फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Political Gossip: RSS chief Mohan Bhagwat commented during book launch

कानों देखी: जब आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने बोली ऐसी बात, पूरे हॉल में लगे ठहाके

Thu, 03 Oct 2019 06:24 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला
शशिधर पाठक, अमर उजाला Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 03 Oct 2019 06:24 PM IST
विज्ञापन
Political Gossip: RSS chief Mohan Bhagwat commented during book launch
sunil ambekar book Launch Rss Chief Mohan Bhagwat - फोटो : Social Media
हॉल खचाखच भरा था। मौका था रूपा पब्लिकेशन की तरफ से प्रकाशित सुनील आंबेकर की 21वीं सदी के आरएसएस रोडमैप पर लिखी पुस्तक के लोकार्पण का। पुस्तक का विमोचन संघ प्रमुख मोहन राव भागवत को करना था। आयोजकों ने पुस्तक को अच्छे ढंग से पूरी कुशलता के साथ चमकीले कागज में ढक रखा था। उद्घोषिका ने मोहन भागवत को आमंत्रित किया, आयोजकों ने किताब का बंडल संघ प्रमुख की तरफ बढ़ाया और संघ प्रमुख बंडल से किताब बाहर निकालने में जुट गए। जुट ही नहीं गए, बल्कि गांठ दर गांठ में उलझे बंधन को सुलझाने में जुट गए।
विज्ञापन


पूरे हाल में एक अजीब सी स्थिति पैदा हो गई। खैर, किसी तरह से बंधन खुले, किताब बाहर आई, लोकार्पण भी हो गया। लेकिन जब बारी संघ प्रमुख की आई, तो वह भला कब चूकने वाले थे। नहले पर दहला मारते हुए भागवत बोल पड़े, ''लेखक ने किताब लिखने में जितनी मेहनत की, उतना ही उन्होंने भी इसके लोकार्पण में की है''। आप समझ सकते हैं कि इसके बाद तो ठहाका लगना ही है।

विज्ञापन

'जंगल में कितने शेर होने चाहिए'

मोदी सरकार-1 के सबसे चमकते सितारे भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ही थे। हों भी क्यों न, पूरे देश में सड़क, एक्सप्रेस-वे का जाल जो बिछा दिया था। इतना ही नहीं बेबाक बयानों के लिए भी चर्चा में रहे, लेकिन अब गडकरी यदाकदा ही चर्चा में आ रहे हैं। केंद्रीय मंत्रियों के बीच में गडकरी की चर्चा करने पर उनका नाम सब बस आदर से लेकर चुप हो जाते हैं। राजस्थान से आने वाले एक मंत्री के सामने भी जब यह चर्चा आई, तो जनाब बोल पड़े ''जंगल में कितने शेर होने चाहिए''। यह सुनते ही सजी महफिल ठहाके से गूंज उठी। जनाब यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि यहां जो पतंग ज्यादा उड़ेगी, वह बिना डोर की हो जाएगी। इसलिए अच्छा है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बनकर रहिए। हर हाल में खुश रहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

कौन बनेगा दिल्ली भाजपा का चेहरा?

दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी की हसरत है कि उन्हें पार्टी दिल्ली का चेहरा बना दे। तिवारी इसके लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। तिवारी के सामने विजय गोयल हैं। विजय गोयल भी कड़ी मेहनत कर रहे हैं। तिवारी की ताकत दिल्ली में उ.प्र. खासकर पूर्वांचल और बिहार के लोग हैं। विरोध में विधूड़ी से लेकर दिल्ली के कई पुराने नेता हैं। तिवारी को बड़ा झटका तब लगा जब भाजपा हाईकमान ने उन्हें नचैया, गवैया की छवि से बाहर आने के लिए कहा। साथ ही, हिदायत दी कि वह राजनीतिक कार्यक्रमों में अपनी यह प्रतिभा जरा कम बिखेगें। वैसे भी दिल्ली के प्रभारी अब प्रकाश जावड़ेकर हैं।


जावड़ेकर को भाजपा ऐसे ही कड़े मोर्चे पर लगाती है। जावड़ेकर तिवारी टाइप पॉलिटिक्स के साथ-साथ गंभीर प्रोफेशनल पॉलिटिक्स को पसंद करते हैं। प्रकाश जावड़ेकर की टीम का भी मानना है कि दिल्ली में प्रधानमंत्री की छवि को आगे करके चुनाव लड़ने की बजाय दिल्ली के किसी चेहरे को आगे किया जाए। ऐसे में मामला थोड़ा पेचीदा भी हो गया है। इसी पेचीदगी ने तिवारी की भी धड़कन बढ़ा दी है।

2021 में लौटेंगे राहुल गांधी

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राजनीति में एक अजीब से मोड़ पर आकर खड़े हो गए हैं। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष ने अभी राजनीतिक गतिविधियों से खुद को बहुत सीमित कर लिया है। अब वह बहन प्रियंका गांधी वाड्रा को अपनी सलाह ज्यादा दे रहे हैं। राहुल की जगह धीरे-धीरे प्रियंका मोर्चा संभाल रही हैं। ऐसे में कांग्रेस पार्टी के भीतर राहुल ब्रिगेड भी थोड़ा तंग चल रही है। इन सबके बीच कहा जा रहा है कि राहुल गांधी रणनीतिक कारणों से शांत हैं। वह दो साल बाद यानी 2021 में फिर सक्रिय होंगे। बताते हैं कि 2021 आते-आते केंद्र की वर्तमान मोदी सरकार के सामने जनता की नाराजगी विकराल रूप ले लेगी, क्योंकि केंद्र सरकार माइक्रो-इकोनामिक्स को लेकर कोई बड़ा कदम नहीं उठा रही है। ऐसे में लोगों को राहुल गांधी प्रासंगिक नजर आने लगेंगे। रणनीतिकारों का कहना है कि 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव प्रस्तावित है और तब तक राहुल गांधी सरकार को कठघरे में खड़ा करके सक्रिय होंगे।

लौट आए 'बूढ़े' कांग्रेसियों के दिन

कांग्रेस अध्यक्ष पद से राहुल गांधी का इस्तीफा मंजूर होने और सोनिया गांधी के पदभार संभालने के बाद पुराने कांग्रेसियों के दिन लौट आए हैं। कुछ पूर्व महासचिव, जो राजनीति का चोला उतारकर चुपचाप घर बैठ गए थे, खबर है पिछले दिनों में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष से मुलाकात की है। एक पुराने महासचिव ने खुद ही अपनी भूमिका तलाश कर सलाह देना भी शुरू कर दिया है। एक पुराने नेता ने बाकायदा कोषाध्यक्ष और एक महासचिव का सहारा लेकर अपनी बात कांग्रेस अध्यक्ष तक पहुंचा दी है। सुनने में आ रहा है कि जल्द ही सोनिया गांधी के वक्त वाले कई पुराने नेता फिर सक्रिय होने वाले हैं। वहीं युवा और राहुल गांधी के पार्टी में आगे लाए गए कई नेता एक अजीब सी स्थिति से गुजर रहे हैं।

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed