गेम चेंजर बना राजस्थान: गहलोत के ये फैसले देशभर में कांग्रेस को दे सकते हैं संजीवनी, इस योजना से भाजपा को घेरने की रणनीति
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विस्तार
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक बार फिर से राष्ट्रीय स्तर पर गेम चेंजर बनकर उभर रहे है। चाहे राज्य में पुरानी पेंशन बहाली का फैसला या फिर लोगों फ्री वैक्सीनेशन करने का निर्णय, सभी में गहलोत सरकार अन्य राज्य सरकारों से आगे बढ़ती हुई दिखाई दे रही है। राजस्थान सरकार के इन्हीं निर्णयों को अब कांग्रेस पार्टी ने पूरे देश में भुनाना शुरू कर दिया है। गहलोत के पेंशन बहाली के मास्टर स्ट्रोक से भाजपा सहित अन्य पार्टियों की सरकारों पर भी इन फैसलों को लागू करने का दबाव बढ़ने लगा है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि गहलोत एक के बाद एक मास्टर स्ट्रोक खेल रहे हैं और कांग्रेस को राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक रूप से हावी होने का मौका दे रहे हैं। इन मुद्दों की बदौलत कांग्रेस केंद्र सरकार को घेर पा रही है तो भाजपा शासित राज्यों में भी इसे भुनाने की कोशिशों में जुट गई है। राज्य सरकार द्वारा लिए गए फैसलों से कांग्रेस मोदी सरकार और भाजपा पर हावी होने की कोशिश जरूर कर सकती है। लेकिन चुनावों में इसका कितना फायदा मिलेगा यह तो फिलहाल कहना संभव नहीं है। लेकिन कांग्रेस इससे देशभर में एक माहौल जरूर तैयार कर सकती है।
सरकारी कर्मचारियों की अहम भूमिका
दरअसल, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हाल ही में अपने बजट में सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन बहाली की घोषणा करने का निर्णय लिया था। सीएम के इस फैसले से पूरे देश में कांग्रेसी खुश हैं। कांग्रेस ने अन्य राज्यों में सत्ता में आने पर यह फैसला लागू करने की घोषणा की, तो दूसरे राज्यों की सरकारों पर भी यह फैसला लागू करने का दबाव बढ़ा दिया है। इस फैसले की पहल चूंकि राजस्थान सीएम गहलोत ने की है, लिहाजा कांग्रेस इसे पूरे देश में भुनाएगी। देश में जब कोरोना महामारी का प्रकोप फैलना शुरू हुआ, तो सबसे पहले राजस्थान में संपूर्ण लॉकडाउन लगाया गया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने पूरे देश में लागू किया था।
अमर उजाला से चर्चा में वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई कहते है कि किसी भी राज्य में सरकारी कर्मचारियों का तबका बहुत कम होता है। लेकिन चुनावों में इनका रोल बहुत अहम होता है। लेकिन चुनावों में अगर इस तबके को खुश रखा जाता है तो राजनीतिक दल को फायदा जरूर होता है। फिलहाल कांग्रेस को यह चाहिए जहां उनकी सरकारें हैं उन सभी राज्यों वे अपना प्रदर्शन सुधारें ताकि फिर से सत्ता में वापसी कर सकें। गहलोत सरकार द्वारा लिए गए फैसलों से कांग्रेस मोदी सरकार और भाजपा पर हावी होने की कोशिश जरूर कर सकती है। लेकिन चुनावों में इसका कितना फायदा मिलेगा यह तो फिलहाल कहना संभव नहीं है। लेकिन कांग्रेस इससे देशभर में एक माहौल जरूर तैयार कर सकती है।
गहलोत ये फैसले कांग्रेस के लिए साबित हुए फायदे का सौदा
सीएम गहलोत ने अब तक के अपने कार्यकाल में कई अहम फैसले किए हैं। जिन्होंने कांग्रेस को केंद्र सरकार को घेरने और राजनीतिक रूप से हावी होने का मौका दिया है। जब केंद्र सरकार ने फ्री वैक्सीन में ना-नुकुर की तो सीएम गहलोत ने राजस्थान में राज्य सरकार के खर्चे पर फ्री वैक्सीन की घोषणा की थी। इसके बाद मोदी सरकार को फ्री वैक्सीन की घोषणा करनी पड़ी। वहीं देश में सबसे पहले ब्लैक फंगस को महामारी राजस्थान में ही घोषित किया गया था। महिलाओं के लिए उड़ान योजना शुरू करने वाले पहला राज्य राजस्थान ही था। इसके अलावा चिरंजीवी योजना लागू कर हर परिवार को पांच लाख तक का बीमा कवर देने की शुरुआत भी राजस्थान से हुई।
इससे पहले सत्ता में आते ही गहलोत सरकार ने किसानों की कर्जमाफी का एलान किया था। इसके बाद वृद्ध एवं लघु-सीमांत किसानों को पेंशन की घोषणा कर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का काउंटर किया था। इतना ही नहीं किसानों को हर महीने कृषि बिल में एक हजार रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है। वहीं केंद्र सरकार जब तीन कृषि कानून लाई तो इनके विरोध में राज्य विधानसभा में राज्य सरकार अपने कानून लेकर आई।
वहीं हाल ही पेश किए गए बजट में आगामी चुनावों को लेकर कई ऐसी घोषणाएं की, जो कांग्रेस के लिए भविष्य में मददगार साबित हो सकती हैं। इनमें 50 यूनिट तक बिजली मुफ्त करना, 1.33 लाख महिलाओं को स्मार्टफोन, दुग्ध उत्पादकों को पांच रुपये प्रति लीटर का अनुदान, शहरी रोजगार गारंटी योजना, चिरंजीवी योजना में बीमा कवर 10 लाख रुपये करने और एक लाख सरकारी नौकरियां देने जैसी घोषणाएं राज्य सरकार को दूसरी सरकारों से आगे खड़ी करती हुई दिखाई दे रही हैं।