परचूनी की दुकानों के जरिए बांटे जाएंगे नोट!
आमतौर दक्षिण भारत में चुनावों के दौरान मतदाताओं को पैसा बांटने का गैर-कानूनी रिवाज नजर आता है, लेकिन चुनाव फिलहाल उत्तर भारत में आने वाले हैं। ऐसे में सियासी दल झटके से उबरने के लिए एडवांस में ही मतदाताओं को नोट बंटवाने की रिस्क ले सकते हैं।
सूत्रों की मानें तो बदलते दौर के साथ मतदाता भी सियासी पार्टियों की तरह चालाक हो गया है। ऐसे में नोट बंटवाने का उपाय उनके लिए फायदे का सौदा होगा, यह कहना मुश्किल है। सियासी पार्टियां परचूनी की दुकानों के जरिए लोगों में नोट बंटवा सकती हैं।